महाकवि कालिदास के बाद अब काजल इस मंदिर में कर रही है तपस्या
पटना। आज भी छात्र छात्राओं को पढ़ाई से ज्यादा भगवान की तपस्या से फल मिलने की बात हकीकत लगती है। ताजा मामला बिहार के कटिहार जिले में स्थित एक मंदिर में छात्रा की तपस्या का है। जहां कभी इस मंदिर में कालिदास के द्वारा तपस्या किया गया था वहीं अब परीक्षा में बेहतर अंक लाने के लिए काजल पिछले 3 दिनों से भगवान की तपस्या में लीन है। काजल मां सरस्वती को खुश करने के लिए दंडवत होकर बैठी हुई है। इस सरस्वती मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इसी मंदिर में तपस्या कर कालिदास महाकवि बन गए थे और यहां जो कोई भी सच्चे मन से पूजा करता है उसकी मन्नतें हमेशा पूरी होती है।

बता दें कि बिहार और बंगाल के बॉर्डर स्थित बारसोई बेलवा पंचायत में स्थित सरस्वती मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि कालिदास जब अपने ससुराल बंगाल से मालदा जिला स्थित हरिश्चंद्रपुर बारी में पत्नी के द्वारा मूर्खता पर प्रताड़ित हुए थे तो लगभग 10 किलोमीटर दूर जंगल में बने इस मंदिर में आकर मां सरस्वती की तपस्या की थी फिर उज्जैन के लिए रवाना हो गए थे। इसी मंदिर की कृपा से उन्हें महाकवि का दर्जा मिला। यह मंदिर आज का नहीं बल्कि 2000 साल पुराना है क्योंकि इस मंदिर में उस काल के कई मूर्तियां अभी भी स्थापित है।
इस इलाके के स्थानीय लोगों का कहना है कि आधुनिक काल में इस मंदिर की चर्चा धीरे धीरे ख़त्म हो रही थी लेकिन नाइंथ क्लास में पढ़ने वाली काजल के द्वारा जो तपस्या किया जा रहा है उस से एक बार फिर यह मंदिर चर्चे में आ गई है। काजल आजमनगर जलकी की रहने वाली उत्तम राय की बेटी है जो आस्था से जुड़कर पढ़ाई करती थी और अब मां सरस्वती की तपस्या में लीन है। तो इसकी तपस्या को देखने के लिए बिहार सरकार के पूर्व मंत्री इसके पास पहुंचे तथा बिहार सरकार से इस मंदिर को पर्यटक स्थल के रुप में विकसित कराने की मांग भी की।
वही अनुमंडलाधिकारी के द्वारा दिए गए सूचना पर मंदिर में पहुंचकर आस्था से जुड़ी इस लड़की के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था किया गया है। गांव वालों का कहना है कि ज्ञान के लिए मां सरस्वती की तपस्या करने वाली काजल की कोशिश आस्था से जुड़ा विषय है लेकिन इसके सहारे महाकवि कालिदास से जुड़ी हुई इस ऐतिहासिक स्थान को बिहार के पर्यटन स्थल पर स्थान मिल गया तो वाकई बेटी की तपस्या पूरे जिले के लिए चर्चित हो जाएगी।












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