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IAS Story: मेरे परिवार में भी ब्यूरोक्रेसी में कोई नहीं था, DM जहानाबाद के संघर्ष की कहानी, उन्हीं की जुबानी

IAS Alankrita Success Story: UPSC परीक्षा देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक होता है। ज़्यादातर लोग परीक्षा में बैठने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं। वहीं जितने लोग UPSC परीक्षा देते हैं, उनमे में बहुत कम ही IAS अधिकारी बन पाते हैं। आज हम आपको एक ऐसी IAS अधिकारी से मिलवाने जा रहे हैं, जिन्होंने काफी मशक्कत से इस मुकाम को हासिल किया है।

हम बात कर रहे हैं, जहानाबाद डीएम अलंककृता पांडेय कि जिन्होंने इंजीनियर होते हुए भी UPSC परीक्षा देने का मन बनाया और पहले ही अटेम्प्ट में कामयाबी हासिल की। वन इंडिया हिंदी से ख़ास बातचीत में उन्होंने बताया कि उनकी क्या सोच हैं और क्यों UPSC की तरफ़ रुख किया?

There was no one in bureaucracy in my family Motivational story of DM Jehanabad Alankrita Pandey

अलंकृता पांडेय ने बताया कि शुरू से ही उन्हें समाज सेवा करने का शौक है। वह बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम कर रही थी। जब वह पढ़ाई कर रही थी, इस दौरान भी गरीब बच्चों को पढाया करती थी। डेढ़ साल जॉब करते हुए गुज़र गए थे, लेकिन वह इससे काफी संतुष्ट नहीं थी।

अलंकृता पांडेय को लगा कि वह कॉरपोरेट कल्चर की वजह से समाजिक कामों में बहुत ज्यादा वक्त नहीं दे पाएंगी। इसलिए फ़ैसला किया कि प्रशासनिक सेवा की तरफ़ रुख करूं, ताकि समाजिक हितों के लिए अच्छे से अच्छा काम कर सकूं। कुछ हालात ऐसे हो गए थे, जिससे वह डिप्रेस्ड हो गईं थी।

वक्त के साथ हालात बदलते हुए UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू की और पहली कोशिश में ही कामयाबी मिल गई। उन्होंने कहा कि मैंने खुद भी नहीं सोचा था कि पहली कोशिश में कामयाबी मिल जाएगी, लेकिन यह ज़रूर तय कर लिया था कि सिर्फ दो अटेम्प्ट ही दूंगी। कामयाबी नहीं मिली तो फिर कुछ और करूंगी।

अलंकृता पांडेय ने जब यह सवाल किया गया कि वैसे बच्चे जो यह सोच लेते हैं कि यूपीएससी परीक्षा काफी मुश्किल होता है, कैसे कामयाबी मिलेगी। कुछ बच्चे तो परीक्षा में बैठने तक की नहीं सोचते हैं। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मेरे परिवार में भी दूर दूर तक ब्यूरोक्रेसी में कोई नहीं था।

मैं भी सोचती थी कि डीएम राजा की तरह हैं। इंसान के अंदर लगन और जज़्बा हो तो वह किसी भी चुनौती को मात देते हुए कामयाब हो सकता है। वैसे बच्चों को मैं यही संदेश देना चाहूंगी कि आप खुद पर भरोसा रखें और दिल लगाकर मेहनत करें कामयाबी ज़रूर मिलेगी। परीक्षा मुश्किल तब लगता है, जब आपने तैयारी नहीं की हो। आपने तैयारी की तो किसी भी परीक्षा में पास हो सकते हैं।

डीएम जहानाबाद अलंकृता पांडेय से जब यह सवाल किया गया कि आम लोगों को यह लगता है कि जिलाधिकारी तक बात नहीं पहुचा सकते हैं। बात सिर्फ बड़े लोगों की सुनी जाती है। इस पर उन्होंने ने कहा कि ऐसी बात नहीं है, लोगों को जागरुकता की ज़रूरत है।

हर शुक्रवार को जहानाबद में जनता दरबार इसलिए ही लगाया जाता है, ताकि जिले के लोग अपनी समस्या लेकर जिलाधिकारी से मिल सके। जनता दरबार में मिलने वाली शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए तुरंत प्रभाव से उसके निदान की कोशिश की जाती है। किसी भी व्यवस्था को सिर्फ जिले का डीएम नहीं बदल सकता, जनता के सहयोग से ही बदलाव होता है।

जिले में किसी प्रकार समस्या या फिर विकास कार्यों में कमी को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि (विधायक, सांसद इत्यादि) को जिम्मेदार ठहराते हुए पल्ला झाड़ लिया जाता है। इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि कोई एक ज़िम्मेदार होता है। अच्छे काम का श्रेय जिस तरह सभी लेना चाहते हैं, वैसे ही कमियों की जवाबदेही भी सभी की होती है।

जिले में सरकार योजनाओं से लेकर विभागीय अनियमितता और राज्य से लेकर केंद्र सरकार की योजनाओं तक में जिलाधिकारी संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करते हैं। हम लोग जिले की समस्याओं और योजनाओं को लेकर समीक्षा बैठक करते हैं। सिर्फ़ डीएम के चाहने से सुधार मुमकिन नहीं है, जनता को भी जागरुक होने की ज़रूरत है।

मैं एक जिलाधिकारी होने के नाते लोगों से यही अपील करना चाहूंगी कि जिला प्रशासन के साथ क़दम से क़दम मिलाकर चलें। समाज में जागरुकता लाने की ज़रूरत है, जहां पर कोई कमी दिखे सूचना दें। कहीं लापरवाही दिख रही है तो जिम्मेदार नागरिक होने के नाते उसे सुधारने की कोशिश करें।

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