SDM Jyoti Maurya News: बिहार के पूर्व IPS अमिताभ दास ने फ़ैसले को ठहराया सही, कहा- ये ‘प्रेम त्रिकोण’ है
SDM Jyoti Maurya News: पूर्व आईपीएस अमिताभ कुमार दास ने कहा कि प्रेम त्रिकोण के जो तीनों किरदार हैं, वह व्यस्क हैं। अलोक मौर्य, ज्योंति मौर्य और मनीष दुबे यह तीनों बालिग़ हैं। इसका मतलब है कि इन तीनों को अपनी मर्ज़ी से शादी करने और तलाक लेने का कानूनी तौर पर अधिकार है।
अमिताभ कुमार दास ने कहा कि कि पहले ज्योति मौर्य की शादी आलोक मौर्य से हुई। आज की तारीख में वह किसी वजह से आलोक मौर्य के साथ नहीं रहना चाहती है, तो उसे तालाक लेने का पूरी तरह से कानूनी अधिकार है। शादी कोई बंधुआ मज़दूरी नहीं है कि रोते-धोते पूरी ज़िंदगी निभाइए।

हमारे समाज में पुराने खयालों के लोग हैं जो पहले की तरह जहां डोली गई है, वहीं से अर्थी निकलेगी टाइप सोच रखते हैं। वह पुराना ज़माना था जब लोग नाखुश होते हुए भी शादी को निभाते थे।पुराने ज़माने में प्रताड़ित करने (शराबी, जुआरी) वाला पति परमेश्वर था।
अब 21वीं सदी है, लड़कियां पढ़ लिख रही हैं, आत्मनिर्भर बन रही हैं। कानून में भी लड़कियों को बहुत सारे हक दिए गए हैं। इसलिए ज्योति मौर्य अगर तलाक लेना चाहती हैं तो, यह उनका व्य्कतिगत मामला है। मनीष दुबे भी अगर कल को अपनी पत्नी से तालाक ले लेता है, तो यह भी उसका व्यक्तिगत मामला है।
ज्योति मौर्य मामले में किसी भी इंसान को ज्यादे टांग अड़ाने की ज़रूरत नहीं है। हम लोगों का समाज पुरुष प्रधान समाज है, आम आदमी की सोच महिला विरोधी होती है। अमिताभ दास ने कहा कि मैनें पढ़े लिखे लोगों को देखा है कि घर में बेटा पैदा होने पर जश्न मनाते हैं और बेटी के पैदा होने पर मायूस हो जाते हैं। हमार पूरा समाज ही महिला विरोधी है।
ज्योति मौर्य का उदाहरण देने का लोगों को बहाना मिल गया है, इसी बहाने से वह अपनी पत्नियों को पढ़ाने से पीछे हट रहे हैं। अमिताभ दास ने कहा कि एक मिनट के लिए मान भी लें कि ज्योति मौर्य ने ग़लती की है, तो क्या दुनिया की सारी महिलाएं ग़लत हैं। एक की ग़लती की वजह से सारी महिलाओं को पढ़ाई से पीछे करना सरासर ग़लत है।
अमिताभ कुमार दास ने कहा कि ज्योति मौर्य मामले में तीनों किरदार बालिग हैं, उन्हें अपने अच्छे बुरे का फ़ैसला लेने का खुद अधिकारी है। हम और आप उसके मामले में टांग अड़ाने वाले कौन होते हैं? उन्होंने कहा कि आज खबर वायरल हुई तो दुनिया को मामले की जानकारी हुई।
क्या पता ज्योति जब एसडीएम नहीं बनी थी, उस वक्त से ही इस रिश्ते में घुटन महसूस कर रही हो। उस वक्त उसकी परेशानी जानने वाला कोई नहीं था। उस वक्त वह आत्मनिर्भर नहीं थी, हो सकता है मां-बाप के दवाब में आलोक मौर्य से शादी रचाई हो।
हमारे समाज में ऐसा भी होता है कि लड़की को रिश्ता पसंद नहीं होता है, मां-बाप जबरन दवाब बनाकर शादी कर देते हैं। हो सकता है ज्योति मौर्य शुरू से ही इस शादी को नापसंद कर रही हो। आज वह अधिकारी बन गई है, आत्मनिर्भर बनकर इस रिश्ते से निकलना चाह रही है। तो इसमें ग़लत क्या है?












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