Patna Sahib Lok Sabha Seat: BJP के गढ़ में क्या बदल पाएगा नज़ारा, जानिए सियासी समीकरण और इतिहास
Patna Sahib Lok Sabha Seat: बिहार में लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र सभी 40 लोकसभा सीटों पर मंथन शुरू हो चुका है। राजनीतिक पार्टिया मतदाताओं को लुभाने के लिए बूथ लेवल तक पार्टी संगठन को मज़बूत करने में जुट गई है। वहीं लोकसभा सीटों के समीकरण पर भी चर्चा तेज़ हो गई है।
बिहार में हो रही चुनावी चर्चा के क्रम में आज हम आपको पटना लोकसभा सीट का सियासी इतिहास और समीकरण बताने जा रहे हैं। नए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई, पटना साहिब लोकसभा सीट को भाजपा के गढ़ वाली सीटों में शुमार किया जाता है।

लोकसभा चुनाव 2009 के बाद से ही इस पर भाजपा का क़ब्ज़ा है। पहली बार यहां से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी पार्टी के लिए जीत का परचम बुलंद किया था। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रत्याशी विजय यादव को सियासी मात दी थी। वहीं कांग्रेस के प्रत्याशी शेखर सुमन ने तीसरे नंबर पर जगह बनाई थी।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा ने अपने कांग्रेस प्रत्याशी कुणाल सिंह को चुनावी मैदान में हराया था। पटना लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे शत्रुघ्न सिन्हा साल 2019 में भाजपा से किनारा कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया था।
2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर शत्रुघ्न सिन्हा ने चुनावी दांव खेला, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया। भाजपा ने पटना साहिब सीट से रविशंकर प्रसाद को चुनावी दंगल में उतारा और जनता के साथ ने सीट पर तीसर बार भाजपा का 'कमल' खिलाया।
पटना साहिब लोकसभा सीट पर भाजपा ने जीत की हैट्रिक लगाई, यहां के सियासी समीकरण की बात की जाए तो यह सीट कायस्थ बाहुल्य माना जाता है। यहां पर जातीय समीकरण में भाजपा के कोर वोटर सवर्ण, अतिपिछड़ा और दलित समुदाय के लोग माने जाते हैं।
2009 के चुनाव से ही पटना साहिब लोस क्षेत्र अस्तित्व में आया। इसके अंतर्गत बख्तियारपुर, फतुहा और बाढ़ क्षेत्र आते थे। इसके अलावा अन्य विधानसभा क्षेत्र पटना लोकसभा क्षेत्र में शामिल थे। शुरुआत में यहां कांग्रेस का दबदबा रहा, लेकिन बाद में बाढ़ लोकसभा क्षेत्र पर समाजवादियों का परचम लहराने लगा।
नीतीश कुमार लगात 1989 से 1999 तक पांच बार इस क्षेत्र के सांसद रहे हैं। वहीं 2004 में राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी विजय कृष्ण इस सीट से सांसद चुने गए। पटना लोकसभा क्षेत्र में शुरुआती दौर से ही कांग्रेस और CPI के बीच सियासी दंगल होता रहा, बाद में भाजपा और राजद समेत अन्य दलों की इंट्री हुई।
2019 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों से इस लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी की सियासी ज़मीन मज़बूत दिख रही है। यहा 6 की विधानसभा सीटों में से 4 पर भाजपा का क़ब्ज़ा है। पटना साहिब, बख्तियारपुर, फतुहा, कुम्हरार, बांकीपुर और दीघा विधानसभा पटना लोकसभा क्षेत्र के अंदर आते हैं।
फतुहा और बख्तियारपुर विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय जनता दल का परचम बुलंद है। वहीं पटना साहिब, कुम्हरार, बाकींपुर और दीघा विधानसभा सीट पर भाजपा का क़ब्ज़ा है। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि पटना साहिब लोकसभा सीट पर इस बार के चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर मिल सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह नीतीश कुमार का 'INDIA गठबंधन' के साथ जाना है।












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