तीसरी पीढ़ी भी अफसर... दादा, पापा, चाचा सभी सिविल सेवा में, पति भी अधिकारी, संस्कृति का IRS सेवा में चयन
UPSC परीक्षा में इस बार बिहार के 32 अभ्यर्थियों को सफलता मिली है। 5 कैंडिडेट्स ने टॉप-100 में जगह बनाई है। वहीं, बरबीघा प्रखंड अंतर्गत तोयगढ़ गांव निवासी राकेश सिंह की बेटी संस्कृति सिंह को सिविल सेवा परीक्षा में 366वां रैंक आया है। संस्कृति को आईआरएस सर्विस मिली है।
संस्कृति सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल कर अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी की परंपरा को आगे बढ़ाया है। संस्कृति सिंह के दादाजी भरत सिंह शेखपुरा जिला के पहले आईपीएस अफसर थे।

संस्कृति के दादा भरत सिंह का पिछले साल ही निधन हुआ। भरत सिंह के दो बेटे राकेश सिंह और मुकेश सिंह दोनों ही सिविल सेवा में हैं। संस्कृति सिंह के पिता राकेश सिंह कर्नाटक में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत है। संस्कृति के चाचा मुकेश सिंह असिस्टेंट कैग के पद से रिटायर हुए हैं।
3 साल पहले संस्कृति की शादी हुई थी। उनके पति आईआरएस अफसर हैं। परिजनों के मुताबिक संस्कृति पढ़ने-लिखने में अच्छी थी और बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखती थी। संस्कृति की सफलता पर गांव के साथ-साथ पूरे जिले में खुशी की लहर देखी जा रही है।
आपको बता दें कि बिहार के कई छात्र-छात्राओं ने सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है। इनमें सबसे पहला नाम समस्तीपुर के शिवम कुमार का है जिन्होंने19वीं रैंक हासिल की है। 23वें स्थान पर गोपालगंज के सौरव शर्मा हैं।
वही, जुफिशां हक को 34वीं रैक मिली है। औरंगाबाद के विरुपाक्ष विक्रम सिंह की 49वीं रैंक रही। पटना के फुलवारीशरीफ स्थित कुरकुरी निवासी प्रिया रानी को 69वीं रैंक और पटना के ही अन्नपूर्णा सिंह को 99वीं रैंक मिली है।
पत्रकार बना अफसर
नरकटियागंज के शहंशाह सिद्दीकी को 762वीं रैंक मिली है। वह कभी एक मीडिया चैनल में पत्रकारिता करते थे। उन्होंने पत्रकारिता छोड़ सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। पांच बार असफलता हासिल करने के बाद उन्हें छठवीं बार में सफलता हासिल हुई है। उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई नरकटियागंज में ही हुई है। 12वीं के बाद इन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की।












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