OMG! 2002 में त्याग दिया था अन्न, नहीं खाते हैं अनाज का एक भी दाना, जानिए कौन हैं फलाहारी बाबा
Omg, Siwan News: इंसान अगर एक दिन खाना नहीं खाता है तो बेचैन होने लगता है, कमज़ोरी महसूस होने लगती है। कई दिनों तक खाना छोड़ देने से तो मौत तक हो जाती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने करीब 22 सालों से अन्न त्याग रखा है। वह अनाज खाते ही नहीं हैं और पूरी तरह से स्वस्थ्य हैं।
आप भी सोच रहे होंगे की बिना अनाज खाए ज़िंदा रहना कैसे मुमकिन है, तो चलिए जानते है बिहार के सीवान ज़िला से ताल्लुक रखने वाले 45 वर्षीय 'फलाहारी बाबा' के बारे कैसे उन्होंने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। चंदन दास महाराज सीवान के नवका टोला के निवासी हैं। उन्होंने साल 2002 में ही अन्न त्याग दिया था।

चंदन जी दास महाराज को अनाज त्यागने के बाद परेशानी तो ज़रूर हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने बिना अन्न खाए रहने की आदत को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया। इसके बाद उन्होंने अन्न की जगह फल खाने की आदत डाली और आज तक वह अनाज का दाना छूते तक नहीं हैं। फल खाकर ही चुस्त और दुरुस्त हैं।
फल के ज़रिए अनाज की भूख को ख़त्म करे देने वाले चंदन दास महाराज को लोग इसी वजह से 'फलाहारी बाबा' की संज्ञा देते हैं। चंदन दास महाराज की मानें तो शुरुआत में वह नॉर्मल ज़िंदगी जी रहे थे, करीब दो दशक पहले उन्हें मां दुर्गा ने साक्षात दर्शन देते हुए उनकी आराधना की बात कही थी।
चंदन दास महाराज ने बताया कि सपने में उन्हें मां दुर्गा ने कौड़ी कामाख्या का रुख करने के लिए कहा था। इसके बाद ही उन्होंने साल 2002 में कौड़ी कामाख्या मां की साधना करने चले गए। वहां से सिद्धि हासिल कर वापिस सीवान लौटे और मां दुर्गा की आराधना में लग गए।
मां दुर्गा की आराधना की वजह से ही उन्होंने अन्न को त्याग दिया, सुबह और शाम खाने में फल का ही इस्तेमाल करते हैं। अनाज का एक दाना तक नहीं खाते हैं, लोगों इस बात से ही हैरानी हो रही है कि बिना अनाज खाए ज़िंदा रहना कैसे मुमकिन है। स्थानीय लोगों ने कहा कि फलाहारी बाबा पर मां की कृपा है, इसलिए वह बिना अन्न ग्रहण किए ज़िंदा हैं।












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