Bihar Politics: मुखिया संघ बढ़ा सकते हैं नीतीश सरकार की मुश्किलें, जानिए क्या है मांग?
Bihar Politics: बिहार में आगामी चुनाव को लेकर सियासी पारा तो चढ़ ही चुका है। एक तरफ नीतीश कुमार केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता को मज़बूत करने में जुटे हैं। वहीं बिहार में ही उनकी मुश्किलें बढ़ती हुई नज़र आ रही हैं। प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में मुखिया संघ अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
मोतिहारी ज़िला में 16 अगस्त से मुखिया संघ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। अब उन्हें राजनेताओं का भी समर्थन मिलने लगा है। मुखिया की मांगों का महेश्वर सिंह (विधान परिषद सदस्य) ने समर्थन किया है। उन्होंने सड़क से लेकर सदन तक मुखिया संघ के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है।

एमएलसी महेश्वर सिंह ने कहा कि सरकार महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपनों पर हमला कर रही है। ग्राम पंचायत के किसी भी योजना का काम सरकार किसी भी एजेंसी से कराने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन काम का क्वालिटी चेक मुखिया से कराए कि काम ठीक हुआ है या नहीं। मुखिया संघ इस बात के लिए भी राज़ी हैं।
समस्तीपुर ज़िला में भी मुखिया संघ ने अपनी 19 सूत्री मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया। मुखिया संघ की मांग है कि 73वां संविधान संशोधन के तहत ग्राम सभा को पूरी तरह से हक दिया जाए। ग्राम सभा की रक्षा के मद्देनज़र लिए गए फ़ैसलों को अमली जामा पहनाया जाए। मुखिया प्रतिनिधि राजेश चौधरी ने कहा कि हम लोग ठेकेदारी के लिए मुखिया नहीं बने, जनता की सेवा के लिए चुने गए हैं।
राजू बैठा (सचिव, प्रदेश मुखिया संघ) ने कहा कि ग्रामसभा को स्वतंत्र करने के साथ ही पंचायती राज के तहत दिए गए 29 अधिकारों को वापस ग्राम पंचायत को दिए जाएं। योजनाओं का काम वापस से ग्राम पंचायत को देने के साथ ही 19 मांगों को पूरा किया जाए।
डॉ. तरुण चौधरी (एमएलसी, भाजपा) ने कहा कि पंचायत सरकार भी केंद्र और राज्य सरकार की तरह ही है। प्रदेश सरकार को पंचायत सरकार के कामों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। पंचायत का मुखिया ही सही तरीक़े से पंचायत का विकास कर सकता है। राजीव कुमार झा (अध्यक्ष, मुखिया संघ समस्तीपुर) ने कहा कि सरकार मुखिया के अधिकारों का हनन कर रही है। पंचायत की विभिन्न योजनाओं का काम दूसरे को दिए जाने से काम पर असर पड़ रहा है।
मुखिया संघ के सदस्यों ने कहा कि पंचायती राज विभाग संविधान द्वारा ग्राम पंचायत को मिले अधिकारों का हनन कर रही है। इस पर रोक लगाने के साथ ही ग्राम सभा की रक्षा के मद्देनज़र पारित नीतियों को लागू किया जाए। ग्राम पंचायत की योजनाओं के सेलेक्शन को अहमियत देते हुए काम करने की इजाज़त दी जाए। अगर सरकार हमारी मांगों को नहीं मानती है तो प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा।












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