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Bihar Chunav 2025: RJD की सरकार बनने के संकेत, टेंशन में NDA, योगी सरकार के मंत्री के बयान से उड़ी BJP की नींद

Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और आख़िरी चरण का प्रचार थम गया है, लेकिन सियासी बयानबाज़ी अपने चरम पर है। इस बीच उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री और NDA सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर का बयान राजनीतिक हलचल मचा गया है।

ओपी राजभर ने कहा है कि अगर बिहार में वोटिंग 60 प्रतिशत से ऊपर हुई, तो महागठबंधन की सरकार बनना तय है। उनका यह बयान मतदान से पहले NDA के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। राजभर ने कहा कि "जब जनता ज्यादा संख्या में वोट डालने निकलती है, तो यह सत्ता के खिलाफ माहौल का संकेत होता है।

राजद की बनेगी सरकार!
इस बार अगर मतदान प्रतिशत ऊँचा रहा, तो बिहार में लालू यादव और तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सरकार बनने की पूरी संभावना है।" राजभर के इस बयान के बाद NDA खेमे में बेचैनी बढ़ गई है, जबकि महागठबंधन खेमे में इसे मनोबल बढ़ाने वाला संदेश माना जा रहा है।

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर भी निशाना
ओम प्रकाश राजभर ने इस दौरान बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री सभी हिंदू हैं, तो फिर धर्म संकट कहां है। उनके मुताबिक आजकल साधु-संत नेतागीरी करने लगे हैं और चर्चाओं में आने के लिए ड्रामा करते हैं। उन्होंने तंज कसा कि "ये लोग बाद में राजनीतिक दलों में शामिल होकर सांसद बन जाते हैं, जैसे साक्षी महाराज और चिन्मयानंद।"

राजभर के इस बयान ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर बहस छेड़ दी है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान न सिर्फ NDA की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि गठबंधन के भीतर असहमति और मतभेद गहराते जा रहे हैं।

कई सीटों पर उतारे प्रत्याशी
बिहार में इस बार ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुभासपा ने कई सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। इनमें से लगभग 34 सीटें दूसरे चरण में आती हैं, जहां मतदान 11 नवंबर को होना है। राजभर के बेटे डॉ. अरविंद राजभर और अरुण राजभर भी इन चुनावों में सक्रिय हैं और कई मौकों पर NDA के खिलाफ प्रचार कर चुके हैं। यह स्थिति NDA के लिए कठिन हो सकती है क्योंकि सुभासपा का प्रभाव सीमित होते हुए भी कई सीटों पर समीकरण बिगाड़ने की क्षमता रखता है।

पूर्वांचल से सटे जिलों जैसे सिवान, गोपालगंज, छपरा, कैमूर, बक्सर और भभुआ में सुभासपा के प्रत्याशी EBC, MBC, बिंद, राजभर और नट समुदाय के वोटों में सेंध लगा सकते हैं। इन समुदायों के वोट अगर बंटते हैं, तो RJD या VIP जैसी पार्टियों को इसका लाभ मिल सकता है। ऐसे में राजभर का बयान न केवल एक "राजनीतिक भविष्यवाणी" है, बल्कि यह संकेत भी है कि NDA के अंदर एकता की तस्वीर उतनी मजबूत नहीं जितनी दिखाई जा रही है।

वोटिंग प्रतिशत बढ़ना परिवर्तन के संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर वोटिंग प्रतिशत वाकई 60 फीसदी से अधिक पहुंचा, तो यह परिवर्तन की लहर का संकेत होगा। इस स्थिति में महागठबंधन की स्थिति मजबूत हो सकती है और राजभर का दावा सही साबित हो सकता है। वहीं अगर NDA अपने पारंपरिक वोट बैंक को संभालने में सफल रहता है, तो मुकाबला बेहद करीबी रह सकता है।

अब सबकी निगाहें 11 नवंबर के मतदान और 14 नवंबर के नतीजों पर टिकी हैं। ओम प्रकाश राजभर का यह बयान इस चुनाव को और दिलचस्प बना गया है। बिहार की राजनीति में एक बार फिर यह सवाल उठ गया है - क्या वाकई 2025 में फिर से सत्ता परिवर्तन होगा?

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