कौन हैं पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणी? जिन्होंने 14वीं बार बदली पार्टी, अब जनसुराज छोड़ कर इस दल का थामा दामन
Who is former Union Minister Nagmani: बिहार की राजनीति में दल-बदल कोई नई बात नहीं, लेकिन जब बात आती है पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि कुशवाहा की, तो यहां हर रिकॉर्ड ध्वस्त हो जाता है। 'पलटीमार' उपाधि पाने वाले नागमणि ने एक बार फिर रंग बदल डाला और 14वीं बार नई पार्टी का झंडा थाम लिया। कभी लालू यादव के राजद से सियासी सफर शुरू करने वाले नागमणि LJP, BJP, JDU, NCP, RLSP तक तमाम पड़ावों पर उतरे-चढ़े, लेकिन कहीं भी स्थायी पता दर्ज नहीं कर पाए।
अब उनकी राजनीतिक गाड़ी फिर से बीजेपी के दरवाज़े पर आकर रुकी है। खास बात यह कि उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मंत्री सुचित्रा सिन्हा भी इस 'राजनीतिक यात्रा' की सहयात्री बन गई हैं। इस रिपोर्ट में जानते हैं नागमणि की दल-बदल गाथा।

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सिर्फ 6 महीने में यू-टर्न, फिर लौटे BJP में
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनसुराज को बड़ा झटका देते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि ने एक बार फिर पलटी मार दी और बीजेपी का दामन थाम लिया। महज़ 6 महीने पहले ही उन्होंने प्रशांत किशोर के विज़न पर भरोसा जताते हुए बीजेपी छोड़कर जनसुराज का रुख किया था। लेकिन अब चुनावी माहौल गरमाते ही उनकी सियासी गाड़ी फिर से पुराने ठिकाने यानी बीजेपी के आंगन में आकर रुक गई। इस बार उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मंत्री सुचित्रा सिन्हा भी उनके साथ हैं और उन्होंने भी बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली है।
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किन-किन पार्टियों में रहे हैं नागमणि
- शोषित समाज दल (पिता जगदेव प्रसाद की पार्टी, यहीं से राजनीति की शुरुआत)#
- इंडियन नेशनल कांग्रेस (कांग्रेस)
- जनता दल
- राष्ट्रीय जनता दल (RJD)
- राष्ट्रीय जनता दल (डेमोक्रेटिक)
- बहुजन समाज पार्टी (BSP)
- लोक जनशक्ति पार्टी (LJP)
- जनता दल (यूनाइटेड) JDU
- नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP)
- ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU)
- समरस समाज पार्टी
- राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP)
- जनसुराज (प्रशांत किशोर की पार्टी)
- भारतीय जनता पार्टी (BJP) - (पहले भी रह चुके थे, अब 2025 में दोबारा शामिल)
केंद्र से लेकर बिहार तक मंत्री रह चुके नागमणि
नागमणि कुशवाहा का राजनीतिक सफर जितना उतार-चढ़ाव भरा रहा है, उतना ही रंग-बिरंगा भी। वे न केवल बिहार बल्कि केंद्र की राजनीति में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। 1999 में संयुक्त बिहार की चतरा लोकसभा सीट से राजद के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार संसद पहुंचे। इसके बाद उन्होंने पाला बदला और एनडीए का हिस्सा बन गए। इसी दौरान अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्हें केंद्रीय मंत्री बनने का मौका मिला।
केंद्र के साथ-साथ नागमणि ने बिहार की राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई। वे खुद बिहार विधान परिषद में जगह बनाने में सफल रहे। उनकी पत्नी सुचित्रा सिन्हा ने भी जदयू से चुनाव जीतकर नीतीश सरकार में मंत्री पद संभाला। इस तरह नागमणि और उनका परिवार, दोनों ही राज्य और केंद्र की सत्ता का हिस्सा रह चुके हैं।
पिता डिप्टी सीएम, ससुर CM रह चुके हैं
नागमणि कुशवाहा की राजनीति का रिश्ता सीधे तौर पर उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है। उनके पिता जगदेव प्रसाद बिहार के कद्दावर समाजवादी नेता रहे हैं। उन्हें "बिहार लेनिन" कहा जाता था। शोषित समाज के अधिकारों के लिए उन्होंने बड़े आंदोलन किए। वे न केवल विधायक और संसद सदस्य रहे बल्कि बिहार के उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) भी बने। 1974 में एक आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में उनकी मौत हो गई थी।
नागमणि की पत्नी सुचित्रा सिन्हा भी मजबूत राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनके पिता सतीश प्रसाद सिंह कुछ समय के लिए बिहार के मुख्यमंत्री रहे। यानी नागमणि को राजनीति घर और ससुराल दोनों तरफ से विरासत में मिली।












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