बिहार की बेटी के हौसले को सलाम, दो बार क्रैक किया UPSC, पहले बनी IPS और अब बनी IAS

दिव्या कहती हैं कि गांव से लगाव भी एक वजह की मैं कामयाब हो पाई।

पटना, 6 जून 2022। यूपीएससी के नतीजे घोषित होने के बाद कई तरह की कामयाबी की कहानी आप लोग पढ़ और सुन रहे होंगे। आज हम आपको बिहार की एक ऐसी बेटी की कामयाबी की कहानी बताने जा रहे हैं। जिन्होंने यूपीएससी में अपनी मेहनत का डंका बजा दिया है। जी हां हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उन्होंने दो बार यूपीएससी क्रैक किया। पहली बार में वह आईपीएस बनी और बनेंगी आईएएस अफसर। दिव्या कहती हैं कि गांव से लगाव भी एक वजह की मैं कामयाब हो पाई। आईए जानते हैं दिव्या की कामयाबी की कहानी।

बिहार की बेटी के हौसले को सलाम

बिहार की बेटी के हौसले को सलाम

यूपीएससी के नतीजे घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों की कामयाबी की कहानी चर्चा में रहती है लेकिन दिव्या इसलिए भी सुर्खियां बटोर रही हैं क्योंकि उन्होंने दूसरी बार भी यूपीएससी क्रैक कर अपने सपनों को साकार किया है। दरअसल दिव्या को पहली कोशिश में यूपीएससी क्लियर करने के बाद आईपीएस कैडर मिला था। वह हैदराबाद में ट्रेनिंग करते हुए अपनी तैयारी जारी रखी । क्योंकि उनका सपना था कि वह आईएएस अधिकारी बनें। दिव्या ने अपने सपनों की उड़ान भरी और उनकी मेहनत रंग लाई। जब यूपीएससी के नतीजे घोषित हुए तो दिव्या ने ऑल इंडिया में 58वीं रैंक हासिल की। दिव्या को मिली कामयाबी से सभी लोग काफ़ी खुश हैं।

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    पूरे देश में हो रही दिव्या के प्रयासों की सराहना

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    दिव्या की शुरू से ये चाहत थी कि वह आईएएस अधिकारी बनें ताकि आम लोगों की बेहतरी के लिए काम कर सकें। उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का फ़ायदा दिलवा सके। यही वजह थी की उन्होंने आईपीएस की ट्रेनिंग में भी अपनी तैयारी जारी रखी। अपने ख़्वाबों को सच करने के लिए उन्होंने दोबारा से यूपीएससी क्रैक करने की ठान ली और आज उनके हौसले को सभी लोग सलाम कर रहे हैं। दिव्या की कामयाबी के चर्चे पूरे गांव, जिला, राज्य और देश में हो रहे हैं। दिव्या के परिवार की बात की जाए तो उनके पिता बेतिया मेडिकल कॉलेज से रिटायर्ड हैं। अब उनके परिवार का रहना-सहना मुजफ्फरपुर में ही होता है।

    दिव्या शुरू से ही आईएएस अधिकारी बनना चाहती थीं

    दिव्या शुरू से ही आईएएस अधिकारी बनना चाहती थीं

    दिव्या के छात्र जीवन की बात की जाए तो उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई और प्राइवेट सेक्टर में क़रीब दो साल जॉब भी की। लेकिन उनका लक्ष्य तो कुछ और ही था, उन्होंने ठान लिया था कि आईएएस अधिकारी ही बनना है। इसी जुनून के साथ उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन पहली बार में आईपीएस कैडर मिला। आईपीएस की ट्रेनिंग जारी रखते हुए फिर से यूपीएससी की तैयारी की और अपने सपने को सच कर दिखाया। दिव्या का मानना है कि हर बच्चे का कुछ न कुछ लक्ष्य होता है जिसे वह हासिल करना चाहत है। मेरा लक्ष्य आईएएस अधिकारी बनने का लक्ष्य था। मैंने भी आईएएस बनने का ख़्वाब देखा था जिसे साकार करने में मेरे माता-पिता ने बहुत ही साथ दिया। उन्होंने मेरे हौसले को उड़ान दी और आज मुझे एक कामयाब इंसान बनाया।

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