Weather: नेपाल में भारी बारिश के बाद भूस्खलन, 192 की गई जान, बिहार में जल प्रलय का खतरा! कोसी नदी का बांध टूटा

Flood Alert in Bihar: बिहार में बाढ़ की स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। खासकर नेपाल में तीन दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण। नेपाल ने अपना पानी बिहार की कोसी और गंडक नदियों में छोड़ दिया, जिससे इन नदियों का जलस्तर काफी बढ़ गया है। अब इन नदियों में बाढ़ ने एक लाख से ज्यादा लोगों को घेर लिया है और गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने का भी डर है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल में भारी बारिश के बाद भूस्खलन बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 192 हो गई।

पटना समेत बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। राज्य और केंद्र सरकार की टीमें इस संकट से निपटने के लिए अलर्ट मोड में हैं, लेकिन बाढ़ के पानी से लाखों लोगों की जिंदगी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

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सीतामढ़ी में बांध टूटने से 15 गांव प्रभावित

सीतामढ़ी जिले के बेलसंड प्रखंड के मधकौल गांव के पास बागमती तटबंध में माउस होल से रिसाव के कारण बांध टूट गया। इस घटना से 15 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे करीब 25,000 लोग प्रभावित हुए हैं। प्रभावित गांवों में मधकौल, जाफरपुर, पंडहिया, ओलीपुर, कंसार और बसौल प्रमुख हैं, जहां पानी की गहराई लगभग पांच फीट तक पहुंच गई है। मुख्य सड़कों और ग्रामीण रास्तों पर पानी का बहाव तेज हो गया है, जिससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है।

कोसी नदी के डिस्चार्ज में कमी, लेकिन खतरा बरकरार
नेपाल में 28 सितंबर की शाम को बारिश थमने के बाद कोसी नदी के डिस्चार्ज में थोड़ी कमी आई, लेकिन फिर भी हालात गंभीर बने हुए हैं। 28 की रात को 12 क्षेत्र से 5.82 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया, जो इस साल का सबसे ज्यादा है।

कोसी बैराज पर पानी का बहाव, 56 साल बाद सबसे ज्यादा पानी छोड़ा गया

नेपाल में भारी बारिश के कारण कोसी बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं, जिससे उत्तर बिहार में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि कोसी बैराज पर बने पुल के ऊपर से पानी बहने लगा है, और एहतियातन पुल पर गाड़ियों की आवाजाही रोक दी गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्होंने पिछले 50 सालों में कोसी नदी में इतना पानी कभी नहीं देखा। 2008 में कुशहा बांध टूटने की वजह से बिहार में भयंकर बाढ़ आई थी, और इस बार हालात उससे भी ज्यादा गंभीर नजर आ रहे हैं, क्योंकि 5.5 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा जा चुका है।

राज्य और केंद्र सरकार अलर्ट मोड में
बिहार में बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्य और केंद्र सरकार दोनों अलर्ट हो गई हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने NDRF के साथ समीक्षा बैठक की है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मदद पहुंचाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों को तैयार रखा गया है। राज्य सरकार ने भी अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने और सभी आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए हैं।

नेपाल में बाढ़ की तबाही, 192 की मौत
नेपाल में आई इस भारी बारिश और बाढ़ ने वहां के कई हिस्सों को जलमग्न कर दिया है। गृह मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में शनिवार से भारी बारिश के बाद भूस्खलन बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 192 हो गई। नेपाल में आई इस तबाही का असर बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भी देखने को मिल रहा है।

बाढ़ की चपेट में आने वाले जिले
नेपाल से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण बिहार के कई जिले बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। पश्चिम और पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, अररिया, सुपौल, कटिहार, पूर्णिया जैसे जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। इन जिलों के निचले इलाकों में पानी घुस चुका है, और यहां के लोग बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे हैं।

2008 जैसी बाढ़ की आशंका
2008 में कुशहा बांध के टूटने से बिहार में भारी तबाही मची थी, और इस बार भी लोगों को वैसी ही स्थिति का डर सता रहा है। हालांकि, इस बार पानी का बहाव पहले से ज्यादा है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

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