Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

CM Nitish Oath Ceremony: 20 साल की 'बिहार सियासत', क्यों हर सत्ता परिवर्तन का केंद्र सिर्फ नीतीश कुमार ही बने?

CM Nitish Oath Ceremony: पिछले दो दशकों में बिहार की राजनीति कई मोड़ों से गुजरती रही, लेकिन एक नामनीतीश कुमार लगातार सत्ता के केंद्र में मौजूद रहा। गठबंधन बदले, राजनीतिक समीकरण बदले, विरोधी बदलते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री पद की कुर्सी लगभग हमेशा नीतीश के पास ही रही।

2025 में 10वीं बार शपथ लेने के बाद वह देश के पहले नेता बन जाएंगे, जिन्होंने इतने बार मुख्यमंत्री पद संभाला। यह स्थिति बताती है कि बिहार की राजनीति अब दल आधारित कम और व्यक्तित्व आधारित ज्यादा हो चुकी है, जिसका केंद्र सिर्फ एक नेता नीतीश कुमार है।

Nitish Kumar Oath Ceremony

2005: लालू राज का अंत और नई सियासत की शुरुआत
2005 का चुनाव बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव लेकर आया। लालू परिवार के 15 साल लंबे शासन का अंत हुआ और जेडीयू-बीजेपी गठबंधन ने सत्ता हासिल की। जेडीयू सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और नीतीश पहली बार मुख्यमंत्री बने। इसी चुनाव ने बिहार की सत्ता का "नीतीश युग" शुरू किया, जिसने अगले 20 वर्षों तक अपनी पकड़ बनाए रखी।

2010: 'सुशासन बाबू' की पहचान और अभूतपूर्व चुनावी जीत
2010 तक नीतीश विकास, कानून व्यवस्था और शासन सुधारों के प्रतीक बन चुके थे। महिलाओं के लिए 50% आरक्षण, सड़क निर्माण, अपराध पर लगाम, इन सबने उनकी छवि मजबूत की। जेडीयू-बीजेपी गठबंधन को रिकॉर्ड जीत मिली। सीटें भले अधिक बीजेपी की हों, पर मुख्यमंत्री पद नीतीश को ही मिला। यहीं से यह संकेत स्पष्ट हो गया कि बिहार में बीजेपी भी नीतीश के नेतृत्व को चुनौती नहीं देना चाहती।

2014-15: इस्तीफे के बाद वापसी और सत्ता पर पकड़ का संकेत
2014 लोकसभा चुनाव में भारी हार के बाद नीतीश ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया और जीतनराम मांझी को गद्दी सौंप दी। लेकिन महज 9 महीने बाद वे फिर सत्ता में लौट आए। इससे यह स्पष्ट हो गया कि चाहे वे कभी पद पर रहें या न रहें, सत्ता का असली नियंत्रण उनके पास ही रहता है।

2015: धुर विरोधियों के साथ गठबंधन और 2017 की बड़ी पलटी
2015 में नीतीश ने राजनीति की सबसे दिलचस्प चाल चली। RJD-कांग्रेस के साथ गठबंधन कर उन्होंने बीजेपी को सत्ता से दूर कर दिया। लेकिन यह गठबंधन दो साल भी टिक नहीं पाया और उन्होंने आरजेडी से अलग होकर फिर से NDA का साथ पकड़ लिया। 2017 की यह राजनीतिक पलटी बिहार की सियासत का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिसने दिखाया कि गठबंधन कोई भी हो कुर्सी बनाने और बिगाड़ने का असली सूत्रधार नीतीश ही हैं।

2020: कम सीटों के बावजूद सीएम, नीतीश का राजनीतिक गुरुत्व
2020 चुनाव में जेडीयू सिर्फ 43 सीटों पर सिमट गई, जबकि बीजेपी उससे दोगुनी सीटें ले आई। इसके बावजूद भी मुख्यमंत्री का पद नीतीश को ही मिला। यह एक बार फिर साबित करता है कि बिहार में सत्ता का मॉडल ऐसा बन गया है जहाँ कम सीटों के बावजूद भी नेतृत्व उन्हीं के पास रहता है।

2022-24: एक और पलटी और दोबारा NDA में वापसी
2022 में नीतीश ने NDA छोड़कर फिर RJD के साथ मिलकर सरकार बनाई। मगर यह प्रयोग भी लंबे समय तक नहीं चल पाया और 2024 में वे दोबारा NDA में वापस आ गए। इन सियासी चालों ने साफ कर दिया कि सत्ता निर्माण चाबी हमेशा नीतीश के हाथों में रहती है और दोनों बड़े गठबंधन (NDA और महागठबंधन) उन्हें अपने साथ रखना ही राजनीतिक रूप से सुरक्षित विकल्प समझते हैं।

Bihar Politics: बिहार की नई सरकार में चिराग के जीजा को मिल सकती है नई ज़िम्मेदारी, जानिए क्यों तेज़ हुई चर्चा?
2025: 10वीं बार शपथ और राजनीतिक शैली की जीत
2025 विधानसभा चुनाव में जेडीयू-बीजेपी गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया। जेडीयू 85 और बीजेपी 89 सीटें लेकर सामने आईं। नतीजा वही मुख्यमंत्री फिर नीतीश। बीस साल में दसवीं बार शपथ लेने के साथ ही भारतीय राजनीति में एक अनोखा रिकॉर्ड बन जाएगा।

बिहार का गणित या 'नीतीश फैक्टर'?
नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा सिर्फ पलटियों की कहानी नहीं, बल्कि उस कौशल की मिसाल है जहाँ-
• हर गठबंधन उन्हें अपना नेता मानकर चलता है,
• हर राजनीतिक बदलाव के केंद्र में वही खड़े होते हैं,
• जनता भी अस्थिर माहौल में उन्हें एक स्थिर चेहरा मानती है।
20 साल के राजनीतिक इतिहास में एक ही सूत्र लगातार कायम रहा, समीकरण चाहे जैसे बदलें, बिहार का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहे।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+