'लोग क्या कहेंगे की सोच बदलो', छात्रों के सुसाइड केसों पर बोले वायरल शिक्षक जितेंद्र शार्दुल, Exclusive
Teachers Day Exclusive: बिहार के सबसे चर्चित शिक्षक जितेंद्र शार्दुल ने 'शिक्षक दिवस' पर 'वनइंडिया' से खास बातचीत में शिक्षा, समाज और बच्चों के बारे में खुलकर बातें की। उन्होंने कहा कि 'समाज और देश तभी प्रगति कर सकता है, जब बच्चों को सही शिक्षा मिलेगी।'

जमुई जिले के सदर मुख्यालय क्षेत्र के कल्याणपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पढ़ाने वाले जितेंद्र शार्दुल अपने खास अंदाज के लिए काफी लोकप्रिय हैं, वो बच्चों को कविताएं गाकर और डांस करके याद करवाते हैं। उनके निराले अंदाज के कई वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए हैं और इसी वजह से लोग उन्हें 'वायरल शिक्षक' के नाम से संबोधित करते हैं।
छात्रों को पढ़ाने के लिए एक स्मार्ट क्लास बनवाई
उन्होंने सरकारी स्कूल में छात्रों को पढ़ाने के लिए एक स्मार्ट क्लास बनवाई है, जिसके लिए उन्होंने अपनी सैलरी से पैसे खर्च किए हैं। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 'पैसा तो आता-जाता रहता है लेकिन किसी बच्चे का बचपन लौटकर नहीं आता है।'
'इसलिए मैंने अपनी सैलरी के पैसे खर्च कर दिए'
'मैं चाहता था कि बच्चे स्कूल पढ़ने आएं लेकिन स्कूल में बच्चों के लिए उचित व्यवस्था नहीं थी तो मुझे लगा कि क्लास को बच्चों के लिए आकर्षित बनाना होगा और इसलिए मैंने अपनी सैलरी के पैसे खर्च कर दिए। उन्होंने कहा कि मुझे बच्चों से प्यार है, अगर इनका भविष्य सुधर गया तो निश्चित तौर पर देश और समाज में भी सुधार होगा।'
आखिर क्यों बच्चे डिप्रेशन में चले जा रहे हैं?
इन दिनों कोटा में बच्चों की सुसाइड की खबरें काफी बढ़ गई हैं, इस बारे में जब जितेंद्र शार्दुल से पूछा गया कि वो इसके पीछे कौन सी वजह मानते हैं? आखिर क्यों बच्चे डिप्रेशन में चले जा रहे हैं?
'अरे डॉ नहीं बने या इंजीनियर नहीं बने तो...'
तो इस पर जितेंद्र शार्दुल ने कहा कि 'मेरी बेटी खुद कोटा पढ़ने गई है, मैं कभी भी उससे ये सवाल नहीं करता कि उसे कितने नंबर मिले, उस पर कभी भी एग्जाम का प्रेशर नहीं बनाता, उल्टा मैं उससे कहता हूं कि तुम मुझे मजेदार रील बनाकर भेजो, तुम्हें प्रेशर लेने की जरूरत नहीं है, अरे डॉ नहीं बने या इंजीनियर नहीं बने तो क्या जिंदगी यहीं खत्म हो जाएगी।'
'जो चीज आपका बच्चा नहीं कर सकता है...'
उन्होंने कहा कि' न्यूज में आया था कि एक बच्चे ने सुसाइड कर लिया, उसे वहां पर कोचिंग करते हुए मात्र चार महीने ही हुए थे, अब आप बताइए कि 'क्या कोई कोर्स वाला किसी बच्चे पर केवल चार महीने में इतना प्रेशर डाल पाएगा? या तो उस बच्चे को उस मां-बाप ने जबरदस्ती साइंस दिलाकर भेजा होगा या फिर उस पर नंबर का दवाब होगा? जो चीज आपका बच्चा नहीं कर सकता है, उसे आप जबरदस्ती करा रहे हैं।'
'लोग क्या कहेंगे की सोच को बदले मां-बाप'
'मोहल्ला वाला क्या बोलेगा, अरे उसका बेटा बन गया तो तुम क्यों नहींं? इसी चक्कर में मां-बाप बच्चों पर दवाब बनाते हैं और इसी के चलते बच्चे गलत कदम उठा लेते हैं। बच्चों के साथ मां-बाप को भी चीजें समझनी होंगी, जिंदगी यहीं खत्म नहीं होती हैं, हर बच्चा अलग होता है, 'लोग क्या कहेंगे' कि मानसिकता से इंसान को बाहर निकलना होगा और बच्चों को अपने फैसले खुद लेने के लिए सक्षम बनाना होगा। '
यहां देखें पूरा इंटरव्यू












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