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नई सरकार बनने के बाद भी बिखर सकता है NDA का समीकरण, क्या नीतीश और नायडू पलट देंगे बाज़ी?

NDA vs INDIA Alliance: एनडीए द्वारा जीत की हैट्रिक लगाने के बाद नरेंद्र मोदी ने लगातारी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि इस बार के चुनावी परिणाम में एनडीए गठबंधन के खाते में 292 सीटें आईं हैं। वहीं भाजपा ने 240 सीटों पर जीत दर्ज की है। कुल मिलाकर बहुमत से 20 सीट एनडीए के पास ज़्यादा है।

लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद लोगों के ज़ेहन में एक सवाल घर कर रहा है कि, क्या पीएम मोदी पिछले 10 साल के कार्यकाल की तरह इस बार सरकार चला पाएंगे। क्या नई सरकार चलेगी या फिर खेल बिगड़ेगा। ऐसे में सियासी समीकरण को समझने की ज़रूरत है। एनडीए गठबंधन के पास 292 सीटें हैं।

NDA equation may Spoil even after the formation of the new govt Nitish and Naidu turn the game

कांग्रेस ने 99 सीटों पर जीत दर्ज की है, इंडिया अलायंस के खाते में 234 सीटें आईं हैं, बहुमत से 38 सीटें कम हैं। प्रमुख दलों के अलावा 17 सीटों पर अन्य दलों ने जीत दर्ज की है। बहुमत में भले ही एनडीए का पलड़ा भारी है, लेकिन सियासत में कब बाज़ी पलट जाए यह कोई नहीं बता सकता।

एनडीए घटक दलों की बात की जाए तो भाजपा के बाद चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के पास सबसे ज्यादा 16 सांसद है। इसके बाद नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के पास 12 सांसद हैं। यह दोनों अपनी शर्तों पर सियासत करते हैं, ज़रा सा भी ऊंच-नीच होते ही राजनीतिक समीकरण ही बदल देते हैं।

सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ हो गई है कि नीतीश कुमार और चंद्र बाबू नायडू ने जो पोर्टफोलियो की डिमांड की थी। भाजपा ने उसे ख़ारिज करते हुए अन्य विभागों की ज़िम्मेदारी दे दी है। ऐसे में नायडू और नीतीश कुमार वेट एंड वाच की स्थिति में है। नई सरकार बनने के बाद एनडीए के प्रमुख दलों को समय चाहिए।

भाजपा को समय चाहिए कि कैसे वह 240 से 272 के आंकड़े को पाले ताकि प्रेशर पॉलिटिक्स से निजात मिल सके। नायडू इस इंतज़ार में हैं कि लोकसभा अध्यक्ष उनकी पार्टी बने। सूत्रों की मानें तो नायडू की पार्टी के लोकसभा अध्यक्ष को महागठबंधन भी समर्थन देने पर राज़ी है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस जुगाड़ में हैं कि अभी हाल ही में जिन प्रदेशों में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो, तो उसके साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का भी ऐलान कर दिया जाए। ऐसे में तीनों प्रमुख दल अपनी अपनी सियासत और शाख बचाने में जुटे हुए हैं।

एनडीए के तीनों के प्रमुख दलों के नेताओं के मन नहीं मिले तो समर्थन की डोर टूट सकती है। एनडीए का साथ छोड़ते ही नीतीश और नायडू का INDIA अलायंस पुरज़ोर तरीके स्वागत करने के लिए बाहें फैलाए खड़ा है।

सियासी समीकरण को देखते हुए आंकड़ों की बात करें तोस एनडीए के पास 292 सीटे हैं। इसमे टीडीपी की 16 सीटे और जदयू की 12 सीटें घटा दें तो राजग के पास 264 सीटें ही बचेंगी। जो कि बहुमत से 8 सीटें कम हैं। यानि की नायडू और नीतीश ने साथ छोड़ा तो मौजूदा सरकार अल्पमत में आ जएगी।

इंडिया अलायंस के नेता इस मौके को भुनाने की पूरी कोशिश करेंगे। वह अपने साथ नीतीश और नायडू को तो लाएंगे ही। वहीं अन्य दल और निर्दलीय को भी अपने साथ लाते हुए सरकार बनाने का दावा ठोक सकती है। कुल मिलाकर सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि अगर नीतीश-नायडू को उचित सम्मान नहीं मिला तो नई सरकार गिर सकती है।

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