Seemanchal Express में 'रैली वाला' मुसाफ़िर फंसा या फंसाया गया? कैंटीन कर्मी के 'खेल' में पत्थर, चाकू और साजिश
Seemanchal Express: पटना में आयोजित 'वक़्फ़ बचाओ-संविधान बचाओ' रैली में भाग लेने जा रहे एक मुसाफ़िर को सीमांचल एक्सप्रेस में कैंटीन कर्मियों द्वारा कथित तौर पर झूठी साज़िश में फंसाने का सनसनीखेज़ मामला सामने आया है।
मुसाफ़िर का आरोप है कि उसे ट्रेन में सीट देने के नाम पर पैसे लिए गए और जब उसने विरोध किया तो उस पर पत्थर फेंकने और चाकू दिखाकर फंसाने की कोशिश की गई। इस घटना ने ट्रेन यात्रा में सुरक्षा और यात्रियों के साथ होने वाले बर्ताव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चश्मदीदों की मानें तो घटना सीमांचल एक्सप्रेस में उस वक्त हुई जब मुसाफ़िर पटना आ रहा था। ट्रेन के कैंटीन कर्मी ने मुसाफ़िर को सीट देने के लिए 200 रुपये लिए। इसी बात पर कैंटीन कर्मी और मुसाफिर से बहस हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि कैंटीन कर्मियों ने कथित तौर पर ट्रेन में पत्थर रखकर शीशा तोड़ दिया।
इसका आरोप मुसाफ़िर पर लगाने की कोशिश की। यहीं नहीं, उन पर चाकू निकालकर फंसाने की धमकी दी। पीड़ित मुसाफ़िर ने बताया कि उसे जानबूझकर "शान और साज़िश के तहत बदनाम" किया जा रहा है। उसका कहना है कि वह पटना में होने वाली 'वक़्फ़ बचाओ-संविधान बचाओ' रैली में शामिल होने आ रहा था और कैंटीन कर्मियों ने उसे झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की।
इस घटना के बाद, यात्रियों के बीच दहशत का माहौल है और रेलवे प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं कि चलती ट्रेन में इस तरह की घटना कैसे हो सकती है। आरोप है कि कैंटीन कर्मियों द्वारा यात्रियों से सीट के नाम पर पैसे लेना एक आम बात हो गई है और अब यह मामला बदसलूकी और साज़िश तक पहुंच गया है।
फिलहाल, इस मामले में रेलवे या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह देखना बाकी है कि रेलवे प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करता है और क्या 'वक़्फ़ बचाओ-संविधान बचाओ' रैली के आयोजक इस मामले को उठाते हैं। यह घटना एक बार फिर रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा और सेवा की गुणवत्ता पर विचार करने की आवश्यकता को उजागर करती है।












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