बिहार: 5 लाख देकर ली सरकारी नौकरी, 5 साल तक बिना वेतन किया काम, अब हुआ फ़र्ज़ी बहाली का खुलासा
फ़र्ज़ी बहाली के मामले में रीना नाम की युवती ने मुजफ्फरपुर के सदर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
मुजफ़्फ़रपुर, 24 अगस्त 2022। बिहार में फ़र्ज़ी थाने का भंडाफोड़ होने के बाद अब फ़र्ज़ी बहाली का मामला सुर्खियों में है। फ़र्ज़ी बहाली का खुलासा होने से लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। मिली जानकारी के मुताबिक स्वास्थ विभाग में लाखों रुपये घूस देने के बाद बहाली की गई थी। राज्य के विभिन्न जिलों में स्वास्थ्य विभाग के दलालों ने फ़र्ज़ी लेटर हेड पर फ़र्ज़ी पोस्टिंग की थी। साल 2016 से साल 2021 तक फ़र्ज़ी कारनामा चलता रहा। कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने पर मामले का खुलासा हुआ।

पांच साल तक बिना वेतन के किया काम
फ़र्ज़ी बहाली के मामले में रीना नाम की युवती ने मुजफ्फरपुर के सदर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। समस्तीपुर के बंगरा थाना क्षेत्र के कुबौली राम की रहने वाली रीना का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न संस्थानों में फर्जी बहाली कर पांच साल तक नौकरी कराई गई लेकिन सैलरी नहीं मिली। वेतन नहीं मिलने पर मामले में शक हुआ तो खुद ही पड़ताल शुरू की लेकिन जब सच्चाई पता चली तो बिना वेतन के काम करते हुए पांच साल गुज़र गए।

कई लोगों को ठगों ने बनाया शिकार
रीना की मानें तो स्वास्थ्य विभाग में एक दर्जन से ज़्यादा महिला और पुरुष की विभिन्न जगहों पर फ़र्ज़ी बहाली की गई। 2016 से 2021 तक सभी लोग स्वास्थ्य विभाग के दलालों के फ़र्ज़ीवाड़े का शिकार होते रहे। यहां तक की फर्जी लेटर हेड पर पोस्टिंग के साथ-साथ बड़ा बाबू तबादला भी करते रहे। सब कुछ प्रॉपर तरीक़े से किया जा रहा था जिससे किसी को शक नहीं हो लेकिन जब सैलरी नहीं मिलते हुए पांच साल गुज़र गए तो फ़र्ज़ी बहाली का खुलासा हुआ।

वेतन नहीं मिलने पर हुआ मामले का खुलासा
स्वास्थ्य विभाग में काम करते हुए जब वेतन नहीं मिला तो कर्मियों ने वेतन के लिए गुहार लगाई जिसके बाद मामले का खुलासा हुआ। पता चला की एक ठग गिरोह ने एक दर्जन से ज़्यादा लोगों को फ़र्ज़ी लेटर हेड पर बहाल किया था। ग़ौरतलब है कि सभी लोग पांच साल से काम भी कर रहे थे। पीड़ित रीना ने जो एफआईआर दर्ज करवाई है उसमें अवधेश ठाकुर उर्फ भिखारी ठाकुर (मधुबनी, मधवापुर थाना क्षेत्र) और गिरिजानंद पांडेय (लक्ष्मी सागर कॉलोनी, जक्कनपुर थाना क्षेत्र, पटना) पर आरोप है। भिखारी ठाकुर वर्तमान मुखिया है और गिरिजानंद पांडेय कथित तौर सचिवालय से संस्पेंड क्लर्क है।

पांच लाख रुपये देकर हुई बहाली
पीड़िता रीना ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि नौकरी तलाश में उसने पूर्व परिचित भिखारी ठाकुर और गिरिजानंद पांडेय ने संपर्क साधा था। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में दर्जनों लोगों को बहाल कराने का दावा कराते हुए मुझे भी झांसे में ले लिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में काम नौकरी मिल जाएगी, इसके लिए मैट्रिक और इंटर पास दस्तावेज़ और 100 रुपये का सादा स्टाम्प लगेगा और पांच लाख रुपये नकद लगेंगे। रीना उनके झांसे में आ गई और पैसे देकर उसकी पोस्टिंग हाजीपुर में पोस्टिंग में हो गई। पोस्टिंग होने के बाद कई बार वह हाजीपुर दफ्तर गई। जितेंद्र नाम का क्लर्क था जो सभी की सैलरी तैयार करता था, लेकिन किसी को भी सैलरी नहीं मिली। वहीं गिरिजानंद पाडेय कई बार बहाल कर्मियों को सचिवालय (पटना) ले गया और बिलिंग क्लर्क से मिलवाकर काम जल्दी करवाने की एवज़ में रिश्वत के नाम पर पैसे भी ठगता रहा।

मामले की जांच में जुटी पुलिस
पीड़ित युवती रीना ने बताया कि दोनो लोग कोरोना काल से पहले दोनों लोग उनके घर आते थे। कोरोना काल के बाद उन्होंने घर आना तो बंद किया ही इसके साथ ही कॉल भी उठाना छोड़ दिया। इन दोनों की हरकतों से शक होने पर सभी लोगों ने मिलकर मामले की पड़ताल शुरु की जिसमे पता चला कि जिस पद पर उनकी बहाली हुई है विभाग में वैसा कोई पद ही नहीं है, उनलोगों की बहाली ही फ़र्ज़ी है। वहीं पुलिस ने पीड़िता के शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच की ज़िम्मेदारी एसआई देवव्रत कुमार को दी गई है। मामले में स्वास्थ विभाग से भी संपर्क कर हर पहलुओं पर जांच की जाएगी।
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