Bihar: 'बीजेपी के साथ हो चुका है समझौता': चाचा के दावों के बाद चिराग पासवान का बड़ा बयान

बिहार के जमुई से सांसद और लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता चिराग पासवान ने रविवार को दावा किया है कि उनकी पार्टी न सिर्फ एनडीए का हिस्सा है, बल्कि 2024 के लोकसभा और 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर उसके साथ फॉर्मूला तय हो चुका है।

चिराग पासवान का यह बयान उनके चाचा और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस के उस दावे के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके भतीजे की पार्टी अभी भी तकनीकी रूप से एनडीए का हिस्सा नहीं है।

chirag paswan on alliance with bjp

हाजीपुर सीट को लेकर चाचा-भतीजे में ठनी है
गौरतलब है कि बीते मंगलवार को दिल्ली में हुई एनडीए की बैठक में चिराग पासवान ने अपने चाचा और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के नेता पारस का पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया था। बता दें कि बीजेपी की ओर से दोनों चाचा-भतीजों को फिर से एकसाथ लाने की कोशिशें को लेकर अटकलों की खबरें गर्म हैं। लेकिन अभी तक दोनों के बीच हाजीपुर सीट से चुनाव लड़ने को लेकर विवाद खत्म नहीं हो रहा है।

2024 और 2025 के चुनावों को लेकर फॉर्मूला तय- चिराग
रविवार को चिराग ने पटना में इस बात की ओर इशारा किया है कि एनडीए से अलग होने के बाद भी उनकी पार्टी किसी गठबंधन के साथ नहीं जुड़ी थी। उन्होंने कहा, 'बीजेपी हमारी पार्टी के साथ लगातार संपर्क में थी। नित्यानंद राय (केंद्रीय गृह राज्यमंत्री) हमसे कई बार मिले, जिसमें उन्होंने हमारी चिंताओं का सम्मान किया। इसके बाद मैं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिला। उन्होंने न केवल हमारी चिंताओं का सम्मान किया, बल्कि 2024 और 2025 के चुनावों में हमारे गठबंधन को लेकर हमने एक रूपरेखा भी तैयार की।'

2024 में बिहार में एनडीए के सभी सीटों पर जीत का दावा
इस मौके पर चिराग पासवान ने दावा किया कि बिहार में लोगों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर गुस्सा है। उन्होंने कहा कि 2024 में बिहार में एनडीए का आंकड़ा 2019 के आम चुनावों के 40 में 39 से भी आगे बढ़ जाएगा।

चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस में हाजीपुर से चुनाव लड़ने को लेकर ठनी हुई है। यह सीट चिराग के पिता रामविलास पासवान की परंपरागत सीट थी। लेकिन, पिछली बार वहां से उन्होंने अपने भाई पारस को टिकट देकर सांसद बनवाया था। जबकि, उनके बेटे चिराग बिहार की ही जमुई सीट से चुनाव जीते थे। तब तत्कालीन केंद्रीय मंत्री रामविलास खुद राज्यसभा के सांसद थे। लेकिन, अबकी बार चिराग हाजीपुर सीट पर दावा ठोक रहे हैं। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक वहां से वे अपनी मां को चुनाव लड़वाना चाहते हैं। लेकिन, पारस इसके लिए हरगिज तैयार नहीं हो रहे हैं।

'नित्यानंद राय के कहने से क्या होगा?'
जानकारी के मुताबिक यही वजह है कि बीजेपी चाचा-भतीजे में सुलह के लिए खूब पसीना बहा रही है। हाल ही में जब नित्यानंद राय के दौरे के बाद पारस से दोनों पारिवारिक पार्टियों के विलय की संभावनाओं को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने तल्खी से जवाब दिया था। उन्होंने कहा था, 'नित्यानंद राय के कहने से क्या होगा? नित्यानंद रायजी बीजेपी के ऑथेंटिक मेंबर नहीं ना हैं।'

अब उन्हें ही तय करना है-चिराग पासवान
वैसे अपने चाचा से सुलह को लेकर चिराग पासवान ने एनडीटीवी की ओर से पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, 'हमारे परिवार में हमेशा बड़ों ने फैसले लिए हैं। यह सिर्फ राजनीतिक मसला नहीं है, बल्कि परिवार का भी मुद्दा है। मेरे पिता के निधन के बाद अलग होने का निर्णय मेरे चाचा का था और अब उन्हें ही तय करना है कि क्या परिवार एकजुट होगा। मैं समझता हूं कि उन्होंने पहले ही फैसला कर लिया है।'

'टूटे हुए दिल नहीं जोड़ा जा सकता'
हालांकि, एनडीए की बैठक में कैमरे के सामने पैर छूने और गले लगाने की घटना के बाद सुलह की अटकलों को पारस पहले ही सिरे से खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा था, 'चिराग ने मेरे पैर छूए, इसलिए मैंने उन्हें आशीर्वाद दिया। लेकिन, मैं पहले ही कह चुका हूं, गठबंधन टूट सकता है और जुड़ सकता है, लेकिन टूटे हुए दिल को फिर से नहीं जोड़ा जा सकता है।'

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