बिहार के इस मंदिर में गैर हिंदुओं का प्रवेश है वर्जित, 100 साल से लागू है नियम, गेट पर लगा है बोर्ड

पटना, अगस्त 23। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को गया जिले के दौरे पर थे। वहां उन्होंने विष्णुपद मंदिर में जाकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। नीतीश कुमार सीधे गर्भग्रह तक जा पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान की पूजा की, लेकिन उनके मंदिर में जाने को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, यह विवाद नीतीश कुमार के एक मुस्लिम मंत्री के मंदिर में जाने को लेकर है। उस मंत्री का नाम है इसराइल मंसूरी और वो नीतीश कुमार के साथ मंदिर के गर्भग्रह तक जा पहुंचे थे।

मंदिर को गंगाजल से धुलवाया गया

मंदिर को गंगाजल से धुलवाया गया

विवाद खड़ा होने के बाद मंदिर प्रशासन ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई और मंदिर के गर्भग्रह को गंगाजल से भी धुलवाया। साथ ही नीतीश से माफी की मांग की गई। यह सब तो विवाद से जुड़ी जानकारी थी, लेकिन अब हम आपको इस मंदिर के बारे में सबकुछ बताते हैं कि आखिर एक मुस्लिम के इस मंदिर में जाने को लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों हो गया?

जानिए विष्णुपद मंदिर के बारे में

जानिए विष्णुपद मंदिर के बारे में

आपको बता दें कि बिहार के गया जिले में फल्गू नदी के किनारे विष्णुपद मंदिर है, जिसका निर्माण 18वीं सदी में हुआ था। यह भगवान विष्णु का मंदिर है। इस मंदिर में पिंड दान की प्रक्रिया भी की जाती है। कहते हैं कि यहां श्राद्ध करने से पितरों की तृप्ति मिलती है। इस मंदिर की वैसे तो बहुत विशेषताएं हैं, लेकिन एक खास विशेषता जो है वो यह कि मंदिर में सिर्फ और सिर्फ हिंदुओं को ही प्रवेश करने की अनुमति है।

मंदिर के गेट पर बोर्ड भी लगा है

मंदिर के गेट पर बोर्ड भी लगा है

इस मंदिर में यह नियम पिछले 100 साल से लागू है कि यहां सिर्फ हिंदू श्रद्धालु ही दर्शन कर सकते हैं। गैर हिंदुओं का प्रवेश यहां वर्जित है। इसके लिए बकायदा मंदिर के गेट पर एक बोर्ड भी लगाया हुआ है, जिस पर लिखा है कि अहिंदु प्रवेश निषेध है। यह जानकारी बोर्ड पर हिंदी के अलावा अंग्रेजी, उर्दू और बंगाली भाषा में लिखी है।

मंदिर में भगवान विष्णु के हैं चरण चिन्ह्र

मंदिर में भगवान विष्णु के हैं चरण चिन्ह्र

आपको बता दें कि इस मंदिर के अंदर भगवान विष्णु का चरण चिह्न है जो ऋषि मरीची की पत्नी माता धर्मवत्ता की शिला पर है। राक्षस गयासुर को स्थिर करने के लिए धर्मपुरी से माता धर्मवत्ता शिला को लाया गया था, जिसे गयासुर पर रख भगवान विष्णु ने अपने पैरों से दबाया था। इसके बाद शिला पर भगवान के चरण चिह्न है। माना जाता है कि विश्व में विष्णुपद ही एक ऐसा स्थान है, जहां भगवान विष्णु के चरण का साक्षात दर्शन कर सकते हैं।

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