OI Exclusive: 'यतीम बच्चे, विधवा महिलाएं, सैकड़ों की मौत और मातम', ‘ज़हरीली शराब कांड’ की काली सच्चाई
Bihar Sharab Kaand: बिहार में क़ागज़ों पर शराबबंदी ज़रूर है लेकिन ज़मीन पर खुलेआम शराब की बिक्री हो रही है। डोर टू डोर होम डिलिवरी हो रही है। प्रदेश के कई ज़िलों में ज़हरीली शराब के सेवन से लोगों की मौत की ख़बर आए दिन पढ़ने को मिलती है। ताजा मामला बिहार के सारण और सिवान ज़िले का है, जहां कई लोगों की ज़हरीली शराब के सेवन से मौत हो गई।
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शराबबंदी की ज़मीनी हक़ीक़त जानने वन इंडिया हिंदी की टीम सारण और सिवान ज़िला पहुंची। मामले की तह तक जाने की कोशिश की कि आखिर बिहार में शराबबंदी क्यों फेल है। ज़हरीली शराब कहां से आ रही है और शराब की होम डिलिवरी कैसे हो रही है। क्या पुलिस प्रशासन मूकदर्शक है, माफियाओं पर लगाम क्यो नहीं कसा जा रहा है। वीडियो में देखिए ग्रामीणों ने क्या कुछ कहा?

ज़हरीली शराब से हुई लोगों की मौत मामले की तहतक जाने के बाद कई हैरतअंगेज़ खुलासे हुए। वन इंडिया हिंदी के कैमरे पर स्थानीय लोगों ने बताया कि किस तरह से शराबबंदी है और कैसे शराब की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में ही शराब बनती है। स्थानीय लोगों का दावा है की ज़हरीली शराब पीने से सैकड़ों मौत हुई है, लेकिन आंकड़ों में कम बताया जा रहा है।
पुलिस को शिकायत करने के बाद आरोपी को पकड़ा ज़रूर जाता है लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं होती है। शराब माफियाओं को ग्रामीणों के सामने पकड़ लेती है, कुछ दूर ले जाने के बाद छोड़ दिया जाता है। शराब जहां बनती है, वहां का पता भी उन्हें मालूम है लेकिन कार्रवाई नहीं की जाती है।
शराब माफियों द्वारा चौकीदार से लेकर जिला पदाधिकारी तक को कमीशन पहुंचता है। नितीश कुमार ने शराबबंदी की है तो, पूरी तरह से इसे लागू करें। यह सिर्फ कागज़ों में बंद है, हक़ीक़त में चालू है। सरकार को चाहिए कि शराब की बिक्री चालू कर दी जाए, ताकि लोग ज़हरीली शराब के सेवन से बच सकें।
शराब की लत छूटने वाली नहीं है, शराबी शराब का सेवन करेंगे ही, चोरी छिपे शराब पीते हैं। शराब बंदी की आड़ में पुलिस का फ़ायदा हो रहा है। सरकार कहती है, महिला हित में शराब बंदी की गई है, जहरीली शराब पीने से किसी का भाई मरा, किसी का पिता मरा और किसी के पति की मौत हुई।
शराबबंदी रहे या चालू रहे शराब पीने वाले शराब पी ही रहे हैं, इससे नुकसान तो महिला का ही है। पुलिस शराबबंदी की आड़ में कमाई कर रही है, आम लोगों को झूठे केस में फंसा कर जबरन उगाही हो रही है। इस मामले में निष्पक्ष और हाई लेवल जांच की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। शराब बनाने वालों का नाम पता सब मालूम है, बताने के बाद भी ठोस क़दम नहीं उठाया जाता है।
ज़हरीली शराब पीने से जो शख्स मरा उसमे कोई रिक्शा चलाता था, तो कोई मज़दूरी करता था। बच्चे यतीम हो गए, महिलाएं विधवा हो गईं, जो ज़िंदा बचे उनके आंख की रोशनी चली गई। यह नज़ारा देख हर इंसान का दिल पसीज गया लेकिन सरकार अमलों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।












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