Parsa Election 2025: परसा का चुनावी दंगल, RJD के छोटे लाल VS JDU के चंद्रिका राय, क्या बदलेगा मतदाताओं का मूड?
Parsa Assembly Constituency Election 2025: बिहार की राजनीति हमेशा से सामाजिक समीकरणों, जातीय संतुलन और परिवारवाद के इर्द-गिर्द घूमती रही है। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसे ही दिलचस्प मुकाबले देखने को मिलेंगे। इन्हीं में से एक सीट है - परसा विधानसभा क्षेत्र।
यह सीट सिर्फ एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि राजनीतिक विरासत, पारिवारिक टकराव और सियासी रणनीति का बड़ा केंद्र बन चुकी है। फिलहाल इस सीट से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता छोटे लाल राय विधायक हैं और तेजस्वी यादव के करीबी माने जाते हैं। संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। पूरी संभावना है कि पार्टी इन्हें फिर से टिकट दे। परसा सीट पर अब तक का ट्रेंड बताता है कि यादव समुदाय के उम्मीदवारों का वर्चस्व रहा है, जो इसे जातिगत राजनीति की एक अहम मिसाल बनाता है।

इस सीट का इतिहास भी खासा दिलचस्प रहा है। अब तक यहां 18 बार चुनाव हो चुके हैं, जिनमें से 14 बार जीत बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय और उनके परिवार के हिस्से आई है। ऐसे में आइए जानें परसा सीट की रिपोर्ट?
परसा सीट: 2025 के संभावित उम्मीदवार
🔴 राजद (RJD) छोटे लाल राय को फिर से टिकट मिलने की पूरी उम्मीद है।
🔵 जनता दल यूनाइटेड (JDU): चंद्रिका राय -नीतीश कुमार के विश्वस्त और अनुभवी नेता। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार फिर से मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय, तेज प्रताप यादव की पूर्व पत्नी हैं, जिससे ये चुनाव राजनीतिक के साथ-साथ व्यक्तिगत टकराव का रंग भी ले सकता है।
🟠 भारतीय जनता पार्टी (BJP): NDA गठबंधन के तहत सीट JDU को ही जाने की संभावना है।
🟡 कांग्रेस / अन्य दल: कांग्रेस या छोटे क्षेत्रीय दलों का यहां खास प्रभाव नहीं रहा है। ऐसे भी ये सीट महागठबंधन में RJD के खाते में जाएगी। मुकाबला मुख्यत RJD बनाम JDU के बीच ही दिख रहा है।
परसा विधानसभा सीट का परिचय
- जिला: सारण
- लोकसभा क्षेत्र: सारण
- आरक्षण: सामान्य
- वोटर संख्या: लगभग 3.25 लाख
- प्रमुख मतदाता वर्ग: यादव, राजपूत, ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम
- सबसे पहले चुनाव: 1952 में चुनाव हुआ था
परसा विधानसभा सीट का इतिहास
बिहार की परसा विधानसभा सीट ने भी देश के पहले आम चुनाव के साथ ही 1952 में अपने लोकतांत्रिक सफर की शुरुआत की। इस ऐतिहासिक चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता दरोगा प्रसाद राय ने जीत दर्ज की। उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी के धरीक्षण राय को 6,502 वोटों से हराकर सीट अपने नाम की। दरोगा प्रसाद राय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनके बेटे चंद्रिका राय भी कई बार विधायक रह चुके हैं। 2015 में चंद्रिका राय RJD के टिकट पर विधायक बने थे। 2020 में उन्होंने पाला बदलकर JDU से चुनाव लड़ा, लेकिन RJD के छोटे लाल राय से हार गए।
इसके बाद 1957, 1962, 1967, 1969 और 1972 -लगातार पांच विधानसभा चुनावों में दरोगा प्रसाद राय ने कांग्रेस के टिकट पर परसा सीट से जीत का परचम लहराया।
- 1957 में दरोगा प्रसाद राय ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (PSP) के सुखदेव नारायण सिंह को 7,538 वोटों से शिकस्त दी।
- 1962 में दरोगा प्रसाद राय ने PSP के ही महेंद्र सिंह को 5,325 वोटों से हराया।
- 1967 में दरोगा प्रसाद राय ने संघटा सोशलिस्ट पार्टी के वाई. प्रसाद को 5,573 वोटों से पराजित किया।
- 1969 में दरोगा प्रसाद राय ने निर्दलीय उम्मीदवार निरंजन प्रसाद सिंह को 7,793 वोटों से मात दी। यही वह चुनाव था, जिसके बाद दरोगा प्रसाद राय को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया।
- 1972 के चुनाव में, दरोगा प्रसाद राय ने अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार रामानंद प्रसाद यादव को 23,633 वोटों के बड़े अंतर से हराया।
- इन चुनावों के नतीजे यह साफ दिखाते हैं कि 1950 और 70 के दशक में परसा सीट पर दरोगा प्रसाद राय का जबरदस्त राजनीतिक दबदबा था और उन्होंने इस क्षेत्र को कांग्रेस का मजबूत गढ़ बना दिया था।
RJD बनाम JDU: पारिवारिक मुकाबला बनाम सियासी वर्चस्व
2025 में परसा का मुकाबला सिर्फ दो पार्टियों का नहीं, बल्कि द्रोह बनाम जवाब का है। एक तरफ हैं RJD के छोटे लाल राय, जो स्थानीय प्रभाव और यादव वोट बैंक पर भरोसा करते हैं। दूसरी ओर हैं चंद्रिका राय, जो अपने पिता की राजनीतिक विरासत, प्रशासनिक अनुभव और तेज प्रताप से जुड़े विवाद को मुद्दा बना सकते हैं। परसा सीट 2025 का सबसे हाई-वोल्टेज सीटों में से एक बन सकती है। यहां सिर्फ राजनीतिक पार्टियों की नहीं, दो राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे चुनती है - पुराने अनुभव को या नए समीकरण को?












Click it and Unblock the Notifications