बिहार के चार 'दंगे' जिसे याद कर आज भी सहम उठते हैं लोग, कई परिवारों को दे गया दर्द
Bihar Riots: बिहार में सांप्रदायिक हिंसा का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है। भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक साल 2018-20 तक में देश में सबसे अधिक हिंसा बिहार में हुई थी।

Bihar Riots: बिहार के नालंदा के बिहारशरीफ और रोहतास के सासाराम में हिंसा थमने का नाम नहीं रहा है। प्रशासन ने नालंदा और सासाराम में बुधवार तक के लिए इंटरनेट सेवा पर 24 घंटों के लिए रोक लगा दी है। इस मामले में अब तक 173 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इन सब के बीच अब सवाल उठता है कि जब सरकार जानती है कि ये इन सब जिलों में हर पर्व त्योहार पर कोई न कोई हिंसा होती रहती है तो फिर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत क्यों नहीं करती है। हिंसा को रोकने के लिए पर्याप्त फोर्स क्यों नहीं लगाती है? आइए हम आपको बिहार में हुए पिछले चार दंगों के बारे में जिसे लोग याद कर सहम जाते हैं।
भागलपुर-1989 का दंगा (Bhagalpur Riots)
भागलपुर में 24 अक्तूबर 1989 में मंदिर के लिए पत्थर इकट्ठा कर रहे एक समुदाय के लोगों पर बम फेंका गया था। इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस घटना के बाद भागलपुर शहर और आस-पास के इलाकों में दंगे भड़क गए थे। इन दंगों की वजह से 50 हजार से ज्यादा लोगों को बेघर होना पड़ा था और 1000 लोग मारे गए थे।
बिहारशरीफ का दंगा(Bihar Sharif Riots)
नालंदा के बिहारशरीफ में साल 1981 में बिहारशरीफ (Bihar Sharif) में हुए दंगे में 45 लोग मारे गए थे और 70 लोग घायल हुए थे।2023 में भी रामनवमी पर हिंसा भड़की जिसमें कई लोगों के साथ-साथ पुलिस के जवान भी घायल हो गए। अभी भी माहौल तनावग्रस्त है।
सीतामढ़ी का दंगा (Sitamarhi Riots)
सीतामढ़ी जिले में 1992 में दो समुदाय में हिंसा भड़क गई थी। एक मस्जिद के पास जय श्री राम के नारे लगा रहे दुर्गा पूजा जुलूस को कुछ मुस्लिम युवकों ने रोक दिया था जिसके बाद दंगा भड़क गया था। दोनों तरफ से खूब हिंसा हुई। इस घटना में 65 लोग मारे गए थे और सैंकड़ों घायल हो गए थे।
2018 में आठ जिलों में फैला था दंगा (Bihar 2018 Riots)
रामनवमी के हिंदू त्योहार के दौरान 17 मार्च 2018 को भागलपुर में शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा आठ जिलों में फैल गई। 25 मार्च 2018 को पुलिस ने दंगे पर काबू पाया था। लेकिन कुछ अज्ञात लोगों ने नवादा के एक मंदिर में एक हनुमान की मूर्ति को तोड़ दिया और सीवान, गया, कैमूर, समस्तीपुर, मुंगेर, औरंगाबाद, नालंदा, हैदरगंज और रोसेरा जिलों को प्रभावित करते हुए फिर से हिंसा भड़क उठी।
बिहार में दंगे का रिकॉर्ड बेहद खराब
सांप्रदायिक दंगों के मामलों में बिहार का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है।बिहार में 2017 में दंगों के सबसे अधिक 11,698 मामले दर्ज हुए थे। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने 2018-20 के बीच देश भर में हुए साम्प्रदायिक दंगों का आंकड़ा जारी करते हुए बताया था कि सबसे अधिक साम्प्रदायिक दंगे बिहार में दर्ज किए गए।












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