OMG! 75 साल के बुज़ुर्ग ने ख़ुद किया अपना श्राद्ध और अब मनाई बरसी, बताई ये वजह
muzaffarpur: हरिचंद्र दास ने खुद के श्राद्ध और बरसी करने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि ‘हम साधु-संत हैं, अपना सारा काम ख़ुद करके जाएंगे’। इसलिए खुद से ही अपना श्राद्ध कर लिया । वहीं हरिचंद्र दास के दो बेटे हैं जो...
Muzzaffarpur News: इंसान की मौत के बाद उनके परिजन श्राद्ध और बरसी मनाते हैं, यह प्रथा शुरू से ही चली आ रही है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि जिंदा व्यक्ती ने खुद ही अपना श्राद्ध किया और उसकी बरसी भी मनाई। यह बात थोड़ी फिल्मी ज़रूर लग रही है, लेकिन झूठ नहीं हक़ीकत है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिला के एक शख्स मरने से पहले ही खुदा अपना श्राद्ध किया और फिर इस साल उसकी बरसी भी मनाई। आइए विस्तार से जानते हैं पूरा मामला क्या है और बुज़ुर्ग ने ये क़दम क्यों उठाया है।
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खुद के श्राद्ध भोज का किया आयोजन
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से यह अनोखा मामला सामने आया है। मिली जानकारी के मुताबिक भरतीपुर गांव (सकरा प्रखंड) के निवासी हरिचंद्र दास ने पिछले साल 14 नवंबर 2021 को खुद से अपना श्राद्ध किया था। वहीं इस साल उन्होंने पूरू विधि विधान से 4 नवंबर 2022 (शुक्रवार) को उन्होंने अपनी बरसी मनाई। इतना ही नहीं बाजाबते सिर मुंडवाए, धोती पहनी और बरसी पूजा जैसे सारे नियमों का पालन किया गया। वहीं बरसी मनाने के बाद दान की भी प्रक्रिया की गई। वहीं गांव में श्राद्ध भोज भी किया गया जिसमें परिवार के सदस्यों समेत ग्रामीणों ने भी शिरकत की।

75 वर्षी बुज़ुर्ग हरिचंद्र ने खुद किया अपना श्राद्ध
हरिचंद्र दास ने खुद के श्राद्ध और बरसी करने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि ‘हम साधु-संत हैं, अपना सारा काम ख़ुद करके जाएंगे'। इसलिए खुद से ही अपना श्राद्ध कर लिया । वहीं हरिचंद्र दास के दो बेटे हैं जो रोजगार के सिलसिले में दूसरे प्रदेश में रहते हैं। 75 वर्षी बुज़ुर्ग हरिचंद्र गांव में ही किसानी कर अपना गुज़ारा करते हैं। वहीं हरिचंद्र दास के श्राद्ध और बरसी पर ग्रामीणों ने कहा कि हम उनकी सोच का सम्मान करते हैं। वह पूरे नियमों का पालन करते हुए सारी प्रक्रिया को करते हैं।

‘जिंदा रहते ही ब्च्चों ने छोड़ दिया साथ’
मध्य प्रदेश के भोपाल से एक ऐसा ही मामला सामाने आया था, जहां बुज़र्ग ने खुद अपने हाथों से अपना पिंडदान और तर्पण किया था। भोपाल के वृद्धाश्रम की यह तस्वीर सोशल मीडिया काफी तेज़ी से वायरल हुई थी। वहीं बुज़ुर्ग के खुद के पिंडदान और तर्पण करने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि ज़िंदा रहते जब बच्चों ने साथ छोड़ दिया तो मरने के बाद उनसे क्या उम्मीद रखें। उन्होंने कहा की इंसान के मौत के बाद हर व्यक्ति जन्म मरण के बंधन से मुक्त होना चाहता है, सब मोक्ष प्राप्ती चाहते हैं, ताकि मरने के बाद कुछ भी तकलीफ़ नहीं हो।

मोक्ष प्राप्ति के लिए श्राद्ध
जिंदा रहते खुद का श्राद्ध करने के मामले में पंडितों की मानें को ऐसा नहीं करना चाहिए। भगवान ना करे की किसी को जीते जी खुद का पिंडदान और तर्पण करना पड़े, लेकिन कुछ लोगों के साथ मजबूरियां हो जाती हैं तो वह खुद ये कदम उठा लेते हैं। बुज़ुर्ग होने पर बच्चों मां-बाप को छोड़ देते हैं, उनका खयाल नहीं रखते हैं या फिर वृदाश्रम में डाल लेते हैं। ऐसे अगर यह लोग खुद की मोक्ष प्राप्ति के लिए श्राद्ध कर रहे हैं तो इसे गलत भी नहीं कह सकते हैं।
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