मिसाल: भाई को जिंदगी देने के लिए बहन ने उठाया बड़ा कदम

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में ऐसा पहला मामला देखने को मिला जहां बहन ने अपने भाई को बचाया है। जब मेनका से इस मामले में बातचीत की गई तो उनका कहना था कि भाई की बीमारी हमसे देखी नहीं जा रही थी।

पटना। दुनिया में भाई और बहन के बीच रिश्ते के कई ऐसे उदाहरण दिए जाते हैं जिसे सुनने के बाद इस रिश्ते पर गर्व महसूस होता है। कुछ इसी तरह का मामला राजधानी पटना के अस्पताल में देखने को मिला जहां बहन ने भाई की जिंदगी सकुशल वापस लौटाई। सालों से किडनी की बीमारी से जूझ रहे भाई को उसकी सगी बहन ने अपनी किडनी देकर उसकी जान बचाई। बहन के किए गए इस काम को देखकर अस्पताल में उपस्थित सभी लोग भाई-बहन की प्रेम कहानी का चार्चा करते नजर आए।

मिसाल: भाई को जिंदगी देने के लिए बहन ने उठाया बड़ा कदम

लोगों का कहना था कि आज के जमाने में भाई-बहन के बीच इतना प्रेम हर जगह देखने को नहीं मिलता। अब तो भाई रक्षाबंधन में किए गए वादे का भी ख्याल नहीं किया करते है लेकिन इस भाई-बहन के प्रेम ने रक्षाबंधन की वो सभी कश्में और वादों को पूरा कर दिया जो रश्म के धागे को बांधकर एक दूसरे की लंबी उम्र की कामना करते हुए की जाती है।

भाई-बहन के इस अनोखे प्यार की कहानी पटना के आईजीएमएस हॉस्पिटल में देखने को मिली। जहां बिहार के बेतिया जिले के रहने वाले 22 साल के जयंत राणा को उनकी बहन मेनका देवी ने अपनी किडनी देकर एक नई जिंदगी दी है। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में ऐसा पहला मामला देखने को मिला जहां बहन ने अपने भाई को बचाया है। जब मेनका देवी से इस मामले में बातचीत की गई तो उनका कहना था कि भाई की बीमारी को लेकर घर वाले काफी परेशान थे और हमसे ये परेशानी देखी नहीं जा रही थी। तो बात-बात में भाई ये कहता था कि अब मेरी जिंदगी कुछ ही दिनों की मेहमान है। भाई कि ये बात सुनने के बाद मैंने अपनी किडनी देकर उसे बचाने का फैसला किया।

वहीं जयंत राणा के पिता सुरेंद्र राणा ने बताया कि आज से 1 साल पहले अचानक उसकी तबियत खराब हो गई। जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल लाया गया। जहां डॉक्टरों ने ये बताया कि उसकी किडनी खराब हो गई है। जिसके बाद मैंने अपनी किडनी देकर उसकी जान बचाने की कोशिश की पर डॉक्टरों ने उनकी किडनी को सही नहीं बताया और ट्रांसफर करने से मना कर दिया। फिर वो लोग दूसरी किडनी की तलाश करने में लगे थे लेकिन उन्हें कहीं सफलता नहीं मिल रही थी। जयंत की तबीयत दिन पे दिन खराब होती जा रही थी। हम लोगों की परेशान देखते हुए हमारी बेटी मेनका ने अपनी किडनी देकर जयंत की जान बचाने की बात कही और इसे पूरा करने के लिए भी तैयार हो गई।

किडनी ट्रांसफर के लिए 6 डाक्टरों की एक टीम तैयार की गई जिसमें डॉ. नीतेश कुमार, डॉ. एहसान अहमद, डॉ. रोहित उपाध्याय, डॉ. अमरेश कृष्णा, डॉ. प्रीतपाल और डॉ. हर्षवर्धन शामिल थे। वहीं डॉक्टरों ने मेनका की किडनी निकालकर जयंत को लगा दी। इस तरह आईजीएमएस हॉस्पिटल में 19वां किडनी ट्रांसफर किया गया। आईजीएमएस हॉस्पिटल के अपर अधीक्षक डॉक्टर मनीष मंडल से जब इस विषय में बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि किडनी खराब होने का सबसे बड़ा कारण दवा होती है। क्योंकि दवा के साइड इफेक्ट के कारण अधिकांश लोगों की किडनी खराब हो जाती है। साथ ही उन्होंने कहा कि खेती में हो रहे रासायनिक खादों का अत्यधिक उपयोग किडनी खराब करने की मुख्य वजह बन रही है।

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