मां-बाप चाहते हैं इनके चारों बच्चे मर जाएं या फिर मार दिए जाएं
पिता का कहना है कि सुविधाओं के लिए हम लोग चक्कर लगा-लगाकर थक गए लेकिन ना तो किसी प्रकार की कोई सुविधा मिली और ना ही कोई आश्वासन।
पटना। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि अमीर हो या गरीब, कोई भी अपने बच्चे से सबसे ज्यादा प्रेम करता है और खुद भूखा रहकर अपने बच्चों का पेट भरता है। मां-बाप अपने बच्चों की लंबी उम्र की कामना देवी-देवताओं से करते हैं। लेकिन बिहार के इस गांव का रहने वाला एक परिवार अपने चारों बच्चों की मौत के लिए भगवान से गुहार लगा रहा है। क्योंकि इन लोगों से अपने बच्चों का दर्द देखा नहीं जा रहा है।

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिरकार मां-बाप ही क्यों अपने बच्चों की मौत की गुहार लगा रहे हैं तो हम आपको बता दें कि ये मामला बिहार के बगहा के अवसानी गांव का है। जहां गरीबी से मजबूर और सरकारी सिस्टम से तंग आकर लल्लन और उनकी पत्नी दुलारी अपने चारों बच्चों की मौत की दुआ मांग रही है। क्योंकि उनका कहना है कि हमारे चारों बच्चे जन्म से ही विकलांग और अंधे हैं। गरीबी से मजबूर और सरकारी सुविधाओं के अभाव में घुट-घुटकर जी रहे अपने बच्चों को देखकर ये परिवार दर्द में है।

जब इस विषय में बच्चे की मां दुलारी देवी से बातचीत की गई तो उसने कहा कि हमारी शादी साल 2001 में हुई थी। हमारी पहली संतान 2003 में जन्मी लेकिन जन्म के बाद उसकी आंखों की रोशनी चली गई। देखते ही देखते एक दो नहीं बल्कि 4 बच्चे हुए पर सभी जन्म से अंधे और विकलांग हैं। पहले नजदीकी अस्पताल में जाकर हमने सभी के इलाज की बात की लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक इनके इलाज में काफी सारे पैसे लगेंगे जो हमारे पास नहीं थे और बच्चों की हालत हम लोगों से देखी नहीं जा रही थी। धीरे-धीरे बच्चे बड़े होते चले गए और अब हालात ऐसे हैं कि खुद से ये चारों बच्चे अपने दैनिक काम भी नहीं कर सकते। मां-बाप का कहना है कि ऐसे में इनका जिंदा रहना और जिल्लत भरी जिंदगी जीना हम लोगों से बर्दाश्त नहीं होता। इसलिए हम लोग उनकी इच्छा मृत्यु मांग रहे हैं।

वहीं बच्चे के पिता लल्लन ने बताया कि सरकारी कार्यालयों में गरीब और विकलांगों के लिए दी जाने वाली सुविधाओं के लिए हम लोग चक्कर लगा-लगाकर थक गए लेकिन ना तो किसी प्रकार की कोई सुविधा मिली और ना ही कोई आश्वासन। किसी तरह मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का पेट चला रहा हूं। ऐसी में 4 विकलांग बच्चों को पालना मुसीबत भरा है। विकलांगों के लिए दी जाने वाली पेंशन का आवेदन हमने सरकारी कार्यालय में भी दिया पर आज तक हमें पेंशन के लिए स्वीकृत नहीं मिली। अब हालात ऐसे हैं कि सरकारी कार्यालय में मदद के लिए जाने पर अधिकारी मुंह फेर लेते हैं तो गांव वाले बच्चों के साथ-साथ हमें भी चिढ़ाने लगते हैं। ऐसे में हमारे बच्चे की जिंदगी कैसे कटेगी यही चिंता सताती है? इसीलिए हम लोग इनकी मृत्यु के लिए गुहार लगा रहे हैं।
वहीं जब इस गरीब और मजबूर परिवार के बारे में वहां के अधिकारियों से बातचीत की गई तो उन्होंने मदद का आश्वासन देते हुए कहा कि जल्द ही इन्हें सरकारी मदद दी जाएगी। अब देखना ये होगा कि यहां के रहने वाले लल्लन के चारों बच्चे फिर से दुनिया देख सकते हैं या नहीं।












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