Bihar News: एक्सपर्ट ने बताया क्यों करानी पड़ी Emergency Crash Landing, क्यों पैदा होते हैं ऐसे हालात?
Vayu Sena Helicopter Muzaffarpur News: बिहार के मुजफ्फरपुर ज़िले में भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर की इमरजेंसी क्रैश लैंडिंग पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। अटकलों का बाज़ार गर्म हो चुका है। लोगों के बीच हो रही चर्चाओं की तह तक जाने के लिए वन इंडिया हिंदी ने वायु सेना के अधिकारी मो. हुदा से बात की।
वायु सेना के अधिकारी ने बताया कि क्या कुछ परेशानी आती है, ऐसे हालात क्यों पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग कह रहे हैं कि हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ है, यह क्रैश नहीं हुआ, इसे इमरजेंसी क्रैश लैंडिंग कराई गई है। पायलट के सूझ बूझ से लैंडिंग करवाई गई जिले इमरजेंसी क्रैश लैंडिंग कहते हैं।

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इमरजेंसी क्रैस लैंडिंग या फिर हार्ड लैंडिंग करवाई गई, सारे जान और माल को बचाते हुए। यह ALH एयरक्राफ्ट है, जो HAL द्वारा जर्मन के साथ कोलाबेरेशन में बनाया गया है। पोखरान 2 इंजन को मिलना था, जो कि नहीं मिल पाया न्यूक्लियर टेस्ट के बाद बैन लगने की वजह से, इसलिए कोई दूसरा इंजन इस्तेमाल किया गया।
जो इंजन लगा हुआ है, इसमें पहले भी पॉवर नहीं मिलने की कई शिकायत मिल चुकी है। इस हेलिकाप्टर की पूरी सर्विस होगी तो वापिस से उड़ सकता है। कोई भी मिशन पर जाने से पहले संबंधित एयरक्राफ्ट की चांज की जाती है, कि किसी प्रकार की ख़राबी नहीं है। इसके बाद ही उड़ान भरा जाता है।
हवा में ही हेलिकॉप्टर था, इंजन में ख़राबी आई और पॉवर नहीं मिल पा रहा था। पायलट की यह सूझबूझ थी, कि उन्होंने आपात स्थिति को सही से हैंडल किया और बिना किसी जान माल के नुकसान के हार्ड लैंडिंग करवाई। एक हेलिकॉप्टर से ज़्यादा कीमती एक पॉयलट होता है, क्योंकि इस तरह की आपात स्थिति को हैंडल कर सके, जान माल का नुकसान नहीं हो।
नैचरल डिज़ज्सटर में एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर हमेशा से सेवा देते रहे हैं। जिस तरह की ज़रूरत होती है, उस हिसाब से अलग-अलग मॉडल के हेलिकॉप्टर को भेजा जाता है। इंडियन एयरफॉर्स के पास कई तरह के हेलिकॉप्टर हैं, 2 टन वजन, 10 टन वज़न , 50 टन वज़न ढोने वाले भी हेलिकॉप्टर हैं।
उदाहरण के तौर पर कहीं 2 टन माल गिराना है तो वहां 2 टन ढोने वाला हेलिकॉप्टर भेजा जाता है। जरूरत के हिसाब से हेलिकॉप्टर इस्तेमाल किया जाता है। अपाचे हेलिकॉप्टर भी है, दो पंखे वाला भी हेलिकॉप्टर है। हम लोगों के पास मुख्य रसियन मेड ही है। एक इटली से लिया गया है, एक चिनूक है जिसके दो विंग हैं।
एवियेशन इंडस्ट्री में सौ फीसद चांज के बाद ही उड़ान भरा जाता है। हार्ड लैंडिंग उस वक्त की जाती है, जब अचानक से टेक्निकल एरर हो जाता है और जान माल को बिना किसी नुकसान के बचाना होता है। इंजन को जितना थ्रस्ट मिलना चाहिए वह नहीं मिल रहा है, पायलट थ्रोटन दे रहा उसे थ्रस्ट मिल ही नहीं रहा है।
अचानक ऐसे हालात बने इसलिए एमरजेंसी क्रैश लैंडिंग हुई होगी, बाकि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पात चल पाएगा। अभी तो पायलट ने बहुत सूझ बूझ से काम किया, उसने ऑन बोर्ड 2 शख्स को भी बचाया और जान माल नुकसान से भी बचाया। इसे क्रैश नहीं इमरजेंसी क्रैश लैंडिंग या फिर हार्ड लैंडिग भी कह सकते हैं।












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