कौन हैं सांसद अयोध्या रामी रेड्डी? प्रशांत किशोर की पार्टी को क्यों दिए 14 करोड़, किस पार्टी से है संबंध
Prashant Kishor Ayyodhya Rami Reddy: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की राजनीति अब और गर्मा गई है। इसी बीच जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने बीजेपी और JDU के कई बड़े नेताओं पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने नीतीश सरकार के मंत्री अशोक चौधरी और बीजेपी सांसद संजय जायसवाल पर भी सीधे सवाल उठाए।
इसके अलावा, प्रशांत किशोर ने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी जनसुराज को एक सांसद से 14 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इस बयान के बाद बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद संजय जायसवाल ने चंदा देने वाले अयोध्या रामी रेड्डी को 'दागी सांसद' करार देते हुए प्रशांत किशोर से सवाल किए। अब सवाल यह है कि अयोध्या रामी रेड्डी कौन हैं और उन्होंने प्रशांत किशोर की पार्टी को किस तरह मदद की?

प्रशांत किशोर ने क्या दावा किया था?
प्रशांत किशोर ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया कि उनकी पार्टी जनसुराज को देश के सबसे अमीर सांसद अयोध्या रामी रेड्डी ने 14 करोड़ रुपए चंदा दिए थे। उन्होंने बताया कि यह चंदा उन्होंने पहले की गई मदद के बदले में लिया। इस खुलासे के बाद बीजेपी ने प्रशांत किशोर पर हमलावर रुख अपनाया है और सवाल उठाए हैं कि इतनी बड़ी रकम क्यों दिया।
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कौन हैं अयोध्या रामी रेड्डी?
अयोध्या रामी रेड्डी एक भारतीय राजनीतिज्ञ और व्यवसायी हैं। वे 2020 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के सदस्य के रूप में आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए। वे रामकी ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ के संस्थापक हैं, जिसकी कुल संपत्ति लगभग 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर (~2577 करोड़ रुपये) है, और वह भारतीय संसद के दूसरे सबसे अमीर राज्यसभा सदस्य माने जाते हैं।
उनकी देनदारियां लगभग 154 करोड़ रुपये बताई गई हैं। शिक्षा के मामले में उन्होंने हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग से 2001-03 में पोस्ट ग्रेजुएट मास्टर ऑफ़ इंजीनियरिंग (सिविल) की पढ़ाई पूरी की।
प्रशांत किशोर को क्यों दिया चंदा?
प्रशांत किशोर को 14 करोड़ रुपए का चंदा सांसद अयोध्या रामी रेड्डी ने पहले की गई मदद के बदले दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीके ने खुद स्वीकार किया कि यह चंदा राजनीतिक या प्रशासनिक मदद के बदले में उनकी पार्टी जनसुराज को मिला। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य सिर्फ पार्टी को वित्तीय सहयोग देना नहीं था। इस खुलासे के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और बीजेपी ने प्रशांत किशोर पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए हैं।
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