अगर रेलवे टेंडर घोटला में तेजस्वी के खिलाफ कार्रवाई होती है तो फिर वे कैसे रहेंगे ‘सीएम इन वेटिंग’ ?

पटना, 22 मई: राजद का आरोप है कि नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की बढ़ती नजदीकियों से भाजपा घबरा गयी थी। इसलिए उसने लालू परिवार के खिलाफ सीबीआइ का छापा डलवाया। तो क्या राजद और जदयू के बीच इतनी नजदीकी बढ़ गयी थी कि एनडीए सरकार की विदाई होने वाली थी? अगर खुदा न खास्ते राजद-जदयू की सरकार बन जाती तो मुख्यमंत्री कौन होता? क्या तेजस्वी नीतीश कुमार के नाम पर फिर राजी होते? अगर इस बीच तेजस्वी पर रेलवे टेंडर घोटला मामले में कोई बड़ी कार्रवाई हो जाती है तो क्या नीतीश कुमार राजद के साथ जाने की स्थिति में रह जाएंगे? अभी तो सीबीआइ ने रेलवे भर्ती घोटला मामले में छापा मारा है। चर्चा है कि सीबीआइ को इस छापेमारी में एक सीडी और महत्वपूर्ण कागजात मिले हैं जो अहम सबूत साबित हो सकते हैं। रेलवे टेंडर घोटला में भी जमीन लेने का आरोप है। अगर जांच की आंच तेजस्वी यादव तक पहुंचती है तो उनकी राजनीतिक संभावनाओं का क्या होगा? क्या वे सीएम इन वेटिंग रह पाएंगे?

तब फिर जदयू कैसे नजदीक आएगा राजद के?

तब फिर जदयू कैसे नजदीक आएगा राजद के?

रेलवे टेंडर घोटला केस में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 16 लोग आरोपी है। इस मामले में सीबीआइ और ईडी, दोनों की जांच जारी है। सीबीआइ ने 2018 में ही तेजस्वी समेत 14 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। ईडी केस में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव जमानत पर बाहर हैं। अप्रैल 2022 में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में रेलवे टेंडर घोटला की सुनवाई होनी थी। इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को पेश होना था। लेकिन वे पेशी के लिए नहीं आये। इन्होंने वकील के जरिये कोर्ट से पेशी में छूट की दरख्वास्त की थी जो कि मंजूर हो गयी थी। अब इस मामले की सुनवाई 13 जुलाई को होगी। राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई की तारीख इस बढ़ा दी क्यों कि जुलाई में ही सुप्रीम कोर्ट रेलवे टेंडर घोटला केस की सुनवाई करने वाला है। रेलवे टेंडर घोटला में भी टेंडर के बदले जमीन लेने का आरोप है। आरोप है कि जब लालू यादव रेल मंत्री थे तब उन्होंने रेलवे के दो होटलों का टेंडर कोचर बंधुओं को दिया था। बदले में लालू परिवार को एक बेनामी कंपनी के मार्फत पटना में तीन एकड़ जमीन मिली थी।

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    Land For Railway Job Scam | Lalu Yadav | Rabri Devi | CBI Action | RJD Protest | वनइंडिया हिंदी
    कानून की हनक से कौन नहीं डरता?

    कानून की हनक से कौन नहीं डरता?

    शुक्रवार को जब लालू परिवार के 17 ठिकानों पर सीबीआइ की छापेमारी हुई तब राजद ने बलपूर्वक इसका विरोध किया था। सीबीआइ के अफसरों को दौड़ाया गया। उनके साथ धक्का-मुक्की की गयी। उनकी कार पर मुक्के मारे गये। तेजस्वी यादव ने कहा था, "नहीं डरा है नहीं डरेगा लालू इन सरकारों से"। क्या ये सब बातें पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के हक में जाएंगी? ये कार्रवाई कानून के प्रवाधान के मुताबिक की गयी और कानून से कौन नहीं डरता? कानूनी कार्रवाई का राजनीतिक विरोध लालू परिवार के खिलाफ जा सकता है। चारा घोटला के एक मामले में लालू यादव 1998 में जेल गये थे। उन्हें पटना के बेऊर जेल में रखा गया था। जनवरी 1999 में जमानत मिलने के बाद वे जेल से रिहा हुए थे। जब वे जेल से बाहर निकले तो हाथी पर सवार अपने निवास स्थान गये थे। इस दौरान पटना में घूम घूम कर उन्होंने अपनी ताकत दिखायी थी। हाथी पर बैठे उनकी तस्वीर देश और दुनिया में मशहूर हो गयी थी। पिछले साल चारा घोटला के देवघर कोषागार मामले की सुनवाई जस्टिस शिवपाल सिंह की अदालत में चल रही थी। कोर्ट ने लालू यादव को दोषी करार दे दिया था। सजा का एलान बाकी था। तब लालू यादव ने जज से कहा था, हुजूर बेल दे दिया जाए। तब जज महोदय ने कटाक्ष किया था, क्या आपको इसलिए जमानत दे दिया जाय ताकि आप हाथी पर चढ़ कर बाहर निकलें और पूरे शहर में घूमें? इसलिए कहा जाता है कि जब कानून की हनक होती है तो सभी उससे डरते हैं।

    क्या राजद नीतीश की साख पर बट्टा लगा रहा ?

    क्या राजद नीतीश की साख पर बट्टा लगा रहा ?

    ये बात राजद की तरफ से प्रचारित किया जा रहा है कि नीतीश कुमार और तेजस्वी के बीच एक गुपचुप डील हुई थी। डील की वजह जातीय जनगणना थी। ऐसा कह कर राजद क्या नीतीश कुमार की साख पर बट्टा लगा रहा है ? क्या राजद यह साबित करना चाहता है कि नीतीश कुमार सत्ता के लिए एक बार फिर पाला बदलने वाले थे ? यह एक राजनीतिक दुष्प्रचार है या सच्चाई, यह तो साफ नहीं है लेकिन इससे नीतीश कुमार की विश्सनीयता प्रभावित हो रही है। अगर नीतीश कुमार सिद्धांत की राजनीति करते हैं तो उन्हें वाजिब रास्ता अपनाना चाहिए। अगर जातीय जनगणना के मुद्दे पर उनका भाजपा से विरोध है तो उन्हें इस्तीफा कर दे कर नया जानादेश लेना चाहिए। अगर उनकी जीत होती है तो इस मुद्दे पर उन्हें जनता का खुद ब खुद समर्थन मिल जाएगा। लेकिन 2017 की तरह उन्होंने बीच मझधार में एक बार फिर कश्ती बदली तो शायद ही कोई उन पर भरोसा करेगा।

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