Bihar Dengue Case: बिहार में बढ़ रहे डेंगू के मरीज़, बचाव के लिए करें ये काम
Bihar Dengue Case बच्ची के परिजनों ने बताया कि 10 अक्टूबर को डेंगू की पुष्टि होने के बाद निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था लेकिन फ़ायद नहीं होने की वजह से एनएमसीएच में भर्ती कराया गया। वहीं डॉक्टरों ने...
Bihar Dengue Case: बिहार में डेंगू क़हर बरपा रहा है, राजधानी पटना एनएमसीएच में पिछले छह दिनों में डेंगू से तीन बच्चों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य मुख्यालय को को मिले रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के विभिन्न जिलों से 305 नए केस सामने आए हैं। जिसमें पटना से 265 नए मामले सामने आए हैं। वहीं सिवान और जहानाबाद जिले में भी डेंगू का प्रकोप जारी है। रविवार को नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में चार महीने की बच्ची डेंगू की वजह से ज़िदगी की जंग हार गई। 13 अक्टूबर को गर्दनीबाग की रहने वाली बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसे बुखार, मतली और सांस में तकलीफ जैसे लक्षण थे। डॉक्टरों की मानें तो बच्ची का शॉक सिंड्रोम के जकड़ने की वजह से लीवर खराब हो गया थी। इसी वजह से बच्ची की मृत्यु हुई है।

गुर्दा खराब होने की वजह से शरीर सूजन
बच्ची के परिजनों ने बताया कि 10 अक्टूबर को डेंगू की पुष्टि होने के बाद निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था लेकिन फ़ायद नहीं होने की वजह से एनएमसीएच में भर्ती कराया गया। वहीं डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची का गुर्दा खराब होने की वजह से शरीर सूजन आ गया था, शुरूआत में सही इलाज नहीं मिला जिसकी वजह से वह रिकवर नहीं हो पाई। शनिवार को नालंदा निवासी 5 साल के बच्चे डेगू की चपेट में आने से मौत हुई थी। 10 अक्टूबर को बिहटा निवासी 10 वर्षीय युवक अस्पताल में डेंगू से जिंदगी की जंग हार गया था।

24 घंटे में पटना में 265 मरीज़
बिहार के विभिन्न ज़िलों में 24 घंटे के अंदर डेंगू मरीज़ के आंकड़ों की बात की जाए तो पूरे प्रदेश से 305 नए मामले सामने आए हैं। जिसमें पटना में 265, सीवान में 10, जहानाबाद में 10, मुजफ्फरपुर में 5, गया में 3, समस्तीपुर में 2 मरीज़ मिले हैं। इसके अलावा बेगूसराय, नालंदा, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, नवादा, शेखपुरा, सारण, शिवहर, पश्चिम चंपारण और वैशाली एक-एक मामले सामने आए हैं। पूरे प्रदेश में अब तक डेगू का आंकड़ा 5 हज़ार को पार कर चुका है। प्रदेश में अभी कुल 5 हज़ार, 263 डेंगू का मामले हैं। पटना के सरकारी जांच केंद्रों में डेंगू जांच में 70 फिसद से ज्यादा लोग संक्रमित ही पाये जा रहे हैं।

‘सरकारी आदेशों के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति’
संजय कुमार सिंह (कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति) ने डेंगू प्रकोप को देखते हुए एंटी लार्वा स्प्रे और फागिंग का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिये हैं। वही जिन जिलों से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, वहां खास तौर पर ध्यान देने के लिए भी कहा है। इसके साथ ही अस्पतालों में मरीज़ों के उचित व्यवस्था और रेगुलर मॉनिटरिंग करने की भी हिदायत दी गई है। सरकार के तरफ़ से निर्देश तो जारी किए गए हैं, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कुछ और ही है। प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में जब फॉगिंग और एंटी लार्वा स्प्रे के बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी ली गई तो उन्होंने सीधे तौर पर यही कहा कि सरकारी आदेशों के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। स्प्रे होना औऱ ना होना दोनो बराबर है।

डेंगू बुखार के लक्षण और बचाव
डेंगू बुखार के लक्षण और बचाव के बारे में भी जानना ज़रूरी है। डेंगू के कुछ खतरनाक वेरिएंट की वजह से लोगों की मुश्किले बढ़ं गई हैं। डेंगू के डीईएनवी-2 वेरिएंट के गंभीर लक्षण देखने को मिलते हैं। डेंगू बुखार (डेंगू हेमरैजिक फीवर और डेंगू शॉक सिंड्रोम) से जुड़ी कुछ ऐसी समस्याएं काफी जानलेवा साबित हो सकती हैं। संक्रमित मच्छर एडीज एजिप्टी के काटने से डेंगू बुखार होता है। इसके डीईएनवी-1, डीईएनवी-2,डीईएनवी-3 और डीईएनवी-4। मच्छर को दूर भगाने के तमाम उपाय पर अमल करना ही इस रोग से बचने का उपाय है। सामान्य तौर संक्रमित मच्छर के काटने के 4 से 7 दिनों बाद पर बुखार के लक्षण देखने को मिलते है। कई मामलों में इसके लक्षण बहुत ही हल्के हो सकते हैं। लेकिन, कुछ मामले बहुत ही खतरनाक साबित हो सकते है।

डेंगू के कुछ मरीजों में नहीं दिखता कोई लक्षण
डेंगू के कुछ मरीजों में किसी भी तरह का कोई लक्षण नहीं दिख सकता है। डेंगू के मरीजों का बुखार अचानक 104 से 106 डिग्री फारेनहाइट तक भी जा सकता है। ज्यादातर लोग हफ्ते भर में ठीक हो जाते हैं। लेकिन, कुछ मामलों में लक्षण बिगड़ने से इंसान की मौत भी हो जाती है। गंभीर डेंगू, डेंगू हेमरैजिक फीवर या डेंगू शॉक सिंड्रोम कहा जाता है। कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर अचानक गिर जाता है, जिससे कुछ मामलों में मृत्यु तक हो सकती है। डेगू से बचने के लिए घर में कहीं भी पानी को जमा होने नहीं दें, पानी में डेंगू बहित तेज़ी से फैलता है। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें या नहीं तो मच्छर भगाने वाली बत्ती जलाएं या फिर मॉस्क्वीटो क्रीम का इस्तेमाल करें, क्योंकि इसका कोई वैक्सीन नहीं बना है, सिर्फ बचाव करना ही उपाय है।
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