Bihar Politics: 'संविधान बचाओ' VS 'धर्मनिरपेक्षता हटाओ' की जंग, कौन करेगा दलित-ओबीसी वोट बैंक पर कब्जा?

Bihar Politics: बिहार में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। महागठबंधन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को घेरना शुरू कर दिया है। महागठबंधन एक बार फिर 'संविधान बचाओ' के नारे को बुलंद करने की तैयारी में है।

महागठबंधन की रणनीति
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन दो घटनाक्रमों को अपने राजनीतिक फायदे के तौर पर देख रहा है। पहला, आरएसएस और भाजपा नेताओं द्वारा संविधान की प्रस्तावना से 'धर्मनिरपेक्षता' और 'समाजवाद' शब्दों को हटाने की मांग, और दूसरा, चुनाव आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम।

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'संविधान को खतरा'
महागठबंधन दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधने के लिए इन दोनों मुद्दों को 'संविधान के खतरे' से जोड़कर देख रहा है। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जैसे महागठबंधन के प्रमुख दल इन मुद्दों को उठाकर 'संविधान बचाने' का माहौल बनाने में जुट गए हैं।

दलित और ओबीसी मतदाताओं पर फोकस
बिहार में आगामी कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और सभी राजनीतिक पार्टियां इसकी तैयारी में जोर-शोर से लगी हुई हैं। कांग्रेस, राजद और वामपंथी दल, जनता दल (यूनाइटेड) और भाजपा के गठबंधन को घेरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते हैं। महागठबंधन का मुख्य ध्यान अपने कोर वोटर्स, यानी दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदायों को एकजुट करने पर है। इसी बीच, संविधान की प्रस्तावना को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है।

आरएसएस-भाजपा के बयान से गरमाई राजनीति
आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के कार्यक्रमों के दौरान, आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संविधान की प्रस्तावना से 'धर्मनिरपेक्षता' और 'समाजवाद' शब्दों को हटाने की मांग की। उनका तर्क था कि ये शब्द आपातकाल के दौरान जोड़े गए थे और इनका मूल संविधान से कोई संबंध नहीं है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर कहा, "आरएसएस और भाजपा का मुखौटा फिर से उतर गया है। संविधान इन्हें चुभता है, क्योंकि वह समानता, धर्मनिरपेक्षता और न्याय की बात करता है। इनको संविधान नहीं, मनुस्मृति चाहिए। ये बहुजनों और गरीबों से उनका हक छीनकर उन्हें दोबारा गुलाम बनाना चाहते हैं।"

चुनाव आयोग पर दिग्विजय सिंह का आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को बिहार में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक विशेष पार्टी के समर्थन में निर्णय ले रहा है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर चुनाव आयोग सर्वदलीय बैठक बुलाकर निर्णय लेता है, जिसमें समस्याओं का समाधान ढूंढा जाता है।

बिहार में आखिरी बार विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम 2003 में हुआ था, जिसमें घर-घर जाकर सर्वे किया गया था और लगभग दो साल लगे थे। इस बार, पुनरीक्षण के लिए केवल एक महीना दिया गया है, जो बारिश के कारण अव्यावहारिक है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस प्रक्रिया को बिहार के गरीबों का मताधिकार खत्म करने की भाजपा की साजिश बताया है।

इन घटनाक्रमों के बीच, बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और सभी पार्टियां मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश में जुटी हैं। देखना यह होगा कि महागठबंधन 'संविधान बचाओ' के नारे के साथ दलित, ओबीसी और अल्पसंख्यक मतदाताओं को कितना एकजुट कर पाता है।

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