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बरेली: इस खबर को पढ़कर आप कहेंगे इंसानियत जिंदा है, मेनका गांधी ने भी किया सलाम

बरेली के युवाओं ने भी जानवरों के दुख में अपनी भागीदारी करने के मकसद से दो शेल्टर हाउस बनाये हैं। जहां बड़ी तादाद में उन जानवरों को सहारा दिया जाता है, जो मुसीबतों के शिकार हुए हैं।

बेरली। दुनिया में आदमियों से जुड़े तमाम शेल्टर हाउसों के बारे में आपने सुना होगा लेकिन आप ने कम ही सुना होगा की भारत में जानवरों के लिए भी शेल्टर हाउस हैं। चलिए हम आपको बताते हैं उत्तर प्रदेश के बरेली में एक इंसानियत को जिंदा रखने वाले लोगों के बारे में। गौरतलब है कि बरेली के इन युवाओं ने एक अलग सोच रखते हुए जानवरों के दुख में अपनी भागीदारी करने के मकसद से दो शेल्टर हाउस बनाये हैं, जहां बड़ी तादाद में उन जानवरों को सहारा दिया जाता है जो किसी घटना के शिकार हुए हैं। ये भी पढ़ें: बिहार: बंदर-बंदरिया की शादी और गोदभराई, चौंकिए नहीं, यह सच है!

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बता दें कि बरेली में कुछ युवाओं की ये सराहनीय शुरूआत उन जानवरों को शहर के चारों कोने से इकट्ठे करने से शुरू होती है जो लाचार होते हैं या फिर किसी न किसी रूप में किसी घटना का शिकार होते हैं। बरेली के सुभाषनगर नगर क्षेत्र में रहने वाले धीरज पाठक और उनके दोस्त आकाश, पंकज, मधुर, आतिफ कॉलेज और जॉब दोनों करते हैं।

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लेकिन इनके एक शौक और सेवा भाव की वजह से पूरे शहर में सबके चहते बन गए हैं। धीरज और उसके दोस्तों के पास कई दर्जन बीमार कुत्ते, घोड़े, बिल्ली, बन्दर, मुर्गी और गाये हैं। वे इन सभी बीमार जानवरों का ईलाज खुद अपने खर्च और समाजसेवियों की मदद से करते हैं।

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बता दें कि इस समय धीरज के शेल्टर हाउस में ऐसे जानवरों की संख्या ज्यादा है जो किसी अनहोनी के चलते अपनों को खो बैठे हैं। दरसल, बरेली में जानवरों के लिए शेल्टर हाउस की धीरज ने काफी समय पहले शुरूआत कर दी थी। लेकिन इस काम के लिए उन्हें पहचान अब मिली है। धीरज के दोस्त उन जगहों पर जाते जाते हैं जहां से उन्हें लाचार जानवरों के घायल और मरने की सूचना मिलती है।

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धीरज के मित्र और स्वयं उस जगह जाकर जानवरों का रेस्क्यू करते हैं। अगर जानवर मरी हुई हालत में मिलता है तो उसका इलाज भी करते हैं, साथ ही साथ उन जानवरों को बचाने की कोशिश करते हैं जो आदमी के जुल्म के शिकार होने वाले होते हैं।

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वहीं, इस ग्रुप खासियत यह भी है कि ये शहर के विभिन्न हिस्सों में घूमकर पक्षियों के लिए घोसलें भी तैयार करते हैं। लेकिन इसी पशु पक्षी प्रेम की वजह से इन्हे अपने परिवार के लोगों के एतराज का भी शिकार होना पड़ता हैं।

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लेकिन अपने नेक काम में किसी भी बाधा को पार करने की वे हिम्मत रखते हैं। उन सभी का कहना है कि उन्हें जानवरों और पक्षियों की सेवा करने में मज़ा आता है। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी उनके काम को प्रोत्साहित करते हुए एक स्कूटर भी गिफ्ट किया है।

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वहीं, धीरज और उसके दोस्तों को इस नेक काम के लिए तारीफ के साथ मदद भी मिलती है। लोग इन दोस्तों के बारे में बताते हैं कि ये सभी दोस्त अपना अधिकतर समय इन जानवरों की देखरेख में बिताते हैं। धीरज और उनके दोस्तों की पहल यह बताने को काफी है किसी के दुख में शामिल होने का मज़ा कुछ और ही है। ये भी पढ़ें: शाहजहांपुर:कबाड़ से क्या-क्या कमाल कर गया ये शख्स, देखने वाले रह गए दंग

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