Phulparas Election 2025: कौन जीतेगा फुलपरास सीट? कौन होगा उम्मीदवार? कर्पूरी ठाकुर से जुड़ा है सीट का इतिहास
Phulparas Assembly Election 2025: बिहार में 2025 के अंत तक विधानसभा चुनाव होने हैं और सभी राजनीतिक दल अभी से अपनी बिसात बिछाने में जुट गए हैं। ऐसे में मधुबनी जिले की फुलपरास विधानसभा सीट भी सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। यह सीट न केवल ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि कई बड़े नेताओं की राजनीति का केंद्र भी रही है।
जननायक कर्पूरी ठाकुर से लेकर मौजूदा विधायक शीला कुमारी तक, इस सीट पर कई रोचक मुकाबले देखे गए हैं। फुलपरास सीट मधुबनी जिले की अहम विधानसभा सीट है। फुलपरास विधानसभा क्षेत्र, झंझारपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और इसका राजनीतिक इतिहास काफी समृद्ध रहा है। यहां पहली बार 1952 में चुनाव हुआ था और तब से लेकर अब तक यह सीट कई राजनीतिक उठापटक की गवाह रही है।

फुलपरास सीट इतिहास: कर्पूरी ठाकुर ने यहीं से लड़ा था उपचुनाव
1977 में जब कर्पूरी ठाकुर बिहार के मुख्यमंत्री बने, तो वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। इसके बाद फुलपरास के विधायक देवेंद्र प्रसाद यादव ने उनके लिए यह सीट खाली की थी और कर्पूरी ठाकुर ने उपचुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया था। कर्पूरी ठाकुर को बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने अपने छोटे से कार्यकाल में गरीबों और पिछड़ों के हित में कई ऐतिहासिक फैसले लिए थे, जिनका असर आज भी राज्य की राजनीति में महसूस किया जाता
फुलपरास सीट पर 2010 से जेडीयू का दबदबा रहा है। 2010 और 2015 में गुलजार देवी ने JDU के टिकट पर लगातार दो बार जीत दर्ज की। 2020 में शीला कुमारी ने कांग्रेस के कृपानाथ पाठक को हराकर JDU का किला और मजबूत कर दिया। यह लगातार जीतें JDU की नीतीश कुमार के नेतृत्व में मजबूत पकड़ को दिखाती हैं।
फुलपरास जातीय समीकरण: यादव, दलित और मुसलमान मतदाता निर्णायक
- फुलपरास विधानसभा सीट पर यादव, मुसलमान, दलित और कुशवाहा समुदायों की बड़ी आबादी है।
- यादव समुदाय यहां निर्णायक भूमिका में रहता है और लगभग हर चुनाव में मुख्य उम्मीदवार इसी वर्ग से आता रहा है।
- मुस्लिम मतदाता भी निर्णायक माने जाते हैं, इसलिए RJD और कांग्रेस जैसे दलों को इसका फायदा मिलता रहा है।
- दलित और अतिपिछड़े समुदायों के वोट JDU के साथ दिखाई देते हैं, विशेषकर जब महिला उम्मीदवार मैदान में हों।
फुलपरास सीट से 2025 में कौन हो सकता है उम्मीदवार?
🔹 JDU
- वर्तमान विधायक शीला कुमारी दोबारा मैदान में उतर सकती हैं। अगर सीट किसी और को दी जाती है तो गुलजार देवी की वापसी भी संभव है।
- सीट अगर गठबंधन में बीजेपी को मिलती है तो राम सुंदर यादव जैसे पुराने चेहरों को फिर से उतारा जा सकता है।
🔹 RJD-कांग्रेस गठबंधन
- कृपानाथ पाठक फिर से उम्मीदवार हो सकते हैं, जिनका इलाके में एक मजबूत वोटबैंक है। देव नाथ यादव जैसे पुराने चेहरे या किसी युवा नेता को मौका भी दिया जा सकता है।
🔹 AIMIM जैसे दल सीमांचल समीकरण को देखते हुए मुसलमान वोटों पर दाव लगा सकते हैं।












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