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'80% फॉर्म जमा वाला दावा गलत', SIR पर तेजस्वी और कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना

Bihar Voter List Revision 2025: बिहार में चल रही वोटर लिस्ट की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर सियासत गर्म है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे एक 'राजनीतिक साजिश' बताया है।

तेजस्वी यादव ने SIR प्रक्रिया को "सिर्फ दिखावा" (Eyewash) बताते हुए कहा कि, "चुनाव आयोग दावा कर रहा है कि 80% से अधिक लोगों ने फॉर्म जमा किया है, जबकि मेरा खुद का फॉर्म भी नहीं भरा गया है। यह आंकड़ा पूरी तरह झूठा है।" तेजस्वी ने आरोप लगाया कि BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) और आम मतदाता खुद कंफ्यूज हैं।

Bihar Voter List Revision 2025

तेजस्वी यादव बोले- चुनाव आयोग BJP के लिए काम कर रहा है

तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ''चुनाव आयोग BJP की सेल की तरह काम कर रहा है। अगर ये कहा जा रहा है कि वोटर लिस्ट में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के लोग हैं, तो क्या ये सब मोदी को वोट देने आए थे? फिर तो अब तक हुए सारे चुनाव फर्जी थे।''

तेजस्वी यादव बोले,

"ये सूत्र कौन हैं? ये वही सूत्र हैं जिन्होंने कहा था कि इस्लामाबाद, कराची और लाहौर पर कब्जा कर लिया गया है। 'ये सूत्र को हम समझते हैं।' एसआईआर आखिरी बार 2003 में यूपीए सरकार के तहत आयोजित किया गया था। तब से, हमने कई चुनाव देखे हैं, जिनमें 2014, 2019 और 2024 के चुनाव शामिल हैं। उन चुनावों में हम तीन से चार लाख से हार गए। क्या इसका मतलब है कि इन सभी विदेशियों ने पीएम मोदी को वोट दिया? इसका मतलब है कि मतदाता सूची में किसी भी संदिग्ध तत्व के नाम जुड़ने के लिए एनडीए दोषी है। इसका मतलब है कि उन्होंने जो भी चुनाव जीते हैं, वे सभी धोखाधड़ी वाले रहे हैं। एसआईआर पूरी तरह से आंखों में धूल झोंकने वाला है। चुनाव आयोग एक राजनीतिक दल के एक सेल के रूप में काम कर रहा है।"

कपिल सिब्बल का हमला: चुनाव आयोग 'सरकार की कठपुतली'

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने PTI को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पूरी तरह सरकार के अधीन हो गया है। उन्होंने कहा कि SIR एक "असंवैधानिक प्रक्रिया" है और चुनाव आयोग के पास नागरिकता तय करने का अधिकार ही नहीं है।

कपिल सिब्बल ने कहा, ''हर नया चुनाव आयुक्त पिछले वाले से ज्यादा सरकार के अनुरूप काम करता है। गरीबों, दलितों और आदिवासियों के नाम वोटर लिस्ट से काटकर बहुसंख्यक सरकार को हमेशा के लिए सत्ता में बनाए रखना BJP की रणनीति है।'' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सिर्फ उन्हीं सीटों पर अचानक वोटरों की संख्या बढ़ी, जहां BJP ने जीत दर्ज की।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह SIR प्रक्रिया के दौरान आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड को वैध दस्तावेज माने। कोर्ट ने प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति तो दी, लेकिन साफ किया कि यह संवैधानिक प्रावधानों के तहत ही होनी चाहिए।

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। एक तरफ चुनाव आयोग का दावा है कि यह मतदाता सूची को शुद्ध करने की कवायद है, तो दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह सत्ता में रहने की एक सोची-समझी चाल है।

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