कौन हैं अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी, अब मोकामा में संभालेंगी मोर्चा! ऐसे शुरू हुई थी दोनों की लव स्टोरी
Neelam Devi biography (Anant Singh wife): बिहार की सियासत में हर चुनाव कुछ न कुछ नया मोड़ लेकर आता है, लेकिन 2025 का मोकामा चुनाव शायद सबसे नाटकीय साबित हो रहा है। बाहुबली नेता अनंत सिंह, जिन्हें लोग प्यार से 'छोटे सरकार' कहते हैं, एक बार फिर जेल की सलाखों के पीछे हैं।
अब जब पूरा मोकामा अनंत सिंह की गैर-मौजूदगी में चुनावी माहौल में उबल रहा है, तब फिर वही नाम चर्चा में है, नीलम देवी, उनकी पत्नी, जो इस बार अपने पति की राजनीतिक विरासत को बचाने की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरी हैं।

'छोटे सरकार' की परछाईं से निकलकर बनीं 'छोटी सरकार'
नीलम देवी की कहानी सिर्फ एक बाहुबली की पत्नी की नहीं, बल्कि उस महिला की है जिसने बार-बार अपने पति की अनुपस्थिति में राजनीति की जिम्मेदारी उठाई। जब-जब अनंत सिंह जेल गए, तब-तब नीलम देवी ने घर से बाहर निकलकर मोकामा की सियासत, अनंत की संपत्ति, और उनके संगठन को संभाला। उनकी ताकत इस बात में रही कि उन्होंने हमेशा पर्दे के पीछे रहकर भी मोर्चा संभाला - और जब वक्त ने पुकारा, तो मैदान में उतरने से कभी पीछे नहीं हटीं।
कैसे शुरू हुई अनंत सिंह और नीलम देवी की प्रेम कहानी
नीलम देवी और अनंत सिंह की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं। नीलम का जन्म 11 फरवरी 1971 को पटना जिले के बाढ़ में हुआ। पढ़ाई उन्होंने आठवीं क्लास तक की, लेकिन उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ एक परीक्षा केंद्र में आया।

अनंत सिंह ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था, "पहली बार मैं उन्हें परीक्षा दिलाने ले गया था। वहीं पहली नजर में प्यार हो गया। कुछ दिन बाद शादी कर ली और कलकत्ता के काली मंदिर में जाकर फेरे लिए।" यह शादी सिर्फ दो लोगों की नहीं, बल्कि उस राजनीतिक साझेदारी की शुरुआत थी, जिसने आने वाले दो दशकों तक मोकामा की राजनीति को दिशा दी।
नीलम का पहला सियासी इम्तिहान -लोकसभा चुनाव 2019
नीलम देवी का पहला बड़ा राजनीतिक मुकाबला 2019 के मुंगेर लोकसभा चुनाव में हुआ। कांग्रेस ने उन्हें टिकट दिया, जबकि आरजेडी ने समर्थन। नीलम ने जेडीयू के ललन सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा और लगभग 3.6 लाख वोट हासिल किए। हालांकि हार मिली, लेकिन वह चुनाव नीलम के लिए सियासी पहचान का सबब बन गया। लोगों ने पहली बार देखा कि 'छोटे सरकार' की पत्नी सिर्फ नाम की नहीं, बल्कि असली राजनीति समझने वाली शख्सियत हैं।

2022 में मोकामा की 'विधायक जी' बनीं
2022 में किस्मत ने नीलम देवी को बड़ा मौका दिया। जब अनंत सिंह को UAPA केस में 10 साल की सजा हुई और उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई, तो उन्होंने जेल से ही अपनी पत्नी को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
आरजेडी के टिकट पर नीलम देवी ने मोकामा उपचुनाव लड़ा और बीजेपी की सोनम देवी को हराकर पहली बार विधायक बनीं। यह जीत नीलम के लिए सिर्फ सत्ता में एंट्री नहीं थी। यह उस भरोसे की परीक्षा थी जो उनके पति ने जेल की सलाखों से उन पर जताया था।

सत्ता में थीं नीलम लेकिन रिमोट अनंत के पास
भले ही नीलम विधायक बनीं, लेकिन सत्ता का रिमोट कंट्रोल हमेशा अनंत सिंह के हाथ में रहा। वह मोकामा की जनता के बीच जातीं, कामों की समीक्षा करतीं, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा अनंत का होता था। नीलम ने अपने कार्यकाल में कई विकास योजनाएं शुरू कीं, लेकिन जनता के बीच उनकी छवि अब भी 'छोटे सरकार की पत्नी' तक सीमित रही।
2025 का मोड़-पति की नाराजगी और सियासी वापसी
अगस्त 2025 में जब अनंत सिंह जेल से बरी होकर बाहर आए, तो सबको लगा कि 'छोटे सरकार' की वापसी होगी। उन्होंने ऐलान कर दिया कि 2025 का चुनाव वह खुद लड़ेंगे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने पत्नी के काम से असंतोष जताया और कहा, "नहीं। बढ़िया काम नहीं की। जनता से मिली-जुली नहीं। हम जनता के बीच रहते हैं, वो बच्चों के साथ दिल्ली में।"

यह बयान सुनकर सब दंग रह गए। जो महिला जेल के दौरान घर और राजनीति दोनों संभाल रही थी, उसे अब खुद के ही पति ने किनारे कर दिया था। लेकिन किस्मत का पहिया तेजी से घूम गया। अनंत सिंह की ताजा गिरफ्तारी ने मोकामा की सियासत में फिर से हलचल मचा दी है। अब एक बार फिर पूरा जिम्मा नीलम देवी के कंधों पर है। वही पत्नी, जिन्हें कुछ महीने पहले 'काम न करने' के आरोप में राजनीतिक रूप से किनारे किया गया था, अब वही पति की सीट और साख दोनों बचाने निकलेंगी।
नीलम देवी की संपत्ति
नीलम देवी बिहार की सबसे अमीर नेताओं में से एक हैं। हलफनामे के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति 62.72 करोड़ रुपये है, जो उनके पति अनंत सिंह (37.88 करोड़) से भी अधिक है। उनके पास 13 करोड़ की चल संपत्ति और लगभग 50 करोड़ की अचल संपत्ति है। पटना की फ्रेजर रोड पर उनका 'हसन मंजिल' नाम का व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चर्चा में रहता है।
हालांकि, उन पर कई आपराधिक मामले भी दर्ज हैं जिनमें हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी और सरकारी सेवक पर हमला जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। नीलम देवी ज्यादातर सार्वजनिक कार्यक्रमों में पारंपरिक साड़ी या सलवार सूट में नजर आती हैं। उनकी पब्लिक पर्सनैलिटी में सादगी दिखती है, लेकिन राजनीतिक अनुभव और आत्मविश्वास उन्हें भीड़ में अलग बनाते हैं। उनके समर्थक उन्हें "छोटी सरकार" कहकर बुलाने लगे हैं।
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