मुकेश सहनी की पार्टी का हो सकता है बीजेपी में विलय, दल-बदल का नियम भी नहीं आएगा आड़े

पटना, 23 मार्च। बिहार की राजनीति से बड़ी खबर आ रही है। राज्य में एनडीए के सहयोगी मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी के सभी तीन विधायकों ने पार्टी छोड़ दी है। ऐसी राजनीतिक सुगबुगाहट है कि सहनी की पार्टी का भाजपा में विलय हो सकता है।

तीनों विधायकों ने छोड़ी पार्टी

तीनों विधायकों ने छोड़ी पार्टी

बुधवार को मुकेश सहनी को उस समय बड़ा झटका लगा जब उनकी पार्टी वीआईपी के तीन विधायकों मिश्री लाल यादव, राजू सिंह और स्वर्णा सिंह ने पार्टी छोड़ दी। इन विधायकों ने एक तरफ पार्टी छोड़ी और साथ ही बीजेपी को समर्थन का ऐलान भी कर दिया। तीनों विधायकों ने बुधवार को विधानसभा स्पीकर विजय सिन्हा से मिलकर उन्हें इस बारे में जानकारी दी।

बीजेपी में विलय को मान्यता

बीजेपी में विलय को मान्यता

विधायकों के समर्थन का पत्र मिलने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने बीजेपी में विधायकों के विलय को मान्यता भी दे दी। इसके साथ ही अब बिहार विधानसभा में सहनी की पार्टी का अस्तित्व खत्म हो गया है। हालांकि अभी विधान परिषद में पार्टी बनी हुई है। मुकेश सहनी विधान परिषद के सदस्य हैं लेकिन उनका कार्यकाल जल्द खत्म होने वाला है। ऐसे में वहां भी जल्द ही पार्टी खत्म हो सकती है।

क्या कहता है दल-बदल नियम?

क्या कहता है दल-बदल नियम?

मुकेश सहनी की वीआईपी के बीजेपी में शामिल होने के लिए जिस दल-बदल नियम को मुश्किल बननी थी वह पहले ही खत्म हो चुका है। नियम के मुताबिक अगर किसी दल के दो तिहाई सदस्य एक साथ दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं तो उन पर दल-बदल विरोधी नियम लागू नहीं होगा। साथ ही अगर पूरी पार्टी ही दूसरी पार्टी में विलय कर ले तो भी यह नियम लागू नहीं होगा। वीआईपी के तो सारे विधायक ही बीजेपी में जा चुके हैं ऐसे में मुकेश सहनी चाहकर भी इसे रोक नहीं सकते।

अमित शाह ने कहा था- चुनाव बाद करना है विलय

अमित शाह ने कहा था- चुनाव बाद करना है विलय

मुकेश सहनी की पार्टी के बीजेपी में विलय का रास्ता भले ही अब बना है लेकिन इसकी भूमिका बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान ही बन चुकी थी। मुजफ्फरपुर से बीजेपी सांसद अजय निषाद ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के पहले मुकेश सहनी की अमित शाह के साथ मीटिंग हुई थी जिसमें अमित शाह ने कहा था कि अभी आप चुनाव लड़ लीजिए लेकिन चुनाव के बाद आपको भाजपा में अपनी पार्टी का विलय करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि सहनी ने पार्टी का विलय तो नहीं किया उल्टे ये गड्ढा खोदने के लिए यूपी चले गए। दरअसल वीआईपी ने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारे थे, अजय निषाद इसे लेकर ही मुकेश सहनी पर हमलावर थे।

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