Bihar News: ‘अब सरकार की नहीं ‘बेगूसराय DM’ की गलती है’, विकास कार्य के सवाल पर क्या बोली पब्लिक
Begusarai News: बिहार के विभिन्न प्रदेशों में ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा चलाए जा रहे योजनाओं से विकास कार्य का काम करवाया जा रहा है। ग्राउंड पर पब्लिक को क्या मिल रहा है, जनता कितना खुश कितना नाराज़ है। ज़मीनी हक़ीक़त जानने वन इंडिया हिंदी की टीम प्रदेश के विभिन्न ज़िले पहुंची।
गया और जहानाबाद जैसे ज़िलों में जिला पदाधिकारी की पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता को मिल रहा है, लेकिन प्रदेश के हर एक ज़िले का हाल ऐसा नहीं है। इसका जीता जागता उदाहरण बेगूसराय जिला के ग्रामीण क्षेत्र हैं। ग्रामीण इलाकों के स्कूल के हालात बद से बदतर हैं।

इस पर वन इंडिया हिंदी ने कई प्रमुखता से ख़बर दिखाई थी, बेगूसराय के शिक्षा पदाधिकारी से लेकर ज़िला अधिकारी तक को कॉल कर मामले से अवगत करवाने की कोशिश की गई, लेकिन आप तो जानते ही हैं, सरकारी नंबर सिर्फ़ दिखावे के लिए है, उस पर कॉल करने पर शायद ही रिसीव होता है।
बेगूसराय के जिला शिक्षा अधिकारी और जिला पदाधिकारी रोशन कुशवाहा को उनके सरकारी व्हाटसएप्प नंबर पर ख़बर भेज कर अपनी बात रखी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। वहीं ग्राउंड रिपोर्ट करने के दौरान ग्रामीणों ने विकास कार्यों पर भी बेबाकी से अपनी बात रखी।
ग्रामीणों ने कहा कि पहले तो सरकार की ग़लती समझते थे, लेकिन अब सरकार की गलती नहीं बेगूसराय डीएम रोशन कुशवाहा की ग़लती है। जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों तो,उन्होंने कहा कि गांव के मुखिया से पूछते हैं कि स्ट्रीट लाइट कब लगेगा, नाला निर्माण कब होगा, तो उनका एक लाइन में जवाब होता है आदेश मिलने पर।
जब गांव के मुखिया से सवाल किया जाता है कि आदेश मिलने पर का क्या मतलब होता है। इस पर वह कहते हैं कि योजना की राशि आई हुई है, लेकिन ज़िला के मालिक डीएम की तरफ़ से वर्क ऑर्डर ही नहीं आया है तो काम कैसे करें? स्ट्रीट लाइट लगवाने के लिए वेंडर वहीं लोग तय करते हैं, हम लोगों को सिर्फ नाम मात्र के लिए हैं। सरकार की तरफ़ से राशि आई हुई है, लेकिन वर्क ऑर्डर नहीं मिला है।
ग्रामीणों ने कहा कि पहले तो हम लोग सोचते थे कि स्थानीय प्रतिनिधि (मुखिया, पंचायत समिति आदि) विकास कार्य नहीं होने के ज़िम्मेदार होते हैं, लेकिन अब पता चल रहा है कि इसमें ज़िला पदाधिकारी की भी अहम भूमिका होती है। प्रदेश के दूसरे ज़िले की ख़बर पढ़ने पर पता चलता है कि वहां के डीएम कितने एक्टिव हैं। जहां जिला पदाधिकारी एक्टिव होते हैं, वहां होता है काम, बेगूसराय के डीएम विकास कार्यों पर नहीं देते हैं ध्यान।












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