शिक्षक और कांट्रेक्ट कर्मचारी नहीं लड़ सकेंगे बिहार पंचायत चुनाव, आयोग ने लिया फैसला
पटना। बिहार सरकार में कांट्रेक्ट पर काम करने वाले अब पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। राज्य चुनाव आयोग ने फैसला दिया है कि जो कर्मचारी बिहार सरकार के किसी भी विभाग में कांट्रेक्ट पर काम करते रहेंगे, वो चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। यहां तक किसी भी कांट्रेक्ट कर्मचारी को किसी उम्मीदवार का प्रस्तावक बनने की भी अनुमति नहीं है। राज्य चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि अनुबंध वाले कर्मी अगर किसी प्रत्याशी का प्रस्तावक भी बनते हैं तो उक्त प्रत्याशी का भी नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।

आयोग ने इसकी तैयारी कर ली है और बहुत जल्द इस सूचना को पब्लिक फोरम पर साझा कर दिया जाएगा। राज्य चुनाव आयोग ने उनके लिए भी चुनाव लड़ने का रास्ता बंद कर दिया है, जो नौकरी तो शिक्षक की करते थे और चुनाव लड़ नेता भी बन जाते थे और फिर अपने क्षेत्र में दबदबा बनाते थे।
आयोग ने शिक्षक, प्रोफेसर, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगा दी है। राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से जल्द ही इसकी सूचना जारी हो जाएगी। इस पंचायत चुनाव में पूर्णतः या आंशिक सहायता प्राप्त करने वाले कर्मचारी भी चुनाव नहीं लड़ सकते।
दरअसल, शिक्षक और कांट्रेक्ट कर्मचारी चुनाव लड़कर जीत जाते थे फिर दोनों पदों का लाभ उठाते थे। वहीं चुनाव आयोग का मानना है कि वैसे कर्मचारी किसी भी काम के साथ न्याय नहीं कर सकेंगे, इसलिए उनके चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई गई है।
बता दें कि पंचायत चुनाव को लेकर मतदाता सूची में संशोधन, दावा-आपत्ति के लिए समय सीमा केवल एक दिन बचा है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन एक फरवरी तक किया जाना है। इसके लिए सोमवार तक ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन दिया जा सकेगा। आयोग के मुताबिक एक फरवरी के बाद मतदाता सूची को लेकर दोई भी दावा या आपत्ति मान्य नहीं होगा।












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