Teghra Krishnashtami Mela: एशिया के दूसरे सबसे बड़े मेला की कैसे हुई शुरुआत, काफी दिलचस्प है कहानी
Teghra Krishnashtami Mela News: बिहार के बेगूसराय जिला के तेघरा प्रखंड में हर साल कृष्णाष्टमी के मौके पर मेला लगता है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह बिहार का नंबर-1 और एशिया का दूसरे नंबर पर सबसे बड़ा जन्माष्टमी का मेला लगता है।
वन इंडिया हिंदी की टीम मेला की हक़ीक़त जानने ग्राउंड पर पहुंची। तेघरा प्रखंड पहुंचने के बाद मेला से जुड़ी कई रोचक तथ्य सामने आई। मेला कमेटी ने बताया कि कैसे मेला की शुरुआत हुई और क्या इतिहास है। 1927 और 1928 के दशक की बात है, तेघरा में प्लेग नाम की महामारी फैली।

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इस महामारी में आए दिन ग्रामीण 'काल के गाल' में समाने लगे, सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी थी। लोग त्राहिमाम कर रहे थे। यज्ञ अनुष्ठान से भी कोई हल नहीं निकलने पर ग्रामीण दहशत में आ गए, और धीरे-धीरे पलायन करने लगे।
इसी दौरान यात्रा विश्राम के लिए चैतन्य महाप्रभु की कीर्तन मंडली तेघरा पहुंची। ग्रामीणों ने उन्हें अपनी परेशानी बताई, कीर्तन मंडली के सदस्यों ने जन्माष्टमी मनाने की सलाह दी। ग्रामीणों ने बात मानी और एक मंडप के साथ जन्माष्टमी की शुरुआत की।
जन्माष्टमी के मौके पर सबसे पहले 1928 में स्टेशन रोड पर प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की शुरुआत की। ग्रामीणों का मानना है कि उसी के बाद महामारी से निजात मिली। इसके बाद गांव के लोगों ने धूमधाम से श्री कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मेले का आयोजन करने लगे।
पूर्वजों द्वारा उठाए इस क़दम को आज तक गांव के लोग मनाते आ रहे हैं। यह पांच दिनों का मेला बिहार ही नहीं बल्कि देश के दूसरे राज्यों में भी मशहूर है। पड़ोसी मुल्क के नेपाल से भी लोग मेला घूमने आते हैं। मथुरा और वृंदावन की तर्ज पर मेले में पंडाल और मंदिर का निर्माण किया जाता है।

हर साल तेघरा में मेले के दौरान विभिन्न तर्ज़ पर प्रवेश द्वारा का निर्माण होता है, जो कि मेले का केंद्र बिंदू होता है। मेला कमेटी के सदस्यों ने बताया कि 97 साल से वह लोग धूमधाम उत्सव मनाते आ रहे है। आस्था के साथ शुरू हुई मेले की रोचक कहानी अब बेगूसराय जिला के तेघरा प्रखंड की अलग पहचान बन चुकी है।
इस पांच दिन के मेले में करोड़ों का कारोबार होता है। हज़ारों लोग कम से कम 6 महीने की कमाई कर लेते हैं, जिससे उनके परिवार का गुज़ारा होता है। ग्रामीणों की मांग है कि इस मेले को राजकीय मेला घोषित किया जाए ताकि इसे अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिल सके।












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