Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Bihar Politics: 'मिशन 2025' में क्या होगा 'फ़ॉर्मूला नीतीश', CM की कुर्सी रहेगी बरकरार, या बदलेगा चेहरा?

Bihar Politics: महाराष्ट्र में तीन पार्टियों वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने चुनाव लड़ा। उस समय मुख्यमंत्री रहे शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने प्रचार अभियान का नेतृत्व किया। हालांकि, गठबंधन ने कभी भी शिंदे को अपना मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया। चुनाव संपन्न होने तक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सहायक भूमिका निभाई।

नतीजों के बाद गठबंधन में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। नैतिक आधार पर या संभवत, बीजेपी के दबाव के कारण शिंदे ने देवेंद्र फडणवीस के लिए अपनी कुर्सी खाली कर दी। इसके विपरीत, बिहार के पिछले विधानसभा चुनाव में कम सीटों के बावजूद बीजेपी ने अपने पुराने सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) (जेडीयू) के नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप दी।

mission 2025 formula nitish

बिहार का राजनीतिक परिदृश्य
बिहार में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। माना जा रहा है कि हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मिली बड़ी जीत से भाजपा का मनोबल बढ़ा है। इसके अलावा बिहार और उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावों के नतीजों ने भी भाजपा के आत्मविश्वास को और मजबूत किया है।

इससे पता चलता है कि बीजेपी बिहार में पिछली गलतियों को नहीं दोहराएगी। अगर चुनाव नतीजे पिछले नतीजों की तरह ही रहे तो नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री के तौर पर दो दशक पुरानी सुरक्षित स्थिति खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि मिशन 2025 में क्या होगा 'फ़ॉर्मूला नीतीश', CM की कुर्सी रहेगी बरकरार, या बदलेगा चेहरा?

सीट शेयरिंग की गतिशीलता
मौजूदा हालात और पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए, ऐसा लगता नहीं है कि नीतीश कुमार अपनी पार्टी से ज़्यादा सीटें बीजेपी को देंगे। ऐतिहासिक रूप से, बीजेपी और जेडीयू ने बराबर सीटों पर चुनाव लड़ा है या जेडीयू को ज़्यादा सीटें मिली हैं। महाराष्ट्र में, बीजेपी ने ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा और उसी हिसाब से जीत हासिल की।

सहयोगी दलों को कुल 288 सीटों में से भाजपा के हिस्से में आई 149 सीटों के मुकाबले कम सीटें मिलीं। बिहार में दोनों दल आमतौर पर बराबर-बराबर चुनाव लड़ते रहे हैं या सीटों के बंटवारे में जेडीयू को बढ़त हासिल रही है। 2020 के नतीजे अपवाद थे, इसलिए बिहार में महाराष्ट्र का फॉर्मूला लागू करना असंभव लगता है।

भाजपा का ऐतिहासिक प्रदर्शन
2005 से लेकर 2020 तक देखें तो बीजेपी की सीटें 100 से नीचे रहीं और दूसरे या तीसरे नंबर पर रहीं। 2005 में जब उन्होंने जेडीयू के साथ गठबंधन किया था, तब जेडीयू ने 139 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 88 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 54 सीटें हासिल की थीं।

2010 में दोनों दल फिर साथ आए, जेडीयू ने 115 सीटें जीतीं जबकि बीजेपी को 91 सीटें मिलीं। 2015 तक बीजेपी को सिर्फ़ 53 सीटें मिलीं। हालांकि 2020 में पिछले सालों के मुक़ाबले उनकी सीटों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ, लेकिन फिर भी वे सिर्फ़ 74 सीटों पर सिमट गईं।

नीतीश कुमार की चुनौतियां
आंकड़ों के मुताबिक, अगर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान नहीं होते तो नीतीश कुमार की जेडीयू पिछले चुनाव में दो से तीन दर्जन सीटें ज्यादा हासिल कर सकती थी। चिराग ने नीतीश को सिर्फ 43 सीटों पर सीमित कर दिया, जिसका खामियाजा उन्हें आज भी भुगतना पड़ रहा है।

चुनाव के बाद विधानसभा में बड़ी पार्टी होने के बावजूद नीतीश कुमार के समर्थन के बिना भाजपा सरकार बनाने का सपना भी नहीं देख सकती थी। उन्हें समझ में आ गया कि एनडीए नीतीश की भावनाओं का सम्मान करते हुए उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है।

भाजपा को नीतीश के अतीत से यह भी पता है कि यदि उन्हें मुख्यमंत्री पद से वंचित किया गया तो वे महागठबंधन में शामिल होकर लाभ उठा सकते हैं और अंतत, ऐसा हुआ भी। पहले केवल लालू प्रसाद यादव की अगुवाई वाले राजद के महागठबंधन का सामना कर रही भाजपा सामना कर रही थी।

क्या है 'फ़ॉर्मूला नीतीश'?
अब बिहार की सियासत में नए खिलाड़ी प्रशांत किशोर के जन सुराज की भी एंट्री हो चुकी है। जो कि चुनौती बनकर उभरी है। विधानसभा उपचुनाव के नतीज़ो से यह साफ भी हो चुका है। भाजपा अकेले पर्याप्त सीटें हासिल कर सकती है। ज़्यादा सीटें लाने के बाद भी एनडीए गठबंधन को 'नीतीश फ़ॉर्मूला' पर चलना ही होगा।

भाजपा अगर ऐसा नहीं करती है तो, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए यह नई बात नहीं होगी कि, सीएम की कुर्सी के लिए वह फिर से पाला बदल लें। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि इंडिया गठबंधन की तरफ़ से आज भी खुला ऑफर है। महागठबंधन के नेता नीतीश कुमार को साथ लेने में ज़रा भी नहीं देर नहीं करेंगे।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+