NDA की नई सरकार में CM को लेकर सस्पेंस, BJP के फ़ायर ब्रांड नेता ने साफ लफ्ज़ों में बताया कौन होगा मुख्यमंत्री
NDA Mein CM Kaun: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की भारी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर जो सस्पेंस और राजनीतिक खींचतान बनी हुई थी, वह मंगलवार को काफी हद तक साफ होती दिखी। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने स्पष्ट कर दिया कि बिहार के अगले मुख्यमंत्री कौन होंगे।
गिररिराज सिंह ने कहा कि राजनीतिक गलियारों में जो भ्रम फैलाया जा रहा है, उसकी कोई जरूरत नहीं है। भाजपा की अलग बैठक होगी, जदयू की अलग और एनडीए के सभी दल अपनी-अपनी बैठकों में नेता का चुनाव करेंगे। उसके बाद संयुक्त बैठक में मुख्यमंत्री का नाम तय होगा, लेकिन विश्वास के साथ कह रहा हूं कि नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे।

"लोकतंत्र अब रानी के पेट से पैदा नहीं होता"- वाड्रा पर गिरिराज का तीखा हमला
बिहार चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए रॉबर्ट वाड्रा ने अनियमितताओं का आरोप लगाया था, जिस पर गिरिराज सिंह ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने टिप्पणी की कि वाड्रा किसी के दामाद जरूर हैं, लेकिन अब जमाना उनका नहीं है। लोकतंत्र अब किसी वंशानुगत अधिकार से नहीं चलता, बल्कि जनता तय करती है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि देश युवराजों को बार-बार नकार रहा है और जनता की पसंद ही लोकतंत्र की असली ताकत है।
सीएम पद को लेकर भाजपा-जदयू के बीच चली खींचतान पर लगा विराम
बीते कुछ दिनों से बिहार में मुख्यमंत्री पद को लेकर तरह-तरह की अटकलें चल रही थीं-क्या भाजपा खुद दावा करेगी? क्या जदयू दबाव में है? क्या सत्ता समीकरण बदलेंगे? इन तमाम सवालों के बीच गिरिराज सिंह का बयान बेहद निर्णायक माना जा रहा है। उनकी सार्वजनिक घोषणा ने संकेत दे दिया है कि एनडीए में मतभेद की कोई गुंजाइश नहीं है।
बिहार की राजनीति में गिरिराज के बयान से आया नया मोड़
बिहार नें नेतृत्व को लेकर अंतिम निर्णय प्रक्रिया पूरी होने के बाद औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। भाजपा के मजबूत और मुखर नेताओं में से एक होने के कारण उनका बयान संगठन की सोच को भी प्रतिबिंबित करता दिख रहा है। एनडीए की रणनीतिक बैठकों से पहले ही गिरिराज सिंह के इस बयान ने मुख्यमंत्री पद के सस्पेंस से लगभग पर्दा उठा दिया है।
राजनीतिक हलचल भले जारी रहे, लेकिन संकेत साफ हैं कि नीतीश कुमार की वापसी तय मानी जा रही है। अब निगाहें सिर्फ एनडीए की संयुक्त बैठक पर हैं, जहां औपचारिक तौर पर नेता का चयन किया जाएगा। गिरिराज सिंह के बयान ने न केवल खींचतान समाप्त की, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि बिहार की कमान एक बार फिर नीतीश कुमार के हाथों में ही आने वाली है।












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