Tej Pratap Yadav को अपनी पार्टी खड़ी करने में आएंगी ये बाधाएं, इन 3 चुनौतियां से पाना होगा पार
Tej Pratap Yadav News: लालू यादव ने जबसे अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार से बाहर निकाला है, तब से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर जारी है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव नई पार्टी बना सकते हैं। अगर वो सच में राजद (RJD) से अलग होकर अपनी पार्टी बनाते हैं, तो उन्हें बड़ी राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। पार्टी बनाने के साथ संगठन को मजबूत करना और चुनावी रणनीति बनाने से लेकर जीत दर्ज करने का सफर लंबा और मुश्किल हो सकता है।
तेज प्रताप यादव अब तक लालू यादव की छत्र-छाया में ही राजनीति करते रहे हैं। उनके अपने राजनीतिक कौशल और संगठन चलाने की क्षमता का अब तक टेस्ट नहीं हुआ है। विरासत में मिली राजनीति से बाहर निकलकर अपनी राह बनाना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जानें तेज प्रताप के सामने कौन सी चुनौतियां सबसे बड़ी रहेंगी।

Tej Pratap Yadav के लिए स्वीकार्यता बनाना मुश्किल होगा
तेज प्रताप यादव भले ही लालू प्रसाद यादव के बेटे हैं, लेकिन उनकी खुद की राजनीतिक पकड़ उतनी मजबूत नहीं रही है। उनकी छवि अब तक एक अस्थिर नेता की रही है। कभी शिव भक्त बनते हैं, तो कभी पर्यावरण कार्यकर्ता और कभी खुद को पायलट बताते हैं। आम जनता और विपक्षी दल ही नहीं उनकी पार्टी के अंदर भी नेता और कार्यकर्ता दबी जुबान से मानते रहे हैं कि उनकी छवि गंभीर और समर्पित नेता की नहीं है। ऐसे में नई पार्टी को ज़मीनी स्तर पर स्वीकार्यता दिलाना उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती होगी।
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संगठन और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने का संकट
आरजेडी (RJD) की ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता और जातीय समीकरण है। लालू यादव अपने 4 दशक के लंबे राजनीतिक करियर में MY (मुस्लिम और यादव) समीकरण को हमेशा साथ लेकर चले हैं। लालू यादव के उत्तराधिकारी के तौर पर समर्पित कार्यकर्ता तेजस्वी यादव को स्वीकार कर चुके हैं। अब ऐसे में परिवार और पार्टी से बेदखल किए जाने के बाद तेज प्रताप यादव के लिए अपना संगठन खड़ा करना और समर्पित कैडर बनाना बहुत मुश्किल रहने वाला है। अगर वो नई पार्टी बनाते हैं, तो उन्हें हर जिले में खुद का ढांचा खड़ा करना होगा, जो संसाधन, समय और भरोसे की मांग करता है। बिहार जैसे राज्य में यह आसान नहीं होने वाला।
मतदाताओं को भरोसा दिलाना नहीं रहेगा आसान
अगर तेज प्रताप अलग राह चुनते हैं, तो इससे लालू परिवार में सार्वजनिक रूप से दरार उजागर होगी। मतदाताओं में भ्रम पैदा होगा और RJD का वोट बैंक भी बंट सकता है। हालांकि, बीजेपी (BJP) और NDA को सीधा फायदा मिल सकता है। तेज प्रताप के पास अपना कोई समर्पित वोट बैंक नहीं है और बिहार में एलजेपी (LJPR), जनसुराज से लेकर आम आदमी पार्टी जैसे कई विकल्प हैं। तेज प्रताप यादव अब तक अपना कोई एजेंडा नहीं दे सके हैं और मीडिया में उनकी सुगबुगाहट परिवार से निकाले जाने के बाद लगातार बयानबाजी की वजह से है। मतदाताओं का भरोसा जीतना और वह भी इतने कम समय में बहुत मुश्किल साबित होने वाला है।
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तेज प्रताप यादव अगर सच में नई पार्टी बनाते हैं, तो यह कदम RJD के लिए भी चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन सबसे ज्यादा कठिनाई खुद उन्हें ही होगी। राजनीतिक गंभीरता, संगठनात्मक ताकत और जनविश्वास इन तीनों को साधने में बड़े-बड़े दिग्गजों और पार्टियों को दशकों लग जाते हैं। उनके लिए लड़ाई काफी लंबी रहने वाली है।












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