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बिहार बोर्ड की परीक्षा में किन्नरों की अचानक बढ़ी संख्या, बहुत खास है वजह

नाचने गाने के कार्यक्रम को छोड़ किन्नर अब शिक्षा के क्षेत्र में आगे आ रहे हैं। इसी का नतीजा है कि पहली बार बिहार बोर्ड की परीक्षा में 253 किन्नर बैठेंगे।

पटना। पुराने जमाने से ही किन्नरों की नाचने गाने को लेकर एक अलग पहचान बनी हुई है। किन्नरों के नाचने-गाने का प्रोग्राम अक्सर उन्हीं घरों में देखा जाता है जहां नई-नई खुशियां आती हैं। लेकिन बदलते जमाने के दौर में इनके द्वारा अब किन्नरों को बदलते देखा जा रहा है। दरअसल, नाचने गाने के कार्यक्रम को छोड़ किन्नर अब शिक्षा के क्षेत्र में आगे आ रहे हैं। इसी का नतीजा है कि पहली बार बिहार बोर्ड की परीक्षा में 253 किन्नर बैठेंगे। वहीं, किन्नरों की इस पहल से लोगों में भी उत्साह देखा जा रहा है। चलिए आपको बताते है कि सरकारी बैंक में नौकरी करने वाली मोनिका के सफर के बारे में जो पहले गोपाल नामक किन्नर हुआ करती थी। ये भी पढे़ं: टीम इंडिया में शामिल हुआ एक और बिहारी छोरा, जानिए गली से स्टेडियम तक का सफर

गोपाल से मोनिका बनी इस किन्नर की सफलता की पूरी कहानी

गोपाल से मोनिका बनी इस किन्नर की सफलता की पूरी कहानी

किन्नर गोपाल से मोनिका बनी देश की पहली ऐसी किन्नर हैं, जिसने अपने दम पर बैंक में क्लर्क की नौकरी हासिल की है। 25 वर्षीय मोनिका का कहना है कि उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई तरह के संघर्ष करने पड़े थे। घर से लेकर बाहर तक सभी के ताने और नीचा दिखाने की कोशिश के बाद भी वे अपने मुकाम तक पहुंची। क्योंकि उसने बचपन में ही ठान लिया था कि वे कुछ अलग करेंगी। जिससे उनके और उनकी जातियों का नाम लोग इज्जत से ले सकें। इसी का नतीजा है कि आज वे पटना से हनुमान नगर के सिंडिकेट बैंक में कलर्क की पोस्ट पर बहाल किया गया है। शुरुआत के दिनों में जब वे पहली बार अक्टूबर 2015 में बैंक में नौकरी ज्वाइन करने गई थीं तो सभी कर्मचारी उनका मजाक बना रहे थे लेकिन, धीरे -धीरे उनकी मेहनत और काम करने के तौर तरीके को देखने के बाद सभी हैरान रह गए कि आखिरकार एक किन्नर इतना बेहतरीन काम कैसे कर सकती है। इसी का नतीजा है कि आज बैंक के सभी स्टाफ उन्हें इज्जत देते हैं।

ये था बचपन से स्कूल तक का सफर

ये था बचपन से स्कूल तक का सफर

अपने बारे में बताते हुए मोनिका ने कहा कि उसे किन्नर गोपाल से मोनिका तक का सफर तय करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे पहली परेशानी उनके घर से शुरू होती है। जन्म लेने के 3 साल बाद जब उनके घर वालों को पता चला कि गोपाल ना तो लड़का है और ना ही लड़की, जिसके बाद घरवाले काफी मायूस हो गए। मोनिका ने कहा कि 'भगवान ने जिस रूप में मुझे जन्म दिया उस रूप में मुझे रहना था। मां बाप तो समझ गए पर मेरे भाई नहीं समझे। बचपन से ही अक्सर मेरे चारों भाई मुझसे काफी दूर रहते थे। भाई के दूर रहने की वजह से आसपास के बच्चे भी मेरे साथ बातचीत करने या खेलने से कतराते थे। जिसे देख पापा ने मेरा नामांकन शहर के नवोदय स्कूल में करवा दिया। नवोदय स्कूल में पढ़ने के दौरान भी स्कूल के बच्चे मझसे काफी भेदभाव करते थे। यहां तक कि स्कूल में पढ़ने के दौरान एक भी लड़के या लड़की से मेरी दोस्ती नहीं हुई। स्कूल की तो छोड़िए आज तक उनके भाई भी उनसे बातचीत नहीं करते हैं। किन्नर मोनिका ने कहा कि उनके भाईओं को उन्हें अपना कहने में शर्म आती है।

मोनिका की आवाज ने नहीं दिया उनका साथ

मोनिका की आवाज ने नहीं दिया उनका साथ

वहीं, मोनिका का कहना है कि बचपन से ही उनकी पर्सनेलेटी लड़कियों जैसी थी। लेकिन मोनिका की आवाज लड़कों से मिलती थी। जिसकी वजह से आज तक उन्हें शर्मिंदा होना पड़ता है। यदि बात करें चाल चलन रहन-सहन की, तो वे सभी लड़कियों जैसी ही थी। वहीं, चेहरे से भी लोग मोनिका को लड़की ही समझते थे। लेकिन, बोलते ही सारी सच्चाई सामने आ जाती थी फिर सभी मोनिका से कतराने लगते थे और तरह-तरह के मजाक भी उड़ाते थे। लेकिन, मोनिका ने बचपन में ही ठान लिया था कि उन्हें कुछ करना है। सभी के ताने को सहते हुए मोनिका ने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई पटना यूनिवर्सिटी से की और पटना लॉ कॉलेज से एलएलबी की डिग्री भी हासिल की।

बिहार की बोर्ड परीक्षा में बैठेंगे कई किन्नर

बिहार की बोर्ड परीक्षा में बैठेंगे कई किन्नर

मोनिका कहती हैं कि बिहार की बोर्ड परीक्षा में किन्नरों के शामिल होने की खबर सुनकर वे काफी खुश हुई हैं। जब भी कभी कोई किन्नर के हक में फैसला सुनाया जाता है तो वे काफी खुश होती हैं कि अब उनकी बिरादरी का नाम नाचने गाने वालों से हटकर इज्जत के साथ लिया जाएगा। बता दें कि बिहार बोर्ड से मिली जानकारी के मुताबिक इस बार किन्नर परीक्षार्थियों की कुल संख्या 253 हैं। ये आंकड़ें बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की तरफ से जारी किये गये हैं। वहीं, बोर्ड की ओर से पहली बार स्कूलों व कॉलेजों को ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरवाते समय थर्ड जेंडर का कॉलम रखा गया था। ये भी पढे़ं: बरेली: इस खबर को पढ़कर आप कहेंगे इंसानियत जिंदा है, मेनका गांधी ने भी किया सलाम

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