Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Parbatta Assembly Seat: बाढ़, बेरोजगारी, जातीय ध्रुवीकरण के बीच परबत्ता में कौन मारेगा बाज़ी? समझिए समीकरण

Parbatta Assembly Seat: बिहार के खगड़िया ज़िले की 151-परबत्ता विधानसभा सीट 2025 के चुनाव में फिर से राजनीतिक गर्मी का केंद्र बनने जा रही है। गंगा के किनारे बसे इस इलाक़े में जहां खेती और बाढ़ जीवन का हिस्सा है।

राजनीति में लगातार बदलाव और समीकरणों की उठापटक ने इसे सियासी रूप से बेहद संवेदनशील बना दिया है। नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव की खींचतान, जातीय ध्रुवीकरण और स्थानीय मुद्दों की अनदेखी - यही परबत्ता की चुनावी कहानी है।

Parbatta Assembly Seat

राजनीतिक परिदृश्य और उम्मीदवारों की संभावनाएं:
राजद (RJD - महागठबंधन):

संभावित उम्मीदवार: रणवीर यादव या बिंदु देवी, राजद 2020 में यहां दूसरे नंबर पर रही थी। यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण के सहारे वापसी की कोशिश, लेकिन पिछले कार्यकाल की निष्क्रियता पर जनता में नाराजगी भी है।

जदयू (JDU):
संभावित उम्मीदवार: बाबूधन मंडल (वर्तमान विधायक), 2020 में महज 951 वोटों से जीत मिली थी। बाबूधन मंडल को कोइरी और EBC वोटों का समर्थन मिला, लेकिन जनसंपर्क में कमी को लेकर आलोचना भी है।

एनडीए (BJP+RLJP+LJP Ram Vilas):
संभावित उम्मीदवार: LJP (रा.) की तरफ से उम्मीदवार हो सकता है यदि गठबंधन फॉर्मुला वैसा ही रहा जैसा 2024 लोकसभा में था। 2024 लोकसभा में लोजपा (रा.) को इस क्षेत्र में 33 हजार वोटों की बढ़त मिली थी, जिससे उन्हें अब यहां विधानसभा दावेदारी का आत्मविश्वास है।

जन सुराज (Prashant Kishor):
संभावित उम्मीदवार: स्थानीय शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता या युवा चेहरा
जन सुराज ने ग्रामीण युवाओं और शिक्षित वर्ग में कुछ पकड़ बनाई है, लेकिन संगठन अभी चुनाव जिताऊ स्तर पर नहीं दिखता।

मतदाता और जातीय गणित:
कुल मतदाता (2024): 3,22,082

मुस्लिम मतदाता: 11.8%

अनुसूचित जाति (SC): 6.96%

शहरी मतदाता: 8.47% (बहुत कम)

जाति समूह अनुमानित प्रतिशत
यादव 22-24%
कोइरी/कुशवाहा 18-20%
मुस्लिम 11.8%
दलित (SC) 7%
अति पिछड़ा वर्ग (EBC - मल्लाह, नोनिया आदि) 20%+
सवर्ण 5-7%

इस समीकरण में राजद को MY (मुस्लिम-यादव) का फायदा है, जबकि जदयू EBC + कोइरी और BJP सवर्ण + दलित को साधने की कोशिश में है। जन सुराज इन वर्गों में सेंध लगाने की कोशिश में है।

जनता की मुख्य समस्याएं:
हर साल की बाढ़ और कटाव:कोसी और गंगा के किनारे बसे गांवों में बाढ़ से तबाही होती है, लेकिन कोई स्थायी राहत योजना नहीं।

कृषि संकट और सिंचाई की कमी: इलाके की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है लेकिन सरकारी योजनाएं जमीन पर नहीं दिखतीं।

सड़क और पुलों की जर्जर हालत: गाँवों को शहरों से जोड़ने वाले रास्ते अब भी बदहाल हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर, दवाइयाँ और जांच सुविधाएं नहीं हैं।

शिक्षा व्यवस्था कमजोर: सरकारी स्कूलों में टीचर नहीं, संसाधनों की भारी कमी।

बेरोजगारी और पलायन: युवाओं में भारी बेरोजगारी, रोज़गार के अवसर नहीं हैं।

राजनीति की दिशा और संभावित नतीजे:
परबत्ता 2025 में तीर और लालटेन के बीच सीधी टक्कर संभव है, लेकिन अगर लोजपा (रा.) को यह सीट मिलती है तो मुकाबला त्रिकोणीय होगा। PK की पार्टी जन सुराज भी समीकरण को प्रभावित कर सकती है, लेकिन जीत के लिए उन्हें ज़मीनी पकड़ मज़बूत करनी होगी।

यदि महागठबंधन में सीट बंटवारा विवाद हुआ या VIP जैसे दलों को यहां जगह मिली, तो समीकरण और भी उलझ सकते हैं। RJD को वोटों का ध्रुवीकरण रोकना होगा, जबकि JDU को अपने विधायक के कार्यकाल की समीक्षा करनी होगी।

किसे मिलेगी परबत्ता की गद्दी?
परबत्ता विधानसभा सीट एक बार फिर बिहार की राजनीति में बड़ी अहम भूमिका निभाएगी। यह सिर्फ जातीय वोटों का खेल नहीं, स्थानीय विकास बनाम जातिवाद का भी इम्तिहान होगा। जो पार्टी जनता के दिल तक पहुँचेगी और बाढ़, बेरोजगारी, शिक्षा जैसे मुद्दों पर भरोसेमंद रोडमैप देगी - परबत्ता की गद्दी उसी को मिलेगी।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+