Pearl Farming: नौकरी नहीं मिलने पर की मोती की खेती, लाखों में हो रही कमाई
Pearl Farming: अजय मेहता ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि उन्होंने 50 हज़ार रुपये की लागत से 2 हज़ार सीप खरीदा था और मोती की खेती की शुरुआत की थी। उन्होंने बताया कि हज़ार रुपये की लागत से लाखों रुपये का मुनाफा...
Pearl Farming: बेरोज़गारी की समस्या से पूरे देश के युवा जूझ रहे हैं, वहीं कुछ युवा नौकरी नहीं मिलने पर व्यवसाय कर रहे हैं तो कुछ युवा नौकरी छोड़ कर बिजनेस कर रहे हैं। इसी कड़ी में हम आपको बिहार के गया ज़िले के दो युवकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने आत्मनिर्भर बनने के लिए खुद का व्यवसाय शुरू किया और कामयाबी भी हासिल की। खुद के व्यवसाय से वह लाखों रुपये कमा रहे हैं। आप भी मोती की खेती (पर्ल फार्मिंग कर लाखों रुपये की आमदनी कर सकते हैं। आइए जानते हैं किस तरह से दो युवाओं ने मोती की खेती की और अब लाखों रुपये कमा रहे हैं।

मोती की खेती से बदली किस्मत
बिहार के गया जिले के हरने वाले दो नौजवानों को नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने मोती की खेती की और आत्मनिर्भर बने। इस खबर में हम आपको मोती की खेती की जानकारी भी देंगे, उससे पहले आपको बताते हैं कि किस तरह से दो युवकों ने मोती की खेती से कामयाबी की सीढियां चढ़ीं। बरेऊं गांव (मानपुर प्रखंड, गया) के रहने वाले अजय मेहता और नैली गांव (सदर प्रखंड, गया) के रहने वाले उदय कुमार मोती की खेती कर लाखों रुपये की आमदनी कर रहे हैं। अजय तालाब में पर्ल फार्मिंग (मोती की खेती) कर रहे हैं, तो वहीं उदय अपने घर में टैंक बनाकर फार्मिंग कर रहे हैं।

50 हजार रुपये से की थी शुरुआत
अजय मेहता ने मीडिया से मुखातिब होते हुए बताया कि उन्होंने 50 हज़ार रुपये की लागत से 2 हज़ार सीप खरीदा था और मोती की खेती की शुरुआत की थी। उन्होंने बताया कि हज़ार रुपये की लागत से लाखों रुपये का मुनाफा मोती की खेती से हो सकता है। पर्ल फार्मिंग का तरीका बहुत ही आसान है, इसे करने के लिए तालाब या फिर टैंक का इस्तेमाल किया जा सकता है। तालाब में सीप को 30 से 45 दिनों तक रखा जाता है, ताकि सीप विकसित होने की ज़रूरतें पूरी हो सकें। इसके बाद उसे टैंक में भी रख सकते हैं, या फिर तालाब में भी मोती बनने तक रखा जा सकता है।

मोती की खेती के लिए ली ट्रेनिंग
अजया ने बताया कि नौकरी नहीं मिलने की वजह से वह काफी परेशान थे, जिसके बाद उन्होंने नेट के ज़रिए मोती की खेती के बारे में पता चला। लेकिन मोती की खेती करने का अनुभव नहीं था इसलिए वह पर्ल फार्मिंग की ट्रेनिंग के लिए दूसरे प्रदेश गए। मोती की खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद सीप पालन शुरू किया। पहले उन्होंने 2 हज़ार सीप से व्यवसाय की शुरुआत की। उन्होंने बताया की करीब 1 साल का वक्त सीप से मोती तैयार करने में लगता है। तालाब और टैंक के क्षमता के हिसाब से सीप पालन की तादाद बढ़ाई जा सकती है।

‘मोती के व्यवसाय के लिए स्थानीय बाज़ार होना चाहिए’
मोती के खेती के बारे में जानकार बताते हैं कि 1 साल में सीप से मोती तैयार हो जाती है। किसान जितना ज्यादा सीप पालन करेंगे उसे उतना ज्यादा मुनाफ़ा होने की उम्मीद है। 1 साल में सीप से मोती तो तैयार हो जाती है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या है कि लोकल लेवल पर मोती के बाज़ार नहीं हैं। इस वजह से मोती को स्थानीय बाज़ार में बेचना मुश्किल होता है। सीप से मोती तैयार होने के बाद दूसरे प्रदेशों में बेचा जाता है। अगर लोकल लेवल पर मोती बेचने के लिए बाज़ार होगा तो किसानों की आमदनी में ज्यादा मुनाफा हो सकता है। इसके साथ ही मोती की खेती के व्यवसाय को बढ़ावा मिल सकता है।
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