पश्चिम बंगाल की लड़की के साथ DM ऑफिस में ड्राइवर ने किया गैंगरेप, 20 साल जेल
पटना। बिहार के मुजफ्फरपुर में 2015 में पश्चिम बंगाल से आई एक लड़की के साथ डीएम ऑफिस में बंधक बनाकर गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया था। इस हैवानियत भरे कार्य को एडीएम के ड्राईवर और उसके दोस्तों ने किया था। इस मामले में अब विशेष पॉस्को कोर्ट ने दोषियों को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

यह घटना 5 जनवरी 2015 की है जब आर्केस्ट्रा में काम करने वाली पश्चिम बंगाल की एक लड़की को बहला फुसलाकर कलेक्टर ऑफिस में लाया गया जहां उसके साथ पांच लोगों ने मिलकर सामूहिक दुष्कर्म किया और उसे चुप रहने के एवज में पैसे भी देने लगे तथा ट्रेन पर बैठाकर फरार हो गए। लेकिन लड़की की रोने की आवाज ने इस मामले को खुलासा कर दिया और ट्रेन में बैठे लोगों ने तुरंत इस मामले की जानकारी नजदीकी थाने को दी तथा सभी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया। मामला दर्ज करवाते हुए लड़की ने कहा कि वह लुधियाना से सीतामढ़ी जाने के लिए निकली थी जैसे ही मुजफ्फरपुर स्टेशन पर पहुंची उसने सीतामढ़ी जाने का बस पूछा। रास्ता पूछने पर आरोपी के द्वारा उसे जंक्शन से बाहर ले जाया गया जहां कलेक्टर ऑफिस में ले जाकर उसके दोस्त को रस्सी से बांध कर जमकर पिटाई की गई तथा लड़की के साथ दरिंदगी की घटना को अंजाम दिया गया।
मिली जानकारी के मुताबिक कलेक्ट्रेट सामूहिक दुष्कर्म मामले में न्यायाधीश जनार्दन त्रिपाठी ने 15 लोगों की गवाही के बाद आरोपी को 20 साल की कठोर सजा सुनाई गई है। जिसमें पूर्वी चंपारण के तुंहारा गांव के रहने वाले निक्कू कुमार और बेगूसराय के जितेंद्र पासवान शामिल है। वहीं इस मामले के एक आरोपी को नाबालिग होने के कारण उसे जुवेनाईल बोर्ड के हवाले कर दिया गया। साथ ही इस मामले में दो आरोपी गौतम झा और विकास तिवारी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
बता दें कि घटना को अंजाम देने वाला जितेंद्र पासवान एडिशनल डीएम का गाड़ी चलाता था और कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एक भवन के कमरे में रहता था जहां उसने स्टेशन से बहला फुसलाकर लड़की को लाया था तथा उसे अन्य चार दोस्तों के साथ मिलकर अपने हवस का शिकार बनाया था। घटना को अंजाम देने के बाद सभी फरार हो गए थे लेकिन मामला प्रकाश में आया और नगर थाना में सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। जिसके बाद सभी ने अपने आप को कानून के हवाले कर दिया था।












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