Pappu Yadav Case: क्या है 35 साल पुराना केस? बना पप्पू यादव के गले की फांस-देर रात पिस्टल लेकर पहुंची पुलिस
Pappu Yadav Case: बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव उर्फ राजेश रंजन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह है 35 साल पुराना एक धोखाधड़ी का केस, जिसमें पुलिस आधी रात को उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची। यादव ने इसे साजिश बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सुरक्षा की मांग की है। आइए जानते हैं इस पुराने मामले की पूरी कहानी और पुलिस की कार्रवाई के पीछे की वजह...

केस की जड़: 1995 की शिकायत
यह विवाद साल 1995 का है, जब पटना के गर्दनीबाग थाने में विनोद बिहारी लाल नामक व्यक्ति ने एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि पप्पू यादव और उनके सहयोगियों ने धोखाधड़ी से उनका मकान किराए पर लिया। मकान मालिक का दावा है कि किराए पर लेते समय यह जानकारी छिपाई गई कि यहां सांसद का कार्यालय चलाया जाएगा। इससे मकान का इस्तेमाल बदल गया और विवाद खड़ा हो गया।
मामला धोखाधड़ी और संपत्ति से जुड़े धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। तब से यह केस पटना की अदालतों में लंबित पड़ा है, लेकिन अब जाकर इसमें तेजी आई है।
कोर्ट की सख्ती और पुलिस की कार्रवाई
पिछले 35 सालों में यह केस कई बार सुनवाई के लिए आया, लेकिन पप्पू यादव की ओर से बार-बार अनुपस्थिति दर्ज की गई। कोर्ट ने कई समन जारी किए, लेकिन यादव पेश नहीं हुए। आखिरकार, अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए यादव समेत सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए।
इसी आदेश के तहत बिहार पुलिस ने शुक्रवार रात (6 फरवरी 2026) को कार्रवाई शुरू की। सिविल ड्रेस में पुलिस टीम यादव के पटना आवास पर पहुंची और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की। यादव ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर इसे 'मारने की साजिश' बताया और कहा कि पुलिस अपराधियों जैसा सुलूक कर रही है। हालांकि, गिरफ्तारी नहीं हो सकी और अब मामले की अगली सुनवाई 7 फरवरी को होगी।
पप्पू यादव का पक्ष और राजनीतिक कोण
पप्पू यादव का कहना है कि यह पुराना केस है, जिसमें उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी थी। उन्होंने इसे नीट छात्रा मौत मामले से जोड़ते हुए कहा कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश हो रही है। यादव नीट छात्रा के न्याय के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं और बिहार सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, 'पुलिस को मुझसे डर है, लेकिन मैं न झुकूंगा न चुप रहूंगा।'
वहीं, पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ कोर्ट के आदेश का पालन है। कोई राजनीतिक साजिश नहीं है। लेकिन विपक्ष इसे नीतीश सरकार की बदले की कार्रवाई बता रहा है।
आगे क्या?
सबकी नजरें अब 7 फरवरी की सुनवाई पर टिकी हैं। क्या पप्पू यादव कोर्ट में आत्मसमर्पण करेंगे या उनकी कानूनी टीम जमानत या राहत के लिए याचिका दाखिल करेगी? यह केस यादव की राजनीतिक छवि पर भी असर डाल सकता है, खासकर जब वे निर्दलीय सांसद के रूप में सक्रिय हैं। मामले की जांच जारी है और नए खुलासे होने की संभावना बनी हुई है।
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