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Nitish Kumar: राज्यसभा में शुरू हुई सुशासन बाबू की नई पारी, 5 दशक, 10 बार CM की शपथ, नीतीश कुमार का सफरनामा

Nitish Kumar Political Journey Timeline: बिहार की मिट्टी ने भारतीय राजनीति को कई दिग्गज दिए, लेकिन 'सुशासन बाबू' के नाम से विख्यात नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का सफर सबसे निराला रहा है। जेपी आंदोलन की तपिश से निकले नीतीश कुमार ने आज राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले लिया है। राज्यसभा जाने के साथ ही के उन्होंने मानो अपने पांच दशक लंबे राजनीतिक जीवन का पूर्ण चक्र (Full Circle) पूरा कर लिया है।

1970 के दशक में पटना की सड़कों पर छात्र आंदोलन की मशाल थामने वाले नीतीश ने बिहार को उस दौर से बाहर निकाला जब राज्य अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहा था। 75 वर्ष की उम्र में संसद के उच्च सदन में उनकी यह नई पारी महज एक पद नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता के एक बड़े युग के परिवर्तन का संकेत है। आज जब वे राज्यसभा की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं, तो पूरा बिहार उनके उस सफर को याद कर रहा है जिसने राज्य की नियति और नीति दोनों को बदल दिया। एक नजर डालते हैं नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर पर-

Nitish Kumar Political Journey Timeline

Nitish Kumar Journey: शुरुआती दौर और राज्य राजनीति (1970 - 1988)

नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन की नींव बिहार के छात्र आंदोलनों में पड़ी, जहां उन्होंने नेतृत्व के गुण सीखे।

  • 1970 का दशक: छात्र राजनीति में सक्रिय हुए और जयप्रकाश नारायण (JP) के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से जुड़कर लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
  • 1985: हरनौत निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार बिहार विधानसभा के लिए चुने गए, जो उनके विधायी करियर की शुरुआत थी।
  • 1986-87: इस दौरान वे बिहार विधानसभा की याचिका समिति और सार्वजनिक उपक्रम समिति के सदस्य के रूप में सक्रिय रहे।

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नीतीश कुमार के दिल्ली का सफर, पहली बार बने केंद्रीय मंत्री (1989 - 1999)

राज्य की राजनीति में अपनी धाक जमाने के बाद नीतीश कुमार ने दिल्ली की ओर रुख किया और राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बनाई।

  • 1989: बाढ़ निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार लोकसभा सांसद निर्वाचित हुए और जनता दल (बिहार) के महासचिव बने।
  • 1990: केंद्र सरकार में कृषि और सहयोग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
  • 1991: दूसरी बार लोकसभा सदस्य बने; जनता दल के राष्ट्रीय महासचिव और रेलवे कन्वेंशन कमेटी के सदस्य नियुक्त।
  • 1993: कृषि संबंधी समिति के अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण कार्य किए।
  • 1994: वैचारिक क्रांति लाते हुए जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मिलकर समता पार्टी की स्थापना की।
  • 1996: तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीते और रक्षा संबंधी समिति के सदस्य बने।
  • 1998: चौथी बार लोकसभा पहुंचे; रेलवे और भूतल परिवहन के केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में बुनियादी ढांचे में बड़े सुधार किए।
  • 1999: पांचवीं बार लोकसभा चुनाव जीते और कृषि व रेलवे जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों को कुशलता से संभाला।

नीतीश कुमार में हाथों में बिहार की सत्ता (2000 - 2014)

साल 2000 के बाद का दौर नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री और विकास पुरुष बनने का गवाह बना।

  • 2000: पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, लेकिन बहुमत न होने के कारण इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद वे वापस केंद्र में कृषि मंत्री बने।
  • 2003: समता पार्टी और शरद यादव की पार्टी का विलय हुआ, जिससे जनता दल (यूनाइटेड) - JDU का गठन हुआ।
  • 2004: छठी बार लोकसभा (नालंदा सीट) के लिए निर्वाचित हुए और लोकसभा में JDU संसदीय दल के नेता बने।
  • 2005: 24 नवंबर 2005 को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता संभाली। यहीं से वे बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य भी बने।

Nitish Kumar: इस्तीफा, वापसी और गठबंधन का दौर (2014 - 2024)

पिछले एक दशक में नीतीश कुमार ने सिद्धांतों और परिस्थितियों के बीच तालमेल बिठाते हुए बिहार की कमान संभाले रखी।

  • 2014: लोकसभा चुनाव में हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और जीतन राम मांझी को सीएम बनाया।
  • 2015: 22 फरवरी 2015 को फिर से मुख्यमंत्री के रूप में वापसी की और महागठबंधन के साथ ऐतिहासिक चुनाव जीता।
  • 2017 - 2024: इस दौरान उन्होंने कई बार गठबंधन बदले-NDA से महागठबंधन और फिर NDA, लेकिन हर उतार-चढ़ाव के बावजूद मुख्यमंत्री की कुर्सी पर उनकी पकड़ बनी रही।

राज्यसभा सदस्य बनने के साथ शुरू हुआ नीतीश कुमार के जीवन का नया अध्याय (2026)

अब 2026 में नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक पारी को फिर से राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रित किया है। 10 अप्रैल 2026 को उन्होंने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले लिया है।

मार्च 2026: सक्रिय मुख्यमंत्री रहते हुए वे पहली बार उच्च सदन (राज्यसभा) के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए।

30 मार्च 2026: बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से उन्होंने आधिकारिक इस्तीफा दिया।

10 अप्रैल 2026: 75 साल की उम्र में राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत की।

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री पद से उनके संभावित इस्तीफे और दिल्ली में किसी बड़ी राष्ट्रीय भूमिका को लेकर अटकलें बेहद तेज हैं। यह 50 साल का सफर दिखाता है कि कैसे एक छात्र नेता 6 बार सांसद और सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने के बाद अब भारतीय लोकतंत्र के अपर हाउस में अपनी जगह बना चुका है।

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With AI Inputs

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