Muzaffarpur-Hajipur Bypass: 13 साल की देरी, 200 करोड़ की लागत, बाइपास खुलने पर राहत लेकिन सुरक्षा इंतजाम अधूरे
Muzaffarpur-Hajipur Bypass: मुजफ्फरपुर-हाजीपुर बाइपास का 13 साल लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। शनिवार को इस बाइपास को आम यातायात के लिए खोल दिया गया, जिसके साथ ही इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। 17 किमी लंबे एनएच 22 के इस हिस्से का निर्माण विभिन्न कारणों से वर्षों तक अटका रहा।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दोबारा काम शुरू
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दोबारा काम शुरू हुआ और 200 करोड़ की लागत से इसे तैयार किया गया। शहर में भारी वाहनों के प्रवेश से लगने वाले भीषण जाम से अब मुक्ति मिलने की उम्मीद है। पटना, नेपाल, आरा और छपरा की ओर जाने वाले मार्ग अब तेज और सुगम हो जाएंगे, साथ ही यात्रियों को मुजफ्फरपुर शहर के भीतर के व्यस्त ट्रैफिक से नहीं गुजरना पड़ेगा।

कुछ महत्वपूर्ण काम अभी भी अधूरे
बाइपास में 66 अंडरपास, चार माइनर ब्रिज और एक आरओबी का निर्माण किया गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों को भी बिना बाधा आवागमन की सुविधा मिलेगी। हालांकि बाइपास खोले जाने से जहां स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में खुशी है, वहीं कुछ महत्वपूर्ण काम अभी भी अधूरे हैं। एनएच 27 पर जंक्शन बनाकर बाइपास को जोड़ने की योजना पूरी नहीं हो पाई है, जिसके कारण अभी वाहनों को यू-टर्न लेकर निकलना पड़ रहा है।
दुर्घटना की आशंका
एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्य एक हफ्ते में पूरा कर लिया जाएगा। उद्घाटन के दौरान यातायात पुलिस की तैनाती की घोषणा की गई थी, लेकिन पहाड़पुर और मधौल मोड़ पर शनिवार शाम तक एक भी ट्रैफिक जवान मौजूद नहीं मिला, जिसके कारण कई वाहन तेज रफ्तार में मनमाने तरीके से दौड़ते देखे गए। यह स्थिति दुर्घटना की आशंका को बढ़ाती है।
सुरक्षा के लिहाज से भी बाइपास पर चुनौतियां
सुरक्षा के लिहाज से भी बाइपास पर चुनौतियां सामने आई हैं। डीएम के निर्देश पर डीटीओ, ट्रैफिक डीएसपी और एसडीओ ने बाइपास का सुरक्षा ऑडिट किया, जिसमें एक दर्जन खतरनाक स्पॉट चिह्नित किए गए। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इन स्थानों पर स्पीड ब्रेकर और रंबल स्ट्रिप लगाने का निर्देश दिया गया है। तीन जगहों पर रोड मार्क और साइनेज लगाए गए हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर यह काम अभी बाकी है।
सर्वे पूरा और शेष कार्य भी जल्द
डीटीओ कुमार सतेंद्र यादव ने बताया कि सर्वे पूरा हो चुका है और शेष कार्य जल्द पूरा कराया जाएगा। ट्रैफिक डीएसपी ने मधौल मोड़, पहाड़पुर छोर और दरभंगा मोड़ पर स्थायी रूप से जवानों की तैनाती की पुष्टि की है। साथ ही वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए इन स्थानों पर ट्रॉली लगाई गई है और विशेष रूप से पहाड़पुर कट पर स्पीड ब्रेकर बनाने की अनुशंसा की गई है, क्योंकि यहां दुर्घटना की संभावना अधिक है।
कुल मिलाकर बाइपास का खुलना उत्तर बिहार के लिए बड़ी राहत और विकास का संकेत है, लेकिन यातायात प्रबंधन, सुरक्षा इंतज़ाम और अधूरे कार्यों को जल्द पूरा किए बिना इसे पूरी तरह सफल नहीं कहा जा सकता। यह परियोजना प्रशासनिक इच्छाशक्ति और बेहतर समन्वय की परीक्षा भी बन गई है।












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