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Surajbhan Singh को फ़ौजी बनाना चाहते थे पिता, लेकिन मुकद्दर में और ही था लिखा

Surajbhan Singh ने गुलजीत सिंह से रंगदारी मांगी, यह वही व्यापारी थे जिनकी दुकान पर सूरजभान सिंह के पिता काम करते थे। गुलजीत सिंह से रंगदारी मांगने वाली बात उन्होंने सूरजभान सिंह के पिता को बताया। उन्होंने सूरजभान सिंह...

Surajbhan Singh : बिहार में बाहुबलियों का ज़िक्र कहीं भी हो उसमें सूरजभान सिंह का नाम ज़रूर आता है। सूरजभान सिंह के जुर्म का कारवां उसी उम्र के साथ बढ़ता चला गया। 5 मार्च 1965 को मोकामा में सूरजभान सिंह का जन्म हुआ था। उसके पिता चाहते थे कि सूरजभान सिंह फौजी बनकर देश की सेवा करे लेकिन मुकद्दर को कुछ और ही मंज़ूर था। मोकामा की गलियों बचपन गुज़ारने वाले सूरजभान सिंह के पिता एक दुकान पर नौकरी करते थे। व्यापारी सरदार गुलजीत सिंह की दुकान पर काम कर उसके पिता परिवार की ज़िम्मेदारियों को पूरा करते थे। इसके बाद सूरजभान सिंह के बड़े भाई को सीआरपीएफ में नौकरी मिली तो परिवार की स्थिति पहले से बेहतर हुई। बड़े बेटे को सीआरपीएफ में नौकरी मिलने के बाद सूरजभान सिंह के पिता ने छोटे बेटे को भी फौज में भेजने का सपना संजोया लेकिन ख्वाब अधूरे रह गए।

जुर्म की दुनिया में सूरजभान सिंह

जुर्म की दुनिया में सूरजभान सिंह

सूरजभान सिंह के किस्मत का सितारा तो जुर्म की दुनिया में चमकने के लिए बेताब था, फिर फौजी बन कर सूरज कहां चमकने वाला था। सूरजभान के मुकद्दर ने उसे पहले बाहुबली बनाया और फिर सियासत में एंट्री हुई। वह विधायक से सांसद बने। शुरुआती दौर में सूरजभान सिंह रंगदारी और वसूली करते थे। आइए सूरजभान सिंह के जुर्म से लेकर सियासी सफर के इतिहास को विस्तार से जानते हैं। 980 के दशक में सूरजभान सिंह छोट अपराध करते थे। 90 का दशक आते ही सूरजभान सिंह का अपराध का ग्राफ तेज़ी से बढ़ने लगा। बताया जाता है कि कांग्रेस के विधायक और मंत्री रह चुके श्याम सुंदर सिंह धीरज और दिलीप सिंह (अनंत सिंह के बड़े भाई) की वजह से सूरजभान सिंह जुर्म की दुनिया के बेताज बादशाह बने।

दिलीप गैंग के सूरजभान सिंह पर पड़ी नज़र

दिलीप गैंग के सूरजभान सिंह पर पड़ी नज़र

बाहुबली दिलीप सिंह कभी श्याम सुंदर सिंह धीरज के लिए बूथ लूटने का काम करते थे। एक वक्त ऐसा आया जब बाहुबली दिलीप सिंह ने श्यम सुंदर सिंह धीरज के खिलाफ ही सियासी चाल चल दी। इतना ही नहीं चुनावी रण में श्याम सुंदर धीरज को हराकर लालू प्रसाद यादव की सरकार में मंत्री भी बने। ग़ौरतलब है कि श्याम सुदर धीरज ने ही दिलीप सिंह को पाला-पोसा था और दिलीप ने ही श्याम सुंदर को चुनावी मात दी। इससे श्याम सुंदर सिंह धीरज पूरी तरह बौखला गए। फिर उनकी नज़र दिलीप गैंग के सूरजभान सिंह पर पड़ी, जिसे जुर्म की दुनिया पर राज करने का भूत सवार था। दिलीप सिंह के मंत्री बन जाने के बाद वह सियासत में व्यस्त हुए इधर सूरजभान सिंह का सूरज उदय हुआ।

