राजधानी पटना के बाद अब शिवहर में सामने आया चौंकाने वाला करोड़ों का शौचालय घोटाला
कागजों पर ही शौचालय निर्माण को दिखाते हुए सरकारी खजाने से 40,000 शौचालय के निर्माण का पैसा निकाल लिया गया जबकि शिवहर के अभिराजपुर बैरिया पंचायत में शौचालय का निर्माण हुआ ही नहीं और तो और वहां रहने वाले परिवारों की कुल संख्या 2771 है
पटना। हाल फिलहाल बिहार में उजागर हुआ शौचालय घोटाले का मामला अभी राजधानी पटना में जहां चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष से लेकर राज्य की जनता तक सभी शौचालय घोटाले को लेकर सरकार से तरह तरह के सवाल पूछ रहे हैं। वहीं सरकार और उनके अधिकारी मामले की जांच करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की बात बता रहे हैं तो दूसरी तरफ ऐसा ही एक और मामला बिहार के शिवहर जिले में सामने आया है। जहां करोड़ों रुपए का शौचालय घोटाला किया गया है। कागजों पर ही शौचालय निर्माण को दिखाते हुए सरकारी खजाने से 40,000 शौचालय के निर्माण का पैसा निकाल लिया गया जबकि शिवहर के अभिराजपुर बैरिया पंचायत में शौचालय का निर्माण हुआ ही नहीं और तो और वहां रहने वाले परिवारों की कुल संख्या 2771 है। यहां तक कि एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम पर शौचालय निर्माण का आंकड़ा दिखाया गया था।

फर्जी शौचालय निर्माण दिखाकर किया घोटाला
जानकारी के मुताबिक मामला बिहार के शिवहर जिले का है जहां के अभिराजपुर बैरिया पंचायत में बिना बनाए लगभग 4,000 हजार शौचालयों के निर्माण का पैसा सरकारी खजाने से उठा लिया गया। जबकि अभिराजपुर बैरिया पंचायत में परिवार वालों की संख्या 2771 है लेकिन वहां 3929 शौचालय का निर्माण दिखाकर खर्चा उठा लिया गया। सरकारी खजाने से निकाली गई कुल राशी लगभग 3 करोड़ 67 लाख रुपए होती है जिसे सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से हेराफेरी कर लिया गया है। वहीं मामले का खुलासा होने के बाद जब जांच पड़ताल शुरू की गई तो इस गड़बड़ी में कई और तथ्य सामने आए। जिसमें कई सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत की बात बताई गई।

चौकाने वाले नाम आए सामने
इस घोटाले की जब जांच शुरू हुई तो इसमें कई ऐसे चौकाने वाले मामले सामने आए। जिसे देखने के बाद सभी चौकन्ना रह गए क्योंकि एक ही परिवार के रहने वाले कई लोगों के नाम से शौचालय निर्माण कागजों पर ही पैसे की निकासी कर ली गई थी। तो पीएचइडी विभाग के तरफ से दिया गया, शौचालय निर्माण का आकड़ा को देखते हुए राशि लाभुक के खाते में डाल दी गई थी।

पंचायत ने शुरू किया है आंदोलन
इस जांच में कई नाम ऐसे भी सामने आए हैं जो सही नहीं हैं। वहीं कई ऐसे नाम देखने को मिले जिनमें गाली सूचक शब्द का प्रयोग किया गया है। इस मामले को लेकर पंचायत के मुखिया ने एक आंदोलन भी किया और इस आंदोलन से परेशान होकर जिला अधिकारी ने 9 सितंबर को सभी के खिलाफ एक FIR दर्ज करवाई लेकिन अब तक किसी के ऊपर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है।












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