Deepak Prakash: कौन हैं दीपक प्रकाश? बिना चुनाव लड़े ही नीतीश ने क्यों बनाया मंत्री? पिता सांसद और मां हैं MLA
Deepak Prakash Bihar Minister: बिहार के गांधी मैदान में हुए शपथ ग्रहण समारोह में इस बार एक ऐसा चेहरा भी नजर आया, जिसने चुनावी मैदान में कदम तक नहीं रखा था फिर भी मंत्री पद की शपथ ले ली। नाम है-दीपक प्रकाश। अगर चेहरे से नहीं पहचानते हैं तो उनके पिता का नाम जरूर जानते होंगे। वे हैं उपेंद्र कुशवाहा, बिहार की राजनीति में 'लव-कुश' समीकरण के सबसे बड़े चेहरों में से एक।
नीतीश कुमार के 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही उनका मंत्रिमंडल भी आकार ले गया और इसी कैबिनेट में रालोमो कोटे से दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया है। यह नियुक्ति अचानक हुई और अंतिम समय में समीकरण बदलने से उनकी एंट्री ने काफी चर्चा भी पैदा की।

🟡 आखिरी समय में बदला समीकरण - मां नहीं, बेटे को मिली जगह
रालोमो कोटे से मंत्री पद के लिए पहले दीपक प्रकाश की मां स्नेहलता कुशवाहा का नाम लगभग तय माना जा रहा था। स्नेहलता कुशवाहा सासाराम से इस बार विधायक चुनी गई थीं। पहले इन्ही का नाम मंत्री के लिए आगे चल रहा था। लेकिन शपथ ग्रहण से ठीक पहले समीकरण बदला और दीपक प्रकाश को कैबिनेट में शामिल कर लिया गया। इस फैसले ने साफ कर दिया कि उपेंद्र कुशवाहा ने इस बार अपने बेटे को आगे बढ़ाने का मन पहले ही बना लिया था।
🟡 कौन हैं दीपक प्रकाश - परिवार में तीसरी पीढ़ी की राजनीतिक मौजूदगी (who Is Deepak Prakash)
🔹 दीपक प्रकाश की परवरिश और पारिवारिक पृष्ठभूमि उन्हें राजनीति की मुख्यधारा से पहले ही जोड़ चुकी थी। उनके दादा स्वर्गीय मुनेश्वर सिंह समाजसेवी और कारोबारी थे और जंदाहा के समता कॉलेज की स्थापना में उनकी बड़ी भूमिका थी। कॉलेज का नाम भी उन्हीं के सम्मान में रखा गया है।
🔹 उनके पिता उपेंद्र कुशवाहा न सिर्फ बिहार की राजनीति में बड़ा नाम रहे हैं, बल्कि राज्यसभा सांसद, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा सांसद और केंद्र सरकार में मानव संसाधन राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे लंबे समय तक समता कॉलेज, जंदाहा में प्रोफेसर भी रहे।
🔹 दीपक की मां स्नेहलता कुशवाहा इस बार सासाराम विधानसभा से विधायक बनी हैं। यानी राजनीति इस परिवार में किसी नई बात की तरह नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही विरासत है।
🟡 कंप्यूटर साइंस इंजीनियर से राजनीति तक का सफर
🔹 दीपक प्रकाश का जन्म 22 अक्टूबर 1989 को हुआ। उनकी स्कूली पढ़ाई पटना से हुई है। दीपक प्रकाश ने 2005 में ICSE बोर्ड से 10वीं और 2007 में CBSE बोर्ड से 12वीं पास की।
🔹 इसके बाद उन्होंने मणिपाल के MIT से कंप्यूटर साइंस में B.Tech (2011) पूरा किया। वे 2011 से 2013 तक एक मल्टीनेशनल कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे। बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर बिजनेस की ओर रुख किया और फिर धीरे-धीरे राजनीति में सक्रिय होने लगे।
🟡 2019-20 में शुरू हुआ राजनीतिक एक्टिविज्म
हालांकि दीपक बचपन से राजनीति के माहौल में रहे, लेकिन उनकी सक्रिय भूमिका 2019-20 के आसपास शुरू हुई। उन्होंने पिता उपेंद्र कुशवाहा के संगठनात्मक और राजनीतिक कामों में हाथ बंटाना शुरू किया। युवाओं के मुद्दे, सामाजिक न्याय और पार्टी की रीति-नीति को समझते हुए वे जल्दी ही पार्टी का जाना-पहचाना चेहरा बन गए।
🟡 शपथ लेकर बोले दीपक - 'पिता और पार्टी का आभारी हूं'
मंत्री पद की शपथ लेने के बाद दीपक प्रकाश ने कहा, "मैं अपने नेता और पिता उपेंद्र कुशवाहा को यह अवसर देने के लिए धन्यवाद देता हूं। मुझे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करने का मौका मिला है, यह मेरे लिए सम्मान की बात है।"
🟡 कैबिनेट में तो जगह मिली, अब छह महीने में विधायक/MLC बनना जरूरी
चूंकि दीपक चुनाव नहीं लड़कर आए हैं इसलिए नियमों के मुताबिक उन्हें 6 महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा। इसी के साथ यह लगभग तय माना जा रहा है कि उन्हें एनडीए की तरफ से एमएलसी सीट दी जाएगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह शर्त पहले ही NDA-RLM डील का हिस्सा थी। यानी मंत्री पद + MLC सीट-दोनों पहले से तय थे।
🟡 एक तीर से दो निशाने - कुशवाहा ने मजबूत की अपनी पकड़
इस फैसले ने एक बात और स्पष्ट कर दी है कि उपेंद्र कुशवाहा ने NDA के साथ समझौते में अपने बेटे की राजनीतिक भविष्य की सुरक्षित राह बना ली है। यह कदम लव-कुश समीकरण को साधने और रालोमो के महत्व को दिखाने का भी प्रयास माना जा रहा है।












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