सूरजभान सिंह ने गुलजीत सिंह से मांगी रंगदारी

सूरजभान सिंह ने गुलजीत सिंह से मांगी रंगदारी

सूरजभान सिंह ने गुलजीत सिंह से रंगदारी मांगी, यह वही व्यापारी थे जिनकी दुकान पर सूरजभान सिंह के पिता काम करते थे। गुलजीत सिंह से रंगदारी मांगने वाली बात उन्होंने सूरजभान सिंह के पिता को बताया। उन्होंने सूरजभान सिंह को खूब समझाया लेकिन बाहुबली बन चुके सूरज ने पिता की एक नहीं सुनी। ग्रामीण बताते हैं कि इस बात से शर्मिंदा पिता ने गंगा में कूदकर अपनी जान दे दी। वहीं कुछ दिनों के बाद सीआरपीएफ में नौकरी करने वाले सूरज के बड़े भाई ने भी जिंदगी को अलविदा कह दिया।

मोकामा से बाहर भी जुर्म की दुनिया

मोकामा से बाहर भी जुर्म की दुनिया

सूरजभान को दिलीप सिंह का संरक्षण मिला हुआ था, इसलिए उन्होंने मोकामा से बाहर भी जुर्म की दुनिया का विस्तार शुरू किया। धीरे-धीरे सूरजभान सिंह अपराध जगत में पैर जमाते हुए आगे बढ़ते गए दुश्मनों की तादाद भी बढ़ती गई। वहीं कुछ दिनों के बाद किसी वजह से दिलीप सिंह और सूरजभान सिंह के रिश्तों में दरार आ गई। वहीं श्याम सुंदर धीरज की निगाह सूरजभान पर तो थी ही, उन्होंने मौक़े पर चौका मारते हुए सूरजभान सिंह को साथ मिला लिया। सूरजभान सिंह श्याम के साथ गए तो ज़रूर लेकिन उन्होंने अपने लिए कुछ और ही प्लान तैयार कर लिया था।

निर्दलीय चुनाव जीते सूरजभान सिंह

निर्दलीय चुनाव जीते सूरजभान सिंह

श्याम सुदर धीरज ने दिलीप सिंह को संरक्षण दिया था, जिसके बाद दिलीप सिंह ने श्याम सुंदर को ही सियासी मात दी। उसके बाद दिलीप सिंह ने सूरजभान सिंह को संरक्षण दिया फिर सूरजभान सिंह ने दिलीप सिंह को सियासी मात दे दी। सूरजभान सिंह ने साल 2000 के विधानसभा चुनाव में दिलीप सिंह (बिहार सरकार के तत्कालीन मंत्री) के खिलाफ चुनावी बिगुल फूंका और बतौर निर्दलीय उम्मीदवार भारी मतों से जीत दर्ज की। ग़ौरतलब है कि जब सूरजभान ने जीत दर्ज की थी उस वक्त तक उनके ऊपर बिहार और यूपी में कुल 26 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे। 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास पासवान) की टिकट से चुनावी चाल चली। जिसके बाद बलिया (बिहार) के सांसद चुने गए।

सूरजभान सिंह ने बदली अपनी छवि

सूरजभान सिंह ने बदली अपनी छवि

सूरजभान सिंह के ऊपर कई आपराधिक मामले दर्ज हुए, कई मामले तो कानून और पुलिस की पकड़ से ही बाहर रहे। तो कुछ आपराधिका मामलों का काला चिट्ठा कभी खुला ही नहीं। वह दौर था जब लोगो सूरजभान सिंह के नाम से ही कांप जाते थे लेकिन अब सूरजभान सिंह की छवि पहले से बदली है और जनता में उनकी पकड़ काफी मज़बूत है लेकिन सूरजभान सिंह के चुनाव लड़ने पर रोक है। उनकी पत्नी वीणा देवी भी सांसद (मुंगेर) रह चुकी हैं। साल 2018 में उनके बेटे आशुतोष सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

